पानी पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई की मांग

फिरोजपुर फीडर के नवनिर्माण का मामला डीपीआर से आगे नहीं बढऩे पर जीकेएस ने रोष जताया

श्रीगंगानगर, 29 जुलाई (का.सं.)। जिले में किसानों के सबसे बड़े संगठन ग्रामीण किसान मजदूर समिति (जीकेएस) ने पंजाब में हरीके बैराज से पानी पाकिस्तान को जाने से रोकने के लिए पुरानी बीकानेर कैनाल कि जल्द से जल्द सफाई करवाने की मांग करते हुए गंग नहर परियोजना को पानी मुहैया करवाने वाली पंजाब में स्थित फिरोजपुर फीडर नहर के नव निर्माण का मामला विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) से आगे नहीं बढऩे पर रोष व्यक्त किया है। गुरुद्वारासिंह सभा में कल शाम को संयोजक रणजीतसिंह राजू की अध्यक्षता में जीकेएस की बैठक में पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई, फिरोजपुर फीडर के नव निर्माण को जल्द से जल्द शुरू करवाने, मूंग की सरकारी खरीद, बिजली के बढ़े बिल वापस लेने, नहर उपयोक्ता संगम अध्यक्षों के चुनाव करवाने, गंग कैनाल परियोजना की मुख्य शाखा सहित सभी नहरों की साफ-सफाई करवाने और इस परियोजना को आपात स्थिति में पानी उपलब्ध करवाने वाली कई वर्षों से बंद पड़ी लिंक चैनल को दुरुस्त करवाने की समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया।बैठक में उपाध्यक्ष विक्रमजीतसिंह, महासचिव अवतारसिंह, प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा, कानूनी सलाहकार हरविंदरसिंह गिल, कोषाध्यक्ष चमकौर सिंह आदि पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के पश्चात जीकेएस ने जारी किए बयान में कहा कि पंजाब में हरीके बैराज की सरहिंद फीडर से निकलने वाली फिरोजपुर फीडर नहर की हालत अत्यंत जर्जर हो गई है। सभी जानते हैं कि अगर फिरोजपुर फीडर नहर टूट गई तो जिले का किसान बर्बाद हो जाएगा। अगर यह नहर टूट जाती है तो विकल्प के रूप में गंग कैनाल परियोजना को पानी मुहैया करवाने का कोई जरिया नहीं है। जीकेएस ने कहा है कि काफी समय से पंजाब और राजस्थान की सरकारें फिरोजपुर फीडर नव निर्माण की डीपीआर बनवा कर श्रेय लेने में लगी हैं, जबकि डीपीआर से आगे नहर निर्माण के लिए जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा। डीपीआर बनने के बाद भी बहुत सी कागजी कार्रवाई बाकी है। इसके बाद ही नवनिर्माण का मार्ग प्रशस्त हो पाएगा। लिहाजा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने पर बल दिया गया। इसी प्रकार पंजाब में पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई की मांग का जिक्र करते हुए जीकेएस ने कहा है कि इसी नहर के जरिए हरीके बैराज से पानी को पाकिस्तान जाने से रोका जा सकता है। सिर्फ 45 आरडी की पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई हो जाए और राजस्थान-पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर स्थित लोहागढ़ में इंदिरा गांधी नहर की मुख्य शाखा से श्रीगंगानगर शहर के समीप तक बने हुए गंग नहर लिंक चैनल की सफाई करवा कर इसमें पानी का पॉन्ड लेवल मैंटेन कर दिया जाए तो कभी भी आपात स्थिति में गंग कैनाल परियोजना को विकल्प के रूप में निरंतर पानी मुहैया करवाया जा सकता है। इससे गंग कैनाल में बार-बार पानी की कटौती अथवा किसी और कारण से होने वाले उतार-चढ़ाव से किसान प्रभावित नहीं होंगे। उन्हें निरंतर पानी मिलता रहेगा। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार को पुरानी बीकानेर कैनाल की सफाई के लिए करीब एक करोड़ का बजट दिए हुए डेढ़ वर्ष हो गया है। अभी तक सफाई कार्य शुरू नहीं हुआ है।
जीकेएस में कहा है कि कुछ ही दिनों में मंडियों में मूंग की आवक शुरू होने वाली है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इस की सरकारी खरीद की व्यवस्था नहीं की है।गत वर्ष की तुलना में इस बार मूंग की बिजाई ज्यादा रकबे में हुई है। इसलिए समय रहते सरकार को खरीद की व्यवस्था कर लेनी चाहिए ताकि किसानों को नुकसान नहीं हो। राज्य सरकार द्वारा बिजली के बढ़ाए गए बिलों पर रोष व्यक्त करते जीकेएस ने कहा है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस ने वायदा किया था कि 5 वर्ष तक किसानों के बिजली के बिल नहीं बढ़ाई जाएंगे। अब बिजली दरों में वृद्धि कर दी गई है। इस वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए। गंग कैनाल परियोजना क्षेत्र की सभी छोटी-बड़ी नहर वितरिकाओं के जल उपयोक्ता संगमों के चुनाव काफी समय से नहीं हुए हैं। यह चुनाव जल्दी करवाने की मांग की है। गंग कैनाल परियोजना क्षेत्र सामान रूप से पानी का वितरण करने के लिए सभी नहरों के हेडों पर गेज सिस्टम नया लगाए जाने की मांग की गई है। नहरों की टेल (अंतिम छोर) पर पूरा पानी पहुंचाने के लिए राजस्थान-पंजाब सीमा पर खखां गांव के नजदीक गंगा कैनाल की मुख्य शाखा पर स्थापित हैड से लेकर डाबला हैड तक संपूर्ण सफाई करवाने और मुख्य शाखा सहित सभी वितरिकाओं की सफाई की मांग भी जीकेएस ने की है। 200 क्यूसेक पानी की बंदरबांट बैठक में रोष व्यक्त किया गया कि पंजाब से गंग कैनाल में 2100 क्यूसेक पानी उपलब्ध होते हुए भी इस परियोजना की नहरों को 1550 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है। करीब 350 क्यूसेक पानी की छिज्जत पंजाब में हो जाती है। इसके बाद 200 क्यूसेक पानी रेगुलेशन से बाहर रखा जा रहा है। इस पानी की कहां और कैसे बंदरबांट जल संसाधन विभाग के अधिकारी कर रहे हैं, इसका कोई अता पता नहीं है। कई नहरों की लगातार दो-दो पानी की बारियां सूखी जा रही हैं। किसान संगठन ने कहा है कि बरसाती सीजन चल रहा है और नहरों में पानी के साथ बहुतायत मात्रा में केळी आने लगी है। केळी से पानी का प्रवाह ही नहीं रुकता बल्कि नहरों के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। 4 वर्ष पूर्व 18 जुलाई 2016 को किए गए एक समझौते के मुताबिक गंग कैनाल के शिवपुर हैड पर केळी कटर मशीन स्थापित की जानी थी, जो अभी तक नहीं की गई है।इस मशीन को जल्दी लगाने की मांग की गई है। हाल ही केंद्र सरकार द्वारा कृषि और किसानों के संबंध में लाए गए तीन नए अध्यादेश ओं का कड़ा विरोध जारी रखते इसे लेकर चल रहे राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों में सक्रियता से भूमिका निभाने पर निर्णय लिया गया। समिति ने कहा है कि यह तीन नए अध्यादेश किसानों को बर्बाद कर देंगे।इन सब मुद्दों को लेकर समिति ने आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन पर विचार विमर्श किया।

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