प्याज सस्ता होने के आसार कम, नई फसल में देरी से निर्यात पर पाबंदी का मामूली असर

इंदौर। प्याज के निर्यात पर रोक लगाए जाने से सोमवार को थोक मंडियों के साथ ही खेरची में भी भाव कुछ घटे हैं, लेकिन हालात संकेत दे रहे हैं कि यह रुझान अस्थायी है। भाव में बड़ी गिरावट के आसार कम हैं।स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बारिश के कारण उत्पादक इलाकों में फसल खराब हुई है और नए माल की आवक में देरी होगी। इस बीच स्टॉक घटने की वजह से भाव में हल्की गिरावट का मौजूदा रुझान अस्थायी है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से पहले इस मामले में बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है।निर्यात के लिए प्याज का न्यूनतम मूल्य (एमईपी) 850 डॉलर प्रति टन तय किए जाने के बावजूद कीमतों पर अंकुश नहीं लगने के बाद केंद्र सरकार ने रविवार को इसके निर्यात पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी। इससे पहले देश के विभिन्न हिस्सों में प्याज के भाव 80-100 रुपए प्रति किलो तक गए थे।अगले महीने महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने है। इसके कारण सरकार को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि प्याज की कीमतें अनियंत्रित रही तो उसे चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।सरकार केंद्रीय पूल से प्याज की बिक्री सरकारी दुकानों के जरिए कर रही है। खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान के मुताबिक केंद्र के पास प्याज का पर्याप्त स्टॉक है और वह इसकी आपूर्ति विभिन्न राज्यों को करने जा रही है। इससे भाव घटेंगे। कारोबारियों के मुताबिक उत्पादक राज्यों- कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश में बारिश और बाढ़ से प्याज में तेजी आई है। कर्नाटक में नए प्याज की आवक तो शुरू हो गई है, लेकिन परिवहन लागत ज्यादा होने के कारण कर्नाटक का नया प्याज दिल्ली में महंगा पड़ रहा है। इससे वहां की मांग मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तरफ बनी हुई है। गुजरात और मध्य प्रदेश में बारिश से प्याज की फसल को नुकसान हुआ है। हालांकि मौसम अब साफ होने लगा है, ऐसे में नई फसल की आवक का दबाव अक्टूबर के अंत और नवंबर में बनेगा।

 

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