हर रोज बस 30 मिनट पैदल चलें और अपनी सेहत को दे ये चमत्कारिक लाभ

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि घूमना या पैदल चलना एक अनोखी तकनीक है। जो पूरे शरीर और दिमाग को लाभ पहुंचाती है। यह न सिर्फ मुफ्त है, बल्कि आसान भी है। क्या आपने हिप्पोक्रेट्स (Hippocrates) की कहावत सुनी है, चलना मनुष्य के लिए सबसे अच्छी दवा है? वास्तव में अच्छी नींद और स्वस्थ्य आहार के साथ पैदल चलना आपको पूरी तरह से डॉक्टर से बचने में मदद कर सकता है। रोजाना नियमित रूप से 15-30 मिनट पैदल चलना न केवल किसी व्यक्ति की शारीरिक स्वास्थ्य मं सुधार करता है, बल्कि यह उनकी मेंटल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में हम ज्यादा पैदल नहीं चलते। विशेष तौर पर इस महामारी ने हमें घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन हमें रोजाना कुछ समय पैदल चलने के लिए निकालना चाहिए, क्योंकि इसके स्वास्थ्य संबंधी अनेक लाभ हैं। यह आपको कई तरह के रोगों से लडऩे में मदद करता है।
रोजाना 30 मिनट पैदल चलने के फायदे मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन होता है-रोजना नियमित रूप से पैदल चलना मस्तिष्क की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। एक अध्ययन से पता चलता है, कि कम प्रभाव वाले एरोबिक एक्सरसाइज जैसे पैदल चलना, शुरुआती डिमेंशिया को रोकता है, अल्जाइमर रोग के जोखिम को कम करता है और समग्र मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
हृदय रोग के जोखिम को कम करता है-हृदय रोग के जोखिम कम करने की बात करें, तो पैदल चलना बहुत ही प्रभावी साबित हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, जब हृदय रोग या स्ट्रोक को रोकने की बात आती है, तो पैदल चलना, दौडऩे से कम प्रभावी नहीं होता है। यह गतिविधि हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करके हृदय संबंधी समस्याओं को रोकने में मदद करती है।
फेफड़ों को ट्रेन करता है-पैदल चलना एक एरोबिक एक्सरसाइज है, जो रक्त प्रवाह में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों और कचरे को खत्म करने के साथ ही फेफड़ों को प्रशिक्षित करने में भी मदद करता है। पैदल चलने के दौरान बेहतर और गहरी सांस लेने के कारण फेफड़ों की बीमारी से जुड़े लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।
अग्न्याशय के लिए लाभकारी है-आपको शायद यकीन न हो, लेकिन व्यायाम के तौर पर पैदल चलना, दौडऩे की तुलना में डायबिटीज को रोकने के लिए अधिक प्रभावी साबित होता है। एक अध्ययन से पता चलता है कि पैदल चलने वालों के समूह ने 6 महीने की प्रायोगिक अवधि के दौरान दौडऩे वाले समूह की तुलना में ग्लूकोज सहिष्णुता (यानी कितनी अच्छी तरह से रक्त शर्करा को अवशोषित करता है) में लगभग 6 गुना सुधार का प्रदर्शन किया।

 

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