आईआईएचएमआर ने नुक्कड नाटक के जरिये महिलाओं के खिलाफ हिंसा को चित्रित किया

जयपुर। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने अपने कैम्पस में कविता और पेंटिंग सत्र, जैम सत्र और एक नुक्कड़ नाटक सहित कई मौज-मस्ती से भरी लेकिन विचारशील गतिविधियों का आयोजन किया। साथ ही महिलाओं की उपलब्धियों के उनके सप्ताहभर ‘जेण्डर वीक’ के जश्न के रूप में इसका समापन किया।’नुक्कड नाटक’ में इस बात को अभिनय के माध्यम से बताया गया कि भारतीय समाज में आज महिलाओं की स्थिति क्या है, इस नाटक में बताया कि महिलाएं घर और बाहर किस प्रकार से हिंसा का शिकार बनती है जिनमें घरेलू हिंसा, छेड़छाड और बलात्कार जैसी घिनौनी हरकतों को नाट्य रूपान्तरण के माध्यम से दर्शाया गया।इस अवसर पर आईआईएचएमआर के प्रेसिडेन्ट डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा ”हम इस वर्ष में 25वां अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का जश्न मना रहे हैं, जो दुनियाभर में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है यह सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में पांच साल का मील का पत्थर भी है, और साथ ही संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिष्ठान (यूएन वुमन एस्टब्लिशमेंट) की 10वीं वर्षगांठ भी है। हालांकि, यह सच्चाई यह है कि 25 वर्षों के बाद भी हमें नारीत्व (वुमनहुड) का जश्न मनाने के लिए एक तिथि निर्धारित करनी होगी, इस बारे में बहुत कुछ कहा जाता है कि हमें कितनी प्रगति की आवश्यकता है। हमारे सप्ताहभर के इस आयोजन का उद्देश्य ऐसे सभी मुद्दों पर प्रकाश डालना और लैंगिक समानता के लिए वैश्विक आन्दोलन की चुनौतियों पर चर्चा करना था और छात्रों और दर्शकों के बीच प्रतिक्रिया बताती है कि हमने इस दिशा में सही कदम उठाया है।”सप्ताहभर चले इस ‘जेण्डर वीक’ की शुरूआत कैम्पस में जेण्डर चैम्पियन्स द्वारा शुरू किए गए फ्लेशमॉब के साथ हुई। इन जेण्डर चैम्पियन्स ने मानव अधिकारों और लैंगिक समानता का एक सुदृढ संदेश दिया। साप्ताहिक अवधि के दौरान अन्य गतिविधियों में चित्रकारी और कविता सत्र, जैम सत्र शामिल थे, जो महिलाओं के प्रासंगिक मुद्दों पर प्रकाश डालने के लिए प्रस्तुत किये गये जैसे: समान वेतन की मांग, अवैतनिक देखभाल और घरेलू कार्यों के समान बंटवारे, महिलाओं के साथ यौन उत्पीडऩ और हिंसा को खत्म करना आदि इनमें शामिल रहे।

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