राज्यपाल मिश्र ने बताई गहलोत सरकार की उपलब्धियां

राजस्थान को विशिष्ठ राज्य का दर्जा देने की मांग

जयपुर, 24 नवम्बर (कासं.)। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि राजस्थान राज्य की अर्थव्यवस्था में कृृषि एवं सहायक क्षेत्रों का बहुत अधिक महत्व है। राजस्थान की कृषि मूलत: वर्षा पर आधारित है। किसानों का भविष्य हमेशा संभावनाओं से घिरा रहता है। दिन-प्रतिदिन कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के अंशदान में लगातार गिरावट आ रही है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने रविवार को नई दिल्ली में राज्यपालों के सम्मेलन में राजस्थान राज्य के प्रतिवेदन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में राजस्थान सरकार किसान की आय को दुगुना करने का हर सम्भव प्रयास कर रही है। भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का सफल क्रियान्वयन राजस्थान में किया जा रहा है। विभिन्न फसलों के उत्पादन में जोखिम को कम करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को राज्य में लागू किया गया है। राज्य में स्थापित बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं में बीजों की जांच भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों के अनुरूप करके राज्य के किसानों उच्च गुणवत्ता का बीज उपलब्ध करवाया जा रहा हैं। राज्यपाल ने कहा कि कृषि विकास हेतु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत देश के राज्यों को विकसित, विकासशील एवं उत्तरी पूर्वी राज्य की श्रेणी में बांटा गया है। राजस्थान की स्थिति विकसित राज्यों की श्रेणी में होने के कारण योजना के तहत राज्य को तुलनात्मक रूप से कम केन्द्रीय राहत सहायता उपलब्ध होती है। मिश्र ने कहा कि राजस्थान राज्य को विकट भौगोलिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में विशिष्ठ राज्य का दर्जा प्रदान करते हुए फडिंग पैटर्न उतरी-पूर्वी राज्यों के समकक्ष किया जाना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत दलहन बीज उत्पादन एवं प्रमाणित बीज वितरण कार्यक्रम के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित बजट प्रावधान 15 प्रतिशत से बढाकर 25 प्रतिशत किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान द्वारा सभी छात्राओं को सरकारी कॉलेज-विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा मुफ्त देने का निर्णय सत्र 2019-20 से किया गया है। राजस्थान सरकार ने पचास नये महाविद्यालय खोले हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्र बासंवाडा में गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय खोला है। मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालयों द्वारा समय-समय पर दीक्षान्त समारोह आयोजित कर डिग्रीयां वितरित की जा रही है। आगामी वर्षों में समस्त राज्य पोषित विश्वविद्यालयों को पूर्णतया ”स्मार्ट विश्वविद्यालयों” की श्रेणी में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। विद्यार्थियों के कौशल संवर्धन हेतु विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान सरकार द्वारा भामाशाह स्वास्थ्य योजना चलाई जा रही थी, जिसके स्थान पर वर्तमान में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आरम्भ की गई योजना ‘आयुष्मान भारत – महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना’ क्रियान्वित है। मिश्र ने कहा कि समावेशी आर्थिक प्रगति एवं रोजगार सृजन तथा निरीक्षण एवं स्वीकृतियों से छूट दिलाने के उद्देश्य से राजस्थान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (फैसेलिटेशन ऑफ एस्टेबिलेशमेन्ट एण्ड ऑपरेशन) अधिनियम, 2019 लागू किया गया है । इससे उद्यमों को तीन वर्ष तक विभिन्न विभागों की स्वीकृति एवं निरीक्षणों से छूट मिल जाएगी। मिश्र ने बताया कि राज्य में एक उच्च स्तरीय रिफाइनरी का कार्य बालोतरा, बाड़मेर में निर्माणाधीन है। केन्द्र सरकार द्वारा इस परियोजना में राज्य सरकार को हरसंभव मदद दी जा रही है। इससे राज्य में एक नई औद्योगिक क्रांति की शुरूआत होगी एवं हजारों लोगों को इसमें रोजगार मिल पायेगा। राजस्थान में अकूत खनिज भण्डार है, हाल ही में राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर और नागौर जिले में पोटाश की खोज की गई है। राज्यपाल मिश्र ने बताया कि विशेष योग्यजनों हेतु सरकारी सेवाओं में आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। मिश्र ने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन भारत के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की उन्नति एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आदर्श मंच सिद्ध होगा। सम्मेलन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केन्द्रीय मंत्रीगण और विभिन्न राज्यों के राज्यपाल व उपराज्यपालगण मौजूद थे।

 

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