क्या आप पहली नजर के प्यार में यकीन करती हैं? जानिए इस बारे में क्या कहता है विज्ञान

प्यार हर व्यक्ति के लिए अलग रूप में हो सकता है, लेकिन इसके पीछे विज्ञान एक ही है। कई शोधों में ये पुष्टि होती है कि प्यार हॉर्मोन्स के कारण ही होता है।लव स्टोरी किसे नहीं पसन्द होती, रोमियो-जूलिएट से लेकर राज-सिमरन तक, प्यार एक ऐसा विषय है जिसे लेकर हमारे मन में सॉफ्ट कॉर्नर है। इन फिल्मों के अनुसार प्यार दिल से होता है। जबकि असल मे ये पूर्णत: मस्तिष्क का खेल है। प्यार के पीछे का विज्ञान तो सभी जानते हैं कि ये हॉर्मोन्स के कारण होता है। लेकिन क्या पहली नजर में प्यार संभव है? आइये जानते हैं क्या कहता है इस बारे में विज्ञान!
पहली नजर में प्यार के बारे मे क्या कहता है साइंस?
2017 के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 72त्न पुरुष और 61त्न महिलाएं पहली नजर के प्यार में विश्वास करती हैं। 2004 के एक अध्ययन में पाया गया कि एक तिहाई अमेरिकियों का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इसका अनुभव किया है।
कुछ वैज्ञानिक हैं जो इस अवधारणा का समर्थन करते हैं: कुछ शोधों में पाया गया है कि लोगों को कुछ सेकंड के भीतर यह महसूस हो जाता है कि क्या वे किसी में रुचि रखते हैं। और न्यूरोलॉजिकल रूप से बात करें तो, एक सेकंड का केवल पांचवा हिस्सा ही प्यार की भावनाओं से जुड़ी न्यूरोकेमिकल प्रतिक्रिया को शुरू कर देता है।लेकिन अन्य शोध इस सिद्धांत को नकार देते हैं। पर्सनल रिलेशनशिप जर्नल में एक 2017 के अध्ययन में एकल अजनबियों के बीच पहले कुछ मुलाकातें करवाई गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि तत्काल आकर्षण की भावनाएं वास्तव में पहली मुलाकात में हो सकती हैं। कुछ लोगों ने इन भावनाओं को पहली नजर में प्यार के रूप में वर्णित किया।इन लोगों ने अपने अनुभव के हिस्से के रूप में इंटिमेसी, जुनून और रिश्ते के प्रति समर्पण की भावनाओं को रिपोर्ट नहीं किया। पहली नजर में प्यार का अनुभव मुख्य रूप से दूसरे व्यक्ति से शारीरिक रूप से आकर्षक था और इसमें लगाव की भावना नहीं थी।दूसरे शब्दों में, रोमांटिक प्रेम आमतौर पर पहली नजर में नहीं हो सकता। मनोवैज्ञानिक और सेक्स थेरेपिस्ट लॉरेन फोगेल मेर्सी के अनुसार, पहली नजर में एक मजबूत आकर्षण हो सकता है, लेकिन किसी के लिए रोमांटिक प्रेम को यह जानने की आवश्यकता है कि वे कौन हैं, उनके चरित्र की जानकारी ही असल प्रेम को जन्म देती है।
वास्तविक प्रेम के चरण
बिहेवियरल एंथ्रोपोलॉजिस्ट हेलेन फिशर के अनुसार, रोमांटिक प्रेम के विकास में तीन चरण हैं:
डिजायर : सबसे पहले आप अपने पार्टनर के प्रति एक मजबूत शारीरिक और यौन आकर्षण महसूस करते हैं।
आकर्षण : आप उस व्यक्ति के प्रति अत्यधिक आकर्षित महसूस करते हैं, उनके बारे में लगातार सोचते रहते हैं, हर समय उनके आस-पास रहना चाहते हैं और जब आप साथ होते हैं, तो घबराहट महसूस करते हैं। ये आकर्षण उनके लुक्स ही नहीं उनकी आदतों और पसन्द-नापसंद के प्रति भी होता है।
लगाव : आप अपने साथी के साथ गहरे प्यार, विश्वास और संतोष की भावनाओं के साथ सुरक्षित रूप से जुड़ते हैं। इस स्टेज तक पहुंचने में पुरुषों को अमूमन तीन महीने और महिलाओं को छह महीने तक लग जाते हैं।
डॉ फिशर कहती हैं, सभी तीन तत्वों को संयुक्त रूप से प्यार माना जाता है।
अगर खुद में नजर आ रहे हैं ये बदलाव तो आप प्यार में हैं-
आप इस व्यक्ति से जुड़ाव महसूस करते हैं।आपको शारीरिक आकर्षण से अधिक भावना महसूस होती है – वहां एक भावनात्मक लगाव है।जब आप इस व्यक्ति के साथ होते हैं, तो पेट में तितलियां महसूस नहीं होती, बल्कि आप एक स्थिर संतोष महसूस करते हैं।आप उनकी जरूरतों के प्रति बहुत चौकस हैं और उनका ध्यान रखने की कोशिश करते हैं।उनकी पसंद-नापसंद का ख्याल आप इसलिए नहीं रखते, क्योंकि आप चाहते हैं कि यह व्यक्ति आपको पसंद करे। आप बस यही चाहते हैं कि वे खुश रहें।आप इस व्यक्ति की भलाई के बारे में ईमानदारी से परवाह करते हैं।आप इस व्यक्ति की देखभाल करने और उन्हें चोट पहुंचाने से बचने के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।जब आप इस व्यक्ति के साथ होते हैं तो आप जीवित, पूर्ण और पूर्ण रूप से खुद को महसूस करते हैं।इस व्यक्ति की आंतरिक दुनिया के बारे में अधिक जानने का विचार आपको खुश करता है।आप खुद का एक बेहतर वर्जन बनना चाहते हैं।आप इस व्यक्ति के साथ भविष्य या दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के बारे में सार्थक सोच रहे होंगे। अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है, तो जी हां आप प्यार में हैं। और आपका प्यार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।

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