डिजिटल क्राउडफंडिंग ने दुर्लभ बीमारी वाले भाई-बहनों को दी नई जिंदगी

 

जयपुर, 22 अक्टूबर(एजेन्सी)। मेडिकल इमरजेंसियां कुछ ऐसे भावनात्मक पलों की कहानियाँ बयाँ करती हैं कि जो हमारे शरीर और दिमाग में सदमा, निराशा, आशा और डर सब एक साथ पैदा कर देते हैं। जयपुर के मोटर साइकिल मैकेनिक, हेमराज कुमावत की हालत कुछ ऐसी ही थी जब उनके 5 साल के बेटे गर्वित और 3 साल की बेटी देवांशी के शरीर में फैक्टर ङ्ग111 का पता चला, जो कि एक दुर्लभ बीमारी है जिससे दिमाग में रक्त का बहाव होता है। उनके दिमाग में खून बहता था और अगले 4-5 सालों तक सहयोग और देख-रेख के साथ हर हफ्ते प्लाज्मा ट्रांस्फ्यूजन करवाने की जरूरत पड सकती थी। उसके पास जो कुछ भी था वो सबकुछ उसने बच्चों का इलाज करवाने में लगा दिया। चाहे कामयाबी मिलने के आसार जितने भी कम थे, उसने हर संभव कोशिश की और इस तरह से उसे क्राउडफंडिंग का पता चला। उसने मिलाप पर एक फंडरेजर शुरू किया और उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था, कि दुनिया भर से 916 लोग उसके बच्चों की मदद करने के लिए लोग आये और सिर्फ 2 हफ्तों में 23 लाख रुपये इकठ्ठा हो गए। उस परिवार को यह जानकर बहुत तसल्ली हुई कि दुनिया भर के अजनबियों की दरियादिली से ही उसके बच्चों का इलाज संभव हो पाया। मयूख चौधरी, सीईओ और को-फाउंडर, मिलाप ने कहा कि पिछले 2 सालों में इस प्लैटफॉर्म पर जयपुर से शुरू किए गए फंडरेजर्स करीब 3 गुना बढ गए हैं। असल में, जयपुर आपस में गरीबी से जुडे हुए ऑनलाइन ग्रुप्स और कम्युनिटीज के जरिए ऑनलाइन फंडराइजऱ शुरू करने के मामले में एक बडा राज्य है। इस राज्य के करीब 90′ फंडरेजर्स में अपने लोग एवं ग्रुप्स अपने प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करके पैसे इकठ्ठा करते हैं। मदद का एक अहम रास्ता होने के अलावा, क्राउडफंडिंग ने इंसानों के कनेक्शन को एक नया रूप दिया है। बडे पैमाने पर सामने आनेवाली रुकावटों को पीछे छोडते हुए हमदर्दी पैदा कर रहा है और हजारों लोगों की जिंदगी को बदल रहा है। मिलाप कामयाब तरीकों के आधार पर, जब भी जरूरत हो, फोन करने के जरिए रास्ता दिखाकर तुरंत सलाह देकर हर अभियान को शुरू करने वाले की मदद करता है। श्री चौधरी ने बताया कहा कि यह पहली बार किसी अभियान को शुरू करने वाले लोगों की खासतौर पर बहुत मदद करता है, ताकि उनके फंडरेजर की पहुँच ज्यादा से ज्यादा बढा सकें, और अपनी जरूरत को सही लोगों, ग्रुप्स और कम्युनिटीज तक पहुँचा सकें, जहाँ उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

 

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