Jet Airways के ‘बुरे दिन खत्म’, नए रिवाइवल प्लान को मिली NCLT से मंजूरी

नई दिल्ली। संकट में फंसी एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज के अब अच्छे दिन आते दिख रहे हैं। दरअसल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने कुछ शर्तों के साथ जेट एयरवेज के लिए कालरॉक कैपिटल और मुरारी लाल जालान के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। बता दें कि जेट एयरवेज का परिचालन 18 अप्रैल 2019 से बंद है। इसके साथ ही कैलरॉक-जालान कंसोर्टियम ने अगले पांच वर्ष में बैंकों, वित्तीय संस्थाथाओं और कर्मचारियों को 1200 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव रखा है। जरूरी मंजूरियां लेने के लिए मिल समय-जेट एयरवेज की वापसी के लिए कालरॉक कैपिटल और मुरारी लाल जालान को 90 दिनों के भीतर संबंधित एजेंसियों से जरूरी मंजूरियां लेनी हैं। बता दें कि इन दोनों कंपनियों के पास एयरलाइन संचालन का अनुभव नहीं है। कालरॉक कैपिटल ब्रिटेन की एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। वहीं मुरारी लाल जालान यूएई के उद्यमी हैं। जेट एयरवेज को स्लॉट मुहैया कराने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविशएशन और मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन को 22 जून से 90 दिनों का वक्त दिया गया है। इसके स्लॉट पर सिविल एविएशनल रेगुलेटर आखिरी फैसला लेगा। 2019 में बंद हुआ था जेट एयरवेज का कामकाज -120 प्लेंस का बेड़ा रखने वाले और दर्जनों घरेलू व सिंगापुर, लंदन और दुबई जैसे स्थानों पर इंटरनेशनल फ्लाइट संचालित करने वाले जेट एयरवेज को अप्रैल 2019 में अपनी सभी उड़ानें बंद करने को मजबूर होना पड़ा था। पहले जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल थे। जिन पर बैंकों का करीब 7800 करोड़ रु का बकाया था। जो एयरलाइन अदा नहीं कर पा रही थी। लोन अदा न कर पाने और एयरलाइन को चलाने के लिए कैपिटल न मिल पाने से एयरलाइन का कामकाज अप्रैल 2019 में बंद हो गया। बाद में बैंक एयरलाइन को हृष्टरुञ्ज में ले गए ताकि नया खरीदार लाकर बैंक अपना पैसा वसूल पाएं। अक्टूबर 2020 में कैलरॉक और जालान के कंसोर्शियम ने बोली जीती और उसके बाद से हृष्टरुञ्ज की मंजूरी का इंतजार था।

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