मजदूरों की कमी से घरों की चाबी देनी में देर होगी, घर खरीदारों को पहले ही पजेशन देने में हो गई है देरी

नई दिल्ली। घर खरीदारों को फ्लैट की चाबी मिलने में देरी हो सकती है। क्योंकि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी बहुत सारे श्रमिक काम पर नहीं लौट रहे हैं। इससे प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। बता दें महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई औद्योगिक राज्यों द्वारा अप्रैल से मई तक लगाए गए लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिकों का पलायन हुआ था। अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव ने बताया कि दूसरी लहर में कुशल और अकुशल श्रमिकों को प्रोजेक्ट साइट पर रोकने की हर संभव कोशिश नकाम रही। अधिकांश मजदूर अप्रैल से मई के दौरान अपने घर चले गए। अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद वो लौट रहे हैं , लेकिन संख्या बहुत ही कम है। इससे प्रोजेक्ट का काम प्रभावित हो रहा है। घर खरीदारों को पहले ही पजेशन देने में देरी हो गई है। मजदूरों की कमी से इसमें और देगी। अब डेढ़ गुना मेहनताना मांग रहे हैं मजदूर-वहीं, एटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर के सीएमडी, गीतांबर आनंद ने बताया कि मजदूरों के गांव लौट जाने से स्किल्ड लेबर की दिक्कत शुरू गई है। जो हैं वो अब डेढ़ गुना मेहनताना मांग रहे हैं। इससे प्रोजेक्ट की लागत और बढ़ जाएगी। पहले ही स्टील, सीमेंट समेत जरूरी रॉ-मेटेरियल्स के दाम बढऩे से लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेस के बोर्ड सदस्य और राई औद्योगिक क्षेत्र के प्रेसीडेंट राकेश छाबड़ा ने बताया कि ऑटो और ऑटो एंसिलरी उद्योग में अभी कुशल श्रमिकों की कमी से बहुत ज्यादा परेशानी नहीं है । क्योंकि बाजार में मांग नहीं है। हां, यह जरूर है कि आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। अगर, जिस तरह पिछले साल एकदम से मांग निकली थी, कुछ वैसा इस साल हुआ तो जरूर कुशल श्रमिकों की कमी से ऑटो सेक्टर को जूझना होगा। अगर, तीसरी लहर पर समय रहते काबू पा लिया जाता है तो मांग जरूर निकलेगी। पिछले साल के मुकाबले अभी हालात बेहतर
जनरल इंडिया एसएमई फोरम की सेक्रेटरी, सुषमा मोरथनिया ने कहा कि पिछले साल के लॉकडाउन के मुकाबले इस साल हालात बेहतर हैं। पिछले साल देशव्यापी लॉक डाउन की वजह से और ट्रेनें सीमित मात्रा में चलने की वजह से लोगों का पलायन बढ़ा था, लेकिन इस साल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े काम जिस तरह से पूरी तरह बंद नहीं हुए थे तो कई लोगों ने अपने कर्मचारियों के रहने की भी व्यवस्था की थी। इस वजह से उन्हें ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

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