डिस्काउंट की होगी वापसी ऐमजॉन और ग्रोफर्स पर ऑफर शुरू

कोलकाता/बेंगलुरु (एजेंसी)। FMCG और ग्रॉसरी प्रॉडक्ट्स पर एक बार फिर से कन्ज्यूमर ऑफर्स की वापसी होती दिख रही है। ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर डिस्काउंट्स, कैशबैक, बैंक और डिजिटल वॉलिट ऑफर वापस दिखाई देने लगे हैं। मॉल्स और अधिकतर बाजारों को खोले जाने की इजाजत दिए जाने के बाद कन्ज्यूमर्स को अपैरल रिटेलर्स, दूसरे बड़े ब्रैंड्स और दिग्गज ईकॉमर्स कंपनियों की ओर से भी सभी कैटिगरी में भारी डिस्काउंट ऑफर देखने को मिल सकते हैं।मार्च के आखिरी हफ्ते में लॉकडाउन लागू होने के कुछ दिनों पहले से ही लोगों ने सामान की भारी मात्रा में खरीदारी करनी शुरू कर दी थी, जिसके चलते कंपनियों ने स्नरूष्टत्र और ग्रॉसरी उत्पादों से ऑफर हटा लिए थे। हालांकि ऐमजॉन, ग्रोफर्स, बिग बास्केट, स्पेंसर्स रिटेल ने दोबारा कन्ज्यूमर्स ऑफर्स देने शुरू कर दिए हैं। ऐसा सप्लाई को लेकर स्थिति सामान्य होने और मांग में आई तेजी के धीमा होने के चलते हुआ है।ग्रोफर्स के सीईओ अलबिंदर ढींढसा ने कहा कि सप्लाई चेन के सामान्य होने से ऑपरेशन की लागत घटी है। ऐसे में इस बचत को कंज्यूमर्स को पास किया जा रहा है। बिस्किट बनाने वाली अग्रणी कंपनी पारले प्रॉडक्ट्स के कैटिगरी हेड मयंक शाह ने बताया कि सप्लाई में सुधार हुआ है, जिससे डिस्काउंट भी वापस आ गया है। बिग बास्केट के नेशनल हेड (बाइंग और मर्चेंडाइजिंग) ने बताया कि अगले 15 दिनों में डिस्काउंट ऑफर पूरी तरह से लौट जाएंगे।करीब 80-85त्न पिनकोड पर डिलीवरी चालू हो चुकी है। ऐसे में एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और पेटीएम मॉल जैसी ईकॉमर्स कंपनियां भी डिस्काउंट सेल्स को लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने बताया कि डिस्काउंट सेल्स को इस महीने के अंत में या अगले महीने की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है। पेटीएम मॉल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीनिवास मोतेई ने बताया कि कंपनी कैशबैक ऑफर के लिए बैंकों से बातचीत कर रही है। पेटीएम मॉल और एमेजॉन दोनों ने कहा कि कीमत सेलर्स तय करते हैं। वहीं फ्लिपकार्ट ने ईटी के भेजे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। ऑनलाइन टेलिविजन ब्रैंड्स- कोडक और थॉमसन बनाने वाली कंपनी स्क्कक्करु के सीईओ अवनीत सिंह मारवाह ने बताया, ‘ब्रैंड्स को आने वाले समय में मांग कम रहने की उम्मीद है, ऐसे में उन्हें अपनी इन्वेंटरी निकालने की जरूरत होगी।Ó ब्रैंड्स को डर है कि छंटनी और सैलरी में कटौती के चलते अगले कुछ महीनों में उपभोक्ता खर्च में गिरावट आएगी।

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