जीकेएसबी के बैंक मैनेजर ने पत्नी के नाम से उठायी ऋण माफी

श्रीगंगानगर, 30 सितंबर (का.सं.)। दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक,श्रीगंगानगर के एक शाखा प्रबंधक द्वारा राज्य सरकार के नियमों को ताक पर रखकर पत्नी के नाम से ऋ ण माफी का लाभ लेने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले की शिकायत रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (जयपुर) को प्रेषित की गयी है। यह मामला बैंक की  विजयनगर शाखा से जुड़ा है। इस तहसील क्षेत्र में आने वाले चक 8 एसटीबी में द्रौपदी कुलडिय़ा के नाम पर 1.520 हैक्टेयर कृषि भूमि है। वे चक 2 -एपीडी ग्राम सेवा सहकारी समिति की सदस्य हैं। कांग्रेस सरकार की ओर से लागू की गयी कृषक ऋण माफी योजना के अंतर्गत द्रौपदी कुलडिय़ा द्वारा 91 हजार 537 रुपये की ऋण माफी का लाभ लिया गया, जिसकी अब शिकायत की गयी है। इसी चक के हनुमान प्रसाद सैनी की ओर से सहकारिता रजिस्ट्रार को प्रेषित शिकायत में बताया गया कि द्रौपदी, दी गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंधक धनराज कुलडिय़ा की पत्नी हैं। प्रदेश की कांग्रेस सरकार की ओर से राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना की नकारात्मक सूची में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और बैंकों के अधिकारी/कर्मचारी एवं उन पर आश्रित व्यक्ति ऋण माफी योजना का लाभ नहीं ले सकते। इसके बावजूद धनराज ने पत्नी के नाम से 91 हजार 537 रुपये की ऋण माफी प्राप्त कर ली गयी। बैंक की ओर से 21 फरवरी 2019 को द्रौपदी के नाम से ऋण माफी प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिस पर स्वयं धनराज कुलडिय़ा का मोबाइल नम्बर (8094224000) अंकित है। बैंक ने सीयूजी प्लान के अंतर्गत कुलडिय़ा को यह नम्बर जारी किया है। शिकायत के अनुसार, द्रौपदी कुलडिय़ा द्वारा जिस समय ऋण माफी का लाभ प्राप्त किया गया, उस समय धनराज कुलडिय़ा बैंक की लालगढ़ शाखा में प्रबंधक पद पर कार्यरत रहते हुए इस ऋण माफी योजना को क्रियान्वित कर रहे थे। योजना के प्रावधानों एवं नकारात्मक सूची में नाम होने से परिचित होने के बावजूद धनराज ने पत्नी को गलत ढंग से ऋण माफी का लाभ उठा लिया। यहां गौरतलब है कि इस बार सरकार ने स्वयं काश्तकार के शपथ पत्र के आधार पर ऋण माफी का लाभ देने का निर्णय लिया था। यह शपथ पत्र इस बात के लिए लिया गया कि उसका नाम नकारात्मक सूची में शामिल नहीं है। शपथ पत्र झूठा पाये जाने पर कानूनी कार्यवाही का भी प्रावधान है।

 

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