संगठित अपराधों, महिलाओं व कमजोर वर्गों के विरूद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए होगी प्रभावी कार्यवाही

आमजन की पुलिस तक सुगम पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान

जयपुर, 6 जनवरी (का.सं.)। राजस्थान पुलिस वर्ष 2019 में लगभग सभी गंभीर अपराधों को अविलंब वर्कआउट कर मुल्जिमों को गिरफ़्तार किया गया है तथा सामाजिक सद्भाव और समरसता को बनाए रखने के साथ ही युवाओं को नशामुक्त करने की दिशा में सराहनीय कार्य किया गया है। वर्ष 2020 में संगठित अपराधों, महिलाओं, बच्चों व कमजोर वर्गों के विरूद्ध अपराधों तथा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के संबंध में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस थानों में जनकेन्द्रित सुविधाओं का विकास तथा स्वागत कक्ष बनाने के साथ ही पुलिस कर्मियों की तकनीकी कार्य दक्षता अभिवृद्धि तथा कल्याणकारी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।महानिदेशक पुलिस भूपेन्द्र सिंह ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों को अच्छे आचरण के साथ बेहतर कार्य कर युवाओं का रोलमॉडल बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे अपराधियों को रोलमॉडल बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगे। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों की वर्दी एक विशेष गौरव का प्रतीक है तथा वर्दीधारी अपने श्रेष्ठ व सकारात्मक कार्यों से पूरे समाज को सार्थक दिशा प्रदान कर सकते हैं। सिंह ने बताया कि आमजन तक पुलिस की पहुंच को सुगम बनाने के लिए की गई निर्बाध पंजीकरण (फ्री एफआईआर रजिस्टे्रशन) व्यवस्था के सार्थक परिणाम दृष्टिगोचर होने लगे हैं। थानाधिकारी द्वारा आनाकानी करने पर जिला पुुलिस अधीक्षक कार्यालय में एफआईआर दर्ज करवाने की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है। सभी थानों में परिवादियों की सुविधा के लिए स्वागत कक्ष बनाकर उसमें विशेष इंतजाम किए गए हैं। सभी जिलों में वॉट्स-अप नम्बर जारी कर परिवाद दर्ज किए जा रहे हैं। ऑनलाईन परिवाद दर्ज करवाने की सुविधा के साथ ही राजकॉप सिटीजन एप के जरिए आमजन को परिवाद दर्ज करवाने के साथ ही ऑडियो-वीडियो अपलोड करने तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।महानिदेशक पुलिस ने बताया कि पुलिस सुदृढ़ीकरण एवं क्षमता सवंर्धन के तहत संगठित माफियाओं के विरुद्व प्रभावी कार्रवाई हेतु डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम का गठन किया गया है तथा सभी जिलों में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन यूनिट फॉर क्राईम अगेन्स्ट वीमन भी गठित की गई है। सीरियस फ्राड इन्वेस्टीगेशन यूनिट का भी गठन किया गया है। बढ़ते परिवादों का त्वरित अनुसंधान कर उनका निस्तारण करने के लिए चयनित पुलिस कान्स्टेबलों को अनुसंधान का अधिकार प्रदान किया गया है। वाहनों की खरीद हेतु राज्य सरकार से 70 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने के साथ ही पुलिस में विभिन्न वर्गों में 963 नए पदों का सृजन किया गया है। सिंह ने बताया कि पुलिसिंग कार्यों में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस मित्र योजना के तहत अबतक 28 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा 12 हजार से अधिक पुलिस मित्र बनाए जा चुके हैं। इसी प्रकार स्टूडेन्ट पुलिस कैडेट योजना में एक हजार राजकीय विघालयों में 22 हजार से अधिक छात्र पुलिस से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। उन्होंने बताया कि पुलिस जनसहभागिता कार्यक्रम के तहत पुलिस द्वारा 8 लाख से अधिक नागरिकों से सम्पर्क किया गया है। आत्म-सुरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना के तहत अब तक पुलिस द्वारा 4.5 लाख महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया चुका है। इसी वर्ष पहली जनवरी से महिला शक्ति आत्मरक्षा केन्द्रों का शुभारम्भ कर महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना को सुदृढ़ किया जा रहा है। वर्ष 2019 में सम्पूर्ण पुनर्गठन कर लगभग 98 हजार सीएलजी सदस्य बनाए गए हैं। सामाजिक सौहार्द हेतु राजस्थान पुलिस द्वारा पॉच जिलों में कबीर यात्रा का आयोजन किया गया। इस वर्ष युवाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। महानिदेशक पुलिस ने बताया कि वर्ष 2019 में अच्छा कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों के प्रोत्साहन हेतु पुलिस मुख्यालय स्तर पर 271 पुलिसकर्मियों को नगद इनाम, 70 पुलिसकर्मियों को विशेष पदोन्नति व 35 पुलिसकर्मियों को महानिदेशक पुलिस डिस्क से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने बताया कि अच्छे कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही दोषी व लापरवाह कर्मियों के विरूद्ध नियमानुसार सख़्त कार्रवाई की जा रही है। महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था एम.एल. लाठर ने बताया कि वर्ष 2019 में छिट-पुट घटनाओं को छोडकर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति लगभग सामान्य रही है तथा सामप्रदायिक सौहार्द बना रहा है। शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न होने के साथ ही विभिन्न आयोजनों के समय कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए माकूल पुलिस इन्तजाम किए गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में पासपोर्ट सत्यापन के 2 लाख 97 हजार 639, आम्र्स लाइसेन्स के 675 और सेवा संबंधी 16 हजार 883 मामलों का निर्धारित सेवा अवधि में सत्यापन किया गया। अति. महानिदेशक अपराध बी.एल. सोनी ने बताया कि वर्ष 2019 में निर्बाध पंजीकरण को विशेष महत्व देते हुए गत वर्ष की तुलना में 53 हजार 417 अधिक परिवादियों के प्रकरण दर्ज कर उनका समाधान करने का प्रयास किया गया। जघंय अपराधों में चालानी प्रतिशत 96 प्रतिशत से अधिक रहा है। सम्पत्ति संबंधी अपराधों में 70 प्रतिशत प्रकरणों में सफलता अर्जित की गई व 46 प्रतिशत मामलों में बरामदगी की गई। सीमित संसधानों के बावजूद पुलिस कर्मियों ने वर्ष 2019 में गत वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक 2 लाख 7 हजार 319 प्रकरणों का निस्तारण किया। पुराने प्रकरणों के निस्तारण हेतु विशेष अभियान चलाकर लगभग 2 हजार प्रकरणों का निस्तारण किया गया। महिला अत्याचारों में चालानी प्रतिशत 99.48 प्रतिशत रहा है। कमज़ोर वर्गों के विरूद्ध अत्याचार प्रकरणों के निस्तारण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सोनी ने बताया कि वर्ष 2019 में भारतीय दण्ड संहिता के प्रकरणों में कुल 1 लाख 80 हजार 339 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसी प्रकार धोखाधड़ी प्रकरणों में 3 हजार 682 अपराधियों को तथा आईटी एक्ट के तहत 343 व्यक्तियों को गिफ्तार किया गया। आम्र्स एक्ट में कुल 7 हजार 74 प्रकरण दर्ज कर 7 हजार 595 अपराधी गिरफ्तार किये गए। अवैध शराब के 19 हजार 629 प्रकरणों में 20 हजार 331 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया तथा 8 लाख अंग्रेजी तथा 4 लाख देशी शराब की बोतल जब्त की गई। मादक पदार्थों के संबंध में एनडीपीएस एक्ट के 2 हजार 552 प्रकरणों में 3 हजार 881 अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 19 किलों स्मैक, 6 किलो चरस, 533 किलो अफीम, 88 क्विंटल गांजा और 1101 क्विंटल डोडा पोस्त जब्त किया गया। चिन्हित सक्रिय एवं वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए प्रारम्भ की गई टॉप 10 योजना के तहत वर्षभर में 3 हजार 114 अपराधी तथा 469 विभिन्न स्तर इनामी अपराधी गिरफ्तार किए गए। रात्रि गश्त बीट में सुधार किया गया। अति. महानिदेशक पुलिस सिविल राईट्स डॉ. आर.पी. मेहरडा ने बताया कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम और उनकी सुरक्षा के लिए महिला गरिमा हेल्पलाइन, राजकॉप सिटीजन एप, महिला पुलिस पेट्रोलिंग यूनिट, महिला एवं बाल डेस्क, महिला सलाह एवं सुरक्षा केन्द्र आदि योजनाओं का संचालन किया जा रहा है साथ ही वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर व इन्स्टाग्राम हैण्डल्स की सुविधा के साथ ही सीसीटीवी कैमरों व अभय कमाण्ड सेन्टर द्वारा सत्त निगरानी पर बल दिया जा रहा है।छात्र आत्मरक्षा योजना के तहत 4 लाख 19 हजार छात्रााओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। महिला शक्ति आत्मरक्षा केन्द्रों द्वारा व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान करवाया जाएगा। प्रदेश के सभी 40 पुलिस जिलों में पुलिस उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी के प्रभार में स्ढ्ढष्ट्रङ्ख का गठन किया गया है। अति. महानिदेशक तकनीकी एवं दूरसंचार सुनील दत्त ने बताया कि सीसीटीएनएस पोर्टल व राजकॉप सिटीजन एप के जरिए परिवाद दर्ज करवाने की सुविधा के तहत अब तक 97 हजार 167 परिवाद दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में भी सीसीटीएनएस के जरिए सीधी एफआइआर दर्ज करवाने की सुविधा उपलब्ध करवाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है।

 

 

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