सरकार, सेबी ने इंडिगो में खामियों की जांच तेज की

नई दिल्ली। इंडिगो में प्रवर्तकों के बीच विवाद बढऩे के साथ ही बाजार नियामक सेबी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी संचालन मामले में बरती गई खामियों और अन्य उल्लंघन के आरोपों की जांच तेज कर दी है। शीर्ष अधिकारियों ने यह बात कही।प्रवर्तक राकेश गंगवाल ने इंडिगो में कंपनी संचालन में खामी का आरोप लगाते हुए इस मामले में सेबी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा था कि कंपनी में जिस तरह से संचालन कार्यों का प्रबंधन हो रहा है उससे एक पान की दुकान भी अपने मामलों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करती है।अधिकारियों ने कहा कि इंटरग्लोब एविएशन नियामकीय जांच के दायरे में है और सेबी नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इंडिगो कंपनी संचालन में खामी, निष्पक्ष व्यवसाय के नियमों और भेदिया कारोबार रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रही है।
इंडिगो की सेहत पर आरोपों से फर्क नहीं-इस बीच कंपनी प्रवर्तकों से जुड़ी इकाइयों और निदेशक मंडल के सदस्यों से जुड़ी हरेक इकाई की भूमिका की जांच की जा रही है। गंगवाल ने सह-संस्थापक राहुल भाटिया की इंटरग्लोबल एंटरप्राइजेज समूह के संबंधित पक्ष के साथ लेनदेन को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, भाटिया पक्ष ने इन आरोपों खारिज किया है। भाटिया समूह ने रविवार को दावा किया कि गंगवाल ने हमेशा ही अपने वित्तीय जोखिमों को कम रखने पर ध्यान दिया और ऐसा भी समय आया जब वह कंपनी को बेचने पर जोर दे रहे थे।
कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान-अगर कंपनी अधिनियम का उल्लंघन किया गया होगा तो कंपनी को कड़ी नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसमें मौजूदा समझौतों को समाप्त करके नई व्यवस्था देना भी शामिल है। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय कंपनी कानून की धारा 6 में निहित शक्तियों का उपयोग कर सकता है।अधिनियम की धारा-6 के तहत नियमों का उल्लंघन होने पर निदेशक मंडल के सदस्यों या आम बैठक में पारित किसी भी ज्ञापन, लेख, समझौते या समाधान को खारिज किया जा सकता है। गंगवाल के पत्र पर मंत्रालय और बाजार नियामक सेबी ने 19 जुलाई तक कंपनी से जवाब मांगा है।

 

 

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