युवती की सिर में लोहे की रॉड मारकर हत्या

case of finding the dead body of a young woman
case of finding the dead body of a young woman
फर्श पर खून से लथपथ मिला था कंकाल, दीवारों पर भी रक्त के मिले छींटे

श्रीगंगानगर , 16 दिसम्बर (का.सं.)। एसएसबी रोड पर बीएसएफ सेक्टर हेड क्वार्टर के समीप शिवाजीनगर के एक बंद मकान में दो महीने से लापता एक युवती की लाश पाए जाने का मामला आज संगीन और बेहद क्रूर हत्या में तब्दील हो गया। जवाहरनगर थाना प्रभारी विश्वजीत की अगुवाई में एक पुलिस दल, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) और फुटप्रिंट उठाने की एमओबी टीम आज दोबारा घटनास्थल पर गई। कांग्रेस नेता शिवदयाल गुप्ता के निर्माणाधीन और बंद मकान का गहनता से निरीक्षण किया। नीचे के एक कमरे में जहां कल युवती निशा रानी (17) की लाश पाई गई थी, उसमें एफएसएल और एमओबी की टीमों ने वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए साक्ष्य जुटाए। इसी कमरे में निशा रानी का सूख चुके खून से लथपथ कंकाल मिला था। इसके आसपास फैला खून भी सूख चुका था। साथ की दीवार पर खून के छींटे पाए गए हैं। बगल के कमरे से निशा को घसीट कर इस कमरे में लाए जाने के निशान मिले हैं। ऊपर के एक बंद कमरे जिसके गेट पर ताला लगा था, वहां कूंटे पर खून के धब्बे मिले हैं। आज जब दोबारा घटनास्थल की जांच के लिए पुलिस और दूसरी टीमें पहुंची तो फिर से भीड़ इक_ी हो गई। लोगों में बड़ी उत्सुकता रही कि आखिर कई महीने से बंद मकान में युवती की इतनी क्रूरता से हत्या किसलिए की गई। पुलिस इस सनसनीखेज हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाने के लिए बड़ी तेजी से जुट गई है। संदिग्ध युवक शैंपू चौहान (21) की तलाश में 2-3 पुलिस टीमों को लगा दिया गया है। थाना प्रभारी विश्वजीत ने बताया कि जिला अस्पताल के मुर्दाघर में कल देर शाम को सुरक्षित रख ले गए कंकाल का आज मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। यह कंकाल निशा का ही है, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक तरीके से करने के लिए डीएनए टेस्ट का नमूना रिजर्व करवाया गया है। इस नमूने का निशा के परिवार के किसी सदस्य से मैच करवाया जाएगा।जगह-जगह बिखरे मिले सबूत पुलिस सूत्रों के अनुसार मकान में जगह जगह सबूत बिखरे पड़े हैं।जिस कमरे से निशा को घसीट कर दूसरे कमरे में ले जाया गया, वहां संदिग्ध आरोपित शैंपी के फुटप्रिंट बिल्कुल स्पष्ट मिले हैं, क्योंकि मकान काफी समय से बंद था। फर्श पर धूल ही धूल थी। इसलिए पदचिन्ह बिल्कुल साफ मिले हैं। घटनास्थल पर ऐसा लगता है कि निशा को एक कमरे में बेहोश किया गया या मारा गया। फिर घसीट कर दूसरे कमरे में ले जाया गया। इस कमरे में उसके सिर पर लोहे की रॉड से वार किए गए। उसका सिर बुरी तरह से चकनाचूर कर दिया गया। रक्त के छींटे साथ की दीवार पर काफी ऊंचाई तक मिले हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि निशा के सिर पर कितनी जोर से रोड से वार किए गए। काफी मात्रा में खून बह कर कमरे के एक कोने में इक_ा हो गया, सूख चुका था। एफएसएल के विशेषज्ञ डॉ. लोकेश शर्मा की टीम ने फर्श और दीवार पर से रक्त के नमूने लिए। दीवार पर जहां तक खून के धब्बे मिले, उसकी ऊंचाई को नापा गया। सूत्रों ने बताया कि ऊपर के एक कमरे के गेट पर ताला लगा हुआ था। इसके कूंटे पर सुख चुके खून के धब्बे मिले हैं। इस धब्बे के भी चलने नमूने लिए हैं।वही मकान मालिक को बुलाकर इस कमरे की चाबी मंगवाई गई। चाबी से भी यह ताला नहीं खुला तो उसे तोड़ दिया गया। कमरे में कुछ भी संदिग्ध दिखाई नहीं दिया। पुलिस का कहना है कि निशा का कत्ल करने के बाद से शैंपी ने कुछ चुराने की नियत से इस कमरे को खोलने की कोशिश की होगी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान उसके हाथ में लगा रक्त कूंटे पर लग गया।
आसपास रिहाइश नहीं मकान में यह खूनी मंजर देखने के बाद पुलिस का यह भी कहना है कि निशा ने शायद अपने बचाव के लिए शैंपू से काफी संघर्ष भी किया। वह चीखी चिल्लाई होगी लेकिन शिवाजीनगर में शिवदयाल गुप्ता परिवार के चार मकान एक ही लाइन में एक साइड में बने हुए हैं।इसके आसपास कोई रिहायश नहीं है। यही वजह रही कि 2 महीने तक लाश मकान में सड़ती रही। इसकी बदबू फैलने का भी किसी को पता नहीं चला। पुलिस के अनुसार इन चारों मकानों का अधूरा निर्माण कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान रोक दिया गया था। इनमें से एक मकान का रैंप बनाने के लिए कल मंगलवार को मिस्त्री और मजदूर लगाए गए, तब इस भयानक हत्याकांड का खुलासा हुआ। याद रहे कि शिवाजीनगर के समीप एसएसबी रोड की गली नंबर 10 निवासी यशोदा नायक ने 20 अक्टूबर को जवाहरनगर थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसी की गली का एक युवक शैंपी चौहान उसकी नाबालिग पुत्री निशा को 15 अक्टूबर को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। इस मामले की जांच सब इंस्पेक्टर ललिता राठौड़ को सौंपी गई। पुलिस 2 महीने से इस युगल की तलाश कर रही थी। कल निशा की लाश मिलने से यह पूरा मामला संगीन और क्रूर हत्या में तब्दील हो गया।
इसी मकान में हत्या क्यों? शिवाजीनगर कॉलोनी का यह घटनास्थल निशारानी और संदिग्ध आरोपी शैंपी के घर से ज्यादा दूर नहीं है। इस मकान में निशा की हत्या क्यों और किस लिए अंजाम दी गई, पुलिस यह गुत्थी सुलझाने में लगी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस बंद मकान में शैंपी अपने साथ निशा को लेकर पहुंचा कैसे। जांच में लगे एक पुलिस अधिकारी ने आशंका व्यक्त की है कि जब इन चार मकानों का निर्माण चल रहा था ।
तब शायद शैंपी ने भी इसमें मजदूरी की होगी। बताया जा रहा है कि वह निर्माण कार्यों में मजदूरी का ही काम करता था।
उसे वॉल पुट्टी का काम भी आता था। पुलिस का अनुमान है कि शायद तभी शैंपी ने इनमें से जिस मकान में काम किया, उसी के किसी ताले की डुप्लीकेट चाबी बना ली होगी। वह अक्सर निशा को लेकर रात को या फिर जिस दिन काम बंद हो, तब आता रहा होगा।

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