इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप से 6 महीने में 1.4 करोड़ बार लेन-देन

हैदराबाद। इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप के ग्राहकों को भुगतान के लिए प्रताडि़त करने के आरोपों की जांच कर रही तेलंगाना पुलिस ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित अन्य एजेंसियों से वित्तीय लेन-देन का डाटा मांगा है। संबंधित डाटा के विश्लेषण के लिए पुलिस ने डाटा विश्लेषकों की नियुक्ति भी कर ली है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इंस्टेंट लोन देने वाले ऐप ने बीते छह महीने में 1.4 करोड़ बार लेन-देन किया, जिसमें 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि शामिल है।तेलंगाना पुलिस ने पहले बताया था कि कर्ज अलग-अलग माध्यमों से दिया गया। संबंधित कंपनियों से जुड़े बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। बड़ी संख्या में बिटकॉइन के जरिये अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की बात भी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक बीते छह महीने में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन कर्ज बांटे गए हैं। संबंधित लेन-देन की जांच के लिए हमने आरबीआई सहित अन्य एजेंसियों को पत्र लिखा है। हम यह जानना चाहते हैं कि पैसा आया कहां से और गया कहां? संबंधित खाते के लाभान्वित कौन हैं? उन्हें कितनी कमाई हुई? बता दें भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों को अनाधिकृत तरीके से डिजिटल मंचों और मोबाइल ऐप के जरिए कर्ज की पेशकश करने वालों को लेकर सतर्क रहने को कहा है। आरबीआई ने कहा है कि ऐसी रिपोर्ट है कि लोग या फिर छोटे कारोबारी जल्दी और बिना किसी झंझट के कर्ज देने का वादा करने वाले अनाधिकृत डिजिटल मंचों और ऐप के झांसे में फंस रहे हैं। आरबीआई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में अत्यधिक ब्याज दर और पिछले दरवाजे से अतिरिक्त लागत मांगे जाने की भी बात कही गयी है। साथ ही वे वसूली के ऐसे कड़े तरीके अपना रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं किया जा सकता और कर्जदारों के मोबाइल फोन पर आंकड़ों तक पहुंच समझौते का दुरूपयोग कर रहे हैं।

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