बार बार पेशाब आना प्रोस्टेट की बीमारी का लक्षण हो सकता है

जयपुर। प्रोस्टेट की बीमारियां बढ़ती उम्र में आम हो जाती हैं और मृत्यु का कारण बनती हैं। ज्यादातर लोग प्रोस्टेट की समस्या को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ते हैं, कुछ उम्र, मौसम परिवर्तन, यात्रा संबंधी तनाव, अलग-अलग जगह के पानी आदि को दोष देते हैं। लेकिन शिथिल जीवनशैली के कारण उम्र वाली बात की महत्वपूर्णता कम हो गई है। प्रोस्टेट के बढऩे से लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता कम हो जाती है। बिनाईन प्रोस्टेटिक हाईपरप्लासिया (बीपीएच) यानि एक समयावधि में होने वाली माईक्रोस्कोपिक एक्सेसिव वृद्धि के चलते ग्लांड इतनी बड़ी हो जाती है, जो नग्न आंखों से दिखाई देने लगती है। यह 30 साल से पहले शुरू होता है और 40 साल तक पहुंचते पहुंचते 8 प्रतिशत पुरुष, 60 साल तक पहुंचते पहुंचते 50 प्रतिशत एवं 90 साल तक पहुंचते पहुंचते 90 प्रतिशत पुरुष माईक्रोस्कोपिक बीपीएच वाले हो जाते हैं। 50 साल या उससे ज्यादा उम्र के पुरुषों में बीपीएच रेंज प्रयुक्त परिभाषा के आधार पर 14 प्रतिशत से 30 प्रतिशत होती है। भारत में बीपीएच का प्रसार 40 से 49 साल के बीच 25 प्रतिशत; 50 से 59 साल के बीच 37 प्रतिशत; 60 साल से 69 साल के बीच 37 प्रतिशत और 70 साल से 79 साल के बीच 50 प्रतिशत है। हर 5 भारतीय पुरुषों में से लगभग 2 में बीपीएच के कारण लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट के खराब लक्षण मौजूद हैं। हालांकि अधिकांश लोग डॉक्टर के पास जाकर इसका इलाज नहीं कराते और इसे बढ़ती उम्र, मौसम, यात्रा संबंधी तनाव, पानी में बदलाव आदि से जोड़ते हैं। उम्र के साथ प्रोस्टेट की वृद्धि की दो मुख्य अवधियां होती हैं। पहली अवधि तरुणावस्था में होती है, जब प्रोस्टेट आकार में दोगुनी हो जाती है।

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