गंगानगर और हनुमानगढ़ की नहरी समस्याओं का जल्द होगा समाधान, पंजाब सरकार का सकारात्मक रूख

अन्तर्राज्यीय जल समझौतों को लेकर मुख्यमंत्री की दो माह में ही दो बार उच्च स्तरीय वार्ता

जयपुर, 20 सितम्बर (का.सं.)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश के गंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले के साथ ही पश्चिमी राजस्थान के अन्य जिलों की नहरी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर हैं। बीते दो महीने से भी कम समय में वे इंदिरा गांधी नहरी तंत्र की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर दो बार चंडीगढ़ जाकर उच्च स्तर पर वार्ता कर चुके हैं। इन वार्ताओं में पंजाब सरकार का रूख सकारात्मक रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इन जिलों की जल समस्याओं का समाधान होगा। गहलोत ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी नहरी पानी की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि रावी ब्यास नदी के जल में राजस्थान की शेष हिस्सेदारी का 0.60 एमएएफ जल छोड़े जाने, हरिके पर राजस्थान की नहरों में प्रदूषित जल का प्रवाह रोकने तथा हरिके पर इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने सहित अन्य मुद्दों पर 25 जुलाई को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह से उच्च स्तरीय वार्ता की गई थी। इसमें बनी सहमति के अनुसार पंजाब और राजस्थान एक लाभप्रद समझौते की ओर अग्रसर हैं। नहरों में प्रदूषित जल का प्रवाह रोकने के लिए पंजाब सरकार ने काम भी शुरू कर दिया है और शेष मुद्दों पर भी पंजाब सरकार सकारात्मक रूख के साथ कार्य कर रही है।उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ में जुलाई माह में हुई द्विपय वार्ता के दौरान गहलोत ने हरिके हैडवक्र्स से निकलने वाले फिरोजपुर फीडर की लाइनिंग जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा उठाया था। इस पर यह सहमति बनी थी कि पंजाब सरकार फिरोजपुर फीडर की रिलाइनिंग की डीपीआर तैयार कर शीघ्र केन्द्रीय जल आयोग को भेजेगी। इस रिलाइनिंग कार्य में होने वाले व्यय को दोनों राज्य अनुपातिक रूप से वहन करेंगे। मुख्यमंत्री की पहल के बाद इंदिरा गांधी फीडर एवं सरहिन्द फीडर की रिलाइनिंग का काम भी पंजाब सरकार ने शुरू कर दिया है। इससे सीपेज तथा सेम की समस्या से निजात मिल सकेगी। पंजाब के क्षेत्र में पडऩे वाली सरहिंद तथा राजस्थान फीडर की रिलाइनिंग का यह काम वर्ष 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे राजस्थान को न केवल सरप्लस पानी बिना किसी बाधा के मिल सकेगा, बल्कि इंदिरा गांधी नहर के द्वितीय चरण के अंतिम छोर के क्षेत्रों जैसलमेर और बीकानेर में भी सिंचाई जल की उचित मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित होगी।बुड्ढ़ा नाले के जल परिशोधन से होगा जल प्रदूषण की समस्या का समाधान लुधियाना शहर सेे गुजरने वाले बुड्ढ़ा नाले के कारण सतलज नदी का पानी दूषित होता है। बुड्ढ़ा नाले के परिशोधन के लिए पंजाब सरकार एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसके तहत वहां औद्योगिक अपशिष्ट के शोधन के लिए 105 एमएलडी क्षमता के तीन सीईटीपी बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 194 एमएलडी पानी के शोधन के लिए एक ट्रीटमेंट प्लांट का टेंडर आमंत्रित किया गया है, जिस पर दिसम्बर माह तक काम शुरू हो जाएगा और दो साल में यह कार्य पूर्ण हो जाएगा।बीबीएमबी में राजस्थान से पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त हो मुख्यमंत्री ने आज चंडीगढ़ में हुई बैठक में भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में राजस्थान को सदस्यता से वंचित रखने पर आपश्रि जताई। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लिए पूर्णकालिक सदस्य के एक और पद का सृजन किया जाए। उन्होंने रोपड़, हरिके एवं फिरोजपुर सिंचाई हैडवक्र्स का नियंत्रण बीबीएमबी को सौंपने का आग्रह किया।घग्घर में रोकें प्रदूषित जल का प्रवाह मुख्यमंत्री ने आज बैठक में केन्द्रीय गृहमंत्री से आग्रह किया कि वे सुखना नाले में औद्योगिक अपशिष्ट का बहाव रोकने के लिए हिमाचल सरकार को कहें। यह प्रदूषित जल घग्घर नदी के जल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। साथ ही पंजाब एवं हरियाणा सरकार भी इसमें प्रदूषित जल प्रवाह पर नियंत्रण करे।ताजेवाला हैड समझौते पर हरियाणा करे हस्ताक्षर मुख्यमंत्री ने यमुना जल आवंटन के समझौते के 25 साल बाद भी राजस्थान को ताजेवाला हैड से अपने हिस्से का पानी नहीं मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय गृहमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप कर हरियाणा को राजस्थान द्वारा 10 जुलाई, 2017 को भेजे गए समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कहें। साथ ही ताजेवाला हैड से अपने हिस्से का यमुना जल लेने के लिए राजस्थान द्वारा बनाई गई डीपीआर के शीघ्र अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को निर्देशित करें। ताकि चूरू एवं झुंझुनूं जिलों को जल्द से जल्द यमुना का पानी मिल सके।सिद्धमुख-नोहर परियोजना के लिए भाखडा मैन लाइन से मिले पानी मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि हरियाणा की असहमति के कारण सिद्धमुख-नोहर सिंचाई परियोजना के लिए राजस्थान को भाखड़ा मैन लाइन से रावी-ब्यास के 0.17 एमएएफ जल का आवंटन भी नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिद्धमुख-नोहर की क्षमता का पूरा उपयोग तभी हो सकता है जब यह जल हरिके के बजाय भाखड़ा मैन लाइन के माध्यम से मिले। इस मामले में भारत सरकार मध्यस्थता कर शीघ्र अपना निर्णय दे। सतलज-यमुना लिंक नहर की बैठकों में हो राजस्थान का प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री ने सतलज-यमुना लिंक नहर को लेकर होने वाली बैठकों में राजस्थान को अनिवार्य रूप से शामिल करने तथा इस नहर को लेकर कोई भी समझौता राजस्थान की बिना सहमति के नहीं करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सतलज यमुना लिंक से राजस्थान के हित भी जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी निर्णय पर राजस्थान की सहमति आवश्यक रूप से ली जाए। उत्तर क्षेत्र परिषद की बैठक में पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तथा दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल भी मौजूद थे।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *