रोजाना बादाम खाने से चेहरे की झुर्रियां होंगी कम: स्टडी

बादाम खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है इसमें कोई शक नहीं लेकिन अब बादाम सेहत के साथ-साथ स्किन के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि रोजाना बादाम खाने से चेहरे की झुर्रियां होंगी कम। यूं तो चेहरे पर एजिंग के निशान न दिखें इसके लिए लोग, खासकर महिलाएं क्या नहीं करतीं। ऐंटि-एजिंग क्रीम लगाने से लेकर घरेलू नुस्खे तक। लेकिन अब एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि स्किन की देखभाल संबंधी आपके रूटीन में शामिल करने लायक एक दिलचस्प चीज आपकी मेकअप किट की बजाय किचन में मौजूद है और वह है बादाम।
रोजाना बादाम खाना स्किन के लिए फायदेमंद
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस के शोधकर्ताओं ने एक पायलट स्टडी में पाया कि स्नैक्स के तौर पर रोजाना अगर बादाम का सेवन किया जाए तो मीनोपॉज पार कर चुकी महिलाओं (वैसी महिलाएं जिन्हें पीरियड्स आना बंद हो चुका है) में झुर्रियों की चौड़ाई और उनकी गहनता कम हुई। इस स्टडी को आमंड बोर्ड ऑफ कैलिफोर्निया ने फंड किया था और यह त्वचा की सेहत पर बादाम के प्रभावों की जांच करने वाला अपनी तरह का पहला अध्ययन था। इसे लेकर एक डीटेल और लॉन्गटर्म फॉलो-अप स्टडी जारी है।
मीनोपॉज वाली 28 महिलाओं पर की गई स्टडी
16 सप्ताह के इस रैंडम कंट्रोल्ड टेस्ट में मीनोपॉज प्राप्त कर चुकी 28 वैसी स्वस्थ महिलाओं को शामिल किया गया था जिनकी स्किन टाइप 1 या टाइप 2 फिट्जपैट्रिक (ऐसी त्वचा जिसमें धूप के संपर्क में आने पर बर्न होने की प्रवृत्ति अधिक होती है) थी और उन्हें दो ग्रुप में रखा गया था। एक ग्रुप में महिलाओं ने नाश्ते के रूप में बादाम खाया। यह मात्रा उनके कुल दैनिक कैलरी सेवन का 20त्न या प्रतिदिन औसतन 340 कैलरी (60 ग्राम) थी। दूसरे समूह ने एक नट-फ्री स्नैक खाया। यह भी उनके रोजाना के कैलरी उपभोग का 20त्न ही था। इसमें एक सीरियल बार, ग्रेनोला बार या प्रेट्ज़ल (एक प्रकार की रोटी) शामिल थी।
16 सप्ताह तक 2 ग्रुप्स पर की गई स्टडी
स्टडी में शामिल महिलाओं ने इन स्नैक्स के अलावा अपना नियमित खानपान लिया और कोई भी नट या नट्स से युक्त उत्पाद नहीं खाए। इस दौरान अध्ययन की शुरुआत में और फिर 4 सप्ताह, 8 सप्ताह, 12 सप्ताह और 16 सप्ताह में त्वचा के आकलन किए गए। हर विजिट में हाई-रिजॉल्यूशन फेशियल इमेजिंग का उपयोग करके चेहरे की झुर्रियों का आकलन किया गया और 3डी फेशियल मॉडलिंग और माप को प्रामाणिक बनाया गया।
झुर्रियों की चौड़ाई और गहनता की हुई जांच
राजा शिवमणि, एमडी एमएस एपी, इंटिग्रेटेड डर्मेटॉलजिस्ट और स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता बताते हैं, ‘इन हाई रिजॉल्यूशन कैमरों की बदौलत किसी भी झुर्री की 3डी पुनर्रचना मुमकिन हो पाती है, ताकि उनकी चौड़ाई और गहनता जैसे प्रमुख लक्षणों को मैप किया जा सके। गहनता स्कोर किसी झुर्री की गहराई और लंबाई की गणना होती है।’ सीबम उत्पादन और ट्रांसएपिडर्मल वॉटर लॉस (टीईडब्ल्यूएल) को मापकर स्किन बैरियर फंक्शन का भी आकलन किया गया। स्किन बैरियर फंक्शन यह जांच करता है कि त्वचा की अवरोधन सुरक्षा कितनी दमदार है और यह त्वचा को नमी की कमी से होने वाले नुकसान (टीईडब्ल्यूएल) और वातावरण से होने वाले हानिकारक तत्वों से कितने अच्छे ढंग से बचाती है।
16 सप्ताह में स्टडी की समाप्ति पर फोटोग्राफिक इमेज एनालिसिस ने दूसरे ग्रुप के मुकाबले में स्नैक के तौर पर बादाम खाने वाले ग्रुप की महिलाओं में महत्वपूर्ण सुधार देखा-
– झुर्रियों की चौड़ाई में 10त्न की कमी
– झुर्रियों की गहनता में 9त्न की कमी
भीतर से सेहत अच्छी हो तो चेहरे पर नजर आता है निखार
दोनों ही ग्रुप में स्किन बैरियर फंक्शन में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुए। डॉ.शिवमणि कहते हैं, सेहत को भीतर से सुधारा जाए तो उसका असर बाहर भी नजर आता है। इसी आइडिया के तहत खानपान को त्वचा की सेहत बेहतर बनाने के एक साधन के रूप में देखा जाता है। जो लोग उम्र बढऩे की प्रक्रिया से सेहतमंद ढंग से गुजरने के लिए विकल्पों को तलाश रहे हैं, उनकी दिलचस्पी इसमें बढ़ रही है। बादाम ऐंटिऑक्सिडेंट, विटमिन ई का एक रिच सोर्स है और आवश्यक फैटी ऐसिड व पॉलीफेनल्स प्रदान करता है। बादाम गुड न्यूट्रियंट का एक स्मार्ट विकल्प है और जैसा कि इस अध्ययन में देखा गया है, बढ़ती उम्र में हेल्दी फूड के तौर पर बादाम को शामिल किए जाने के कई लाभ भी हैं, विशेष रूप से मीनोपॉज वाली महिलाओं के लिए।
अध्ययन की सीमाएं –उम्र का बढऩा यानी एजिंग लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए 16 वीक के इस रिसर्च के निष्कर्षों को लॉन्ग टर्म के लिए वैरिफाइ करना मुश्किल हो सकता है। त्वचा पर उम्र के असर की प्रकृति भी बहु-कारक होती है और भले ही कुछ समूहों को बाहर रखा गया था (जैसे- धूम्रपान करने वाले) किंतु उम्र का असर पैदा करने वाले कई प्रकार के तत्व हैं, जैसे कि अल्ट्रा-वॉयलेट किरणें और स्ट्रेस जो इस अध्ययन के दायरे से बाहर थे। यह अध्ययन कॉस्मेटिक आकलन तक सीमित था क्योंकि कोलेजन उत्पादन को लेकर कोई मापन नहीं किया गया था। स्टडी में बीमार या यंग लोगों को शमिल नहीं किया गया इसलिए इसके परिणाम मीनोपॉज वाली हेल्दी महिलाओं तक ही सीमित हैं। इसके अलावा, यह सीमित संख्या वाले लोगों पर किया गया एक पायलट रिसर्च था। इस दिशा में भविष्य में होने वाले रिसर्च बड़े ग्रुप के साथ किए जाने चाहिए।

 

 

 

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