एफ एआईएफ ए ने अवैध एवं तस्करी कर लाए हुए सिगरेट से अपनी आजीविका बचाने के लिए सरकार से लगाई गुहार

नई दिल्ली , 17 दिसम्बर (एजेन्सी)। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात आदि राज्यों में वाणिज्यिक फसलों के लाखों किसानों और खेत श्रमिकों के प्रतिनिधि गैर-लाभकारी संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) ने वित्त मंत्री, भारत सरकार निर्मला सीतारमण से अपील की है कि भारत में अवैध सिगरेट के कारोबार के कारण उनकी जीविका पर पड़ रहे दुष्प्रभावों से उनकी रक्षा करें। इस अपील को पीएमओ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, श्रम मंत्रालय आदि संबंधित मंत्रालयों के समक्ष भी भेजा गया है। अत्यधिक कराधान, तस्करी कर लाए हुए और जालसाजी वाले सिगरेट के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ के एक तरफा नियमन के कारण एफसीवी उत्पादन 2013-14 के 325 मिलियन किलोग्राम से घटकर 2019-20 में 210 मिलियन किलोग्राम रह गया है, जिससे एफसीवी उत्पादन से जुड़े किसान समुदाय को 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।  सिगरेट पर वर्तमान कराधान की दरों के हिसाब से सरकार को अवैध सिगरेट कारोबार के कारण करीब 13,000 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान का भी आकलन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी कर लाई हुई और स्थानीय स्तर पर कर चोरी कर बनाई हुई अवैध सिगरेट का कारोबार भारत के सिगरेट उद्योग के करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है और भारत अवैध सिगरेट के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार बनकर सामने आया है। यह अंतरराष्ट्रीय सिगरेट तस्करों के लिए पसंदीदा ठिकाना बनकर सामने आया है। उत्पाद शुल्क और कम्पंसेशन सेस में निरंतर वृद्धि के कारण संपूर्ण वैध सिगरेट व्यापार संकट में है। 2011-12 से इनमें 200 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है। भारी कराधान और अवैध सिगरेट के बढ़ते कारोबार के कारण वैध सिगरेट व्यापार में 2011-12 से 2018-19 के बीच से 25 प्रतिशत की कमी हो गई है। इसी अवधि में अवैध सिगरेट का कारोबार 31 प्रतिशत बढ़ा है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के प्रेसिडेंट जवारे गौड़ा ने कहा कि भारत में अवैध सिगरेट कारोबार के कारण एफसीवी तंबाकू उत्पादक किसान लगातार बढ़ती लागत एवं गिरती आय के कारण अपनी एकमात्र आजीविका गंवाने के मुहाने पर खड़ा है। हम सरकार से चाहते हैं कि ऐसी कराधान नीति बनाए जिससे भारत में सिगरेट की तस्करी हतोत्साहित हो। इससे अवैध करोबार रोकने और घरेलू तंबाकू की मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश के 13 राज्यों में तंबाकू की खेती होती है और इससे करीब 4.5 करोड़ लोगों की आजीविका चलती है, जिनमें किसान, कामगार, गरीब ग्रामीण आबादी और आदिवासी लोग एवं उनके परिवार शामिल हैं। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के महासचिव मुरली बाबू ने कहा कि सरकार ने करोड़ों लोगों विशेषकर किसानों, रिटेलर्स, गरीब ग्रामीणों व आदिवासियों की आजीविका पर पडऩे वाले प्रभाव का ध्यान रखे बिना ही तंबाकू पर बहुत सख्त नियमन और सिगरेट पर भारी कर लगा दिया है। इन लोगों के पास आजीविका का कोई अन्य साधन भी नहीं है। हम किसान समुदाय भारत सरकार से अपील करते हैं कि अवैध कारोबार पर लगाम लगाने, ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और वैध, कर चुकाने वाले घरेलू उत्पादित एफसीवी की मांग बढ़ाने के लिए कर की दरों को घटाकर जीएसटी से पहले वाले स्तर पर लाए। हम यह अनुरोध स्वीकारने एवं हमारी आजीविका को बचाने के लिए सरकार से करबद्ध निवेदन करते हैं।

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