बाल शोषण के खिलाफ आईएएस नवीन जैन ने किया नई पहल का शुभारंभ

जयपुर, 15 सितम्बर (एजेन्सी)। बाल दुर्व्यवहार के बारे में जागरूकता बढऩे के मद्देनजर, शासन सचिव, कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग और राजस्थान कौशल और आजीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) के अध्यक्ष नवीन जैन ने एक नई पहल र्स्पश का शुभारम्भ किया। जयपुर के पास चौमूं में 5 टीमों ने 20 सत्रों में 11 स्कूल कवर किये जिनमें लगभग 4500 छात्र और 50 शिक्षक शामिल थे। आईएएस नवीन जैन के नेतृत्व के जरिये स्वयंसेवकों की एक समर्पित टीम जिसमें शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त उच्च रैंकिंग वाले सरकारी अधिकारियों, युवा कामकाजी पुरुषों और महिलाओं की समर्पित टीम ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर छात्रों को संवेदनशील बनाने पर बातचीत और अन्य प्रासंगिक सामग्री भेंट की व प्रस्तुतियां दी।एक सवाल के रूप में जब आईएएस नवीन जैन से पूछा गया कि इस पहल की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली तो उन्होंने कहा कि बेटियां अनमोल हैं (बेटी बचाओ) पहल के बाद मैंने इस एक नई (बाल शोषण के खिलाफ) पहल को मौका देने का सोचा। हमारे देश में पिछले कुछ महीनों में इस खबर ने भी मुझे इस कदम की ओर झुकाया।कम से कम हम जो भी कर सकते है जितनी जल्दी हो सकें इस बाल छेड़छाड़ के खतरे से लडऩे के लिए, मुझे और अधिक दिलचस्पी तब हुई जब मुझे समान चिंता वाले लोग मिले और वह उत्सुकता से मेरे साथ जुडऩे को तैयार थे। यह अभियान 6-14 वर्ष के आयु वर्ग के स्कूली लड़कों और लड़कियों के लिए है ।आईएएस नवीन जैन इन युवाओं और अन्य टीम के सदस्यों को आने वाले दिनों में राजस्थान के लिए एक बेहतर मॉडल तैयार करने के लिए तैयार हैं, जब उनसे इस खतरे से लडऩे में मदद करने की उनकी रणनीति के बारे में पूछा गया, तो नवीन जैन ने कहा, यह किसी भी व्यक्ति की शक्ति के भीतर नहीं है बाल यौन शोषण के निर्दोष पीडि़तों के साथ की गई हिंसा लेकिन इस तरह के अपराध के पीडि़तों के लिए अन्याय की आगे की प्रगति की जांच करना संभव है।सन सचिव ने कहा कि निजी और सरकारी दोनों स्कूलों ने अभियान में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। अधिक से अधिक स्कूल और स्वयंसेवक भी आगे आने और इस पहल का हिस्सा बनने की इच्छा दिखा रहे हैं, अगर हमें जो संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं, वह इस बात का प्रमाण है जो अजमेर, बारां, श्री गंगानगर, झुंझुनू, पाली, उदयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, कोटा, और बांसवाड़ा जैसे जिलों से है। इस प्रतिक्रिया से यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सभी 32 जिलों में र्स्पश की भूमिका दिखाई देगी, जो न तो एक वित्त पोषित एनजीओ है और न ही एक सरकारी पहल। यह जिम्मेदार नागरिक रवैये का एक परिणाम है जहाँ स्वयंसेवकों का झुकाव इस विशेष अभियान की ओर होता है, अपने स्वयं के साधनों से सामाजिक कारण के लिए।

 

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