गुर्दे का कैंसर पहुंचा हार्ट तक, एपेक्स हॉस्पीटल ने आठ घंटे की सफल सर्जरी के बाद स्थापित किया कीर्तिमान

जयपुर, 6 जनवरी (का.सं.)। शहर के चिकित्सको ने गुर्दे के कैंसर का 24 सेमी बडा ट्यूमर निकालने में सफलता प्राप्त की है। इसमें खास बात यह रही कि यह ट्यूमर किडनी की खून की नली के रास्ते होता हुआ ओआई के निचले चैम्बर तक अपनी जडे जमा चुका था एवं विश्व में इस तरह का यह तीसरा सफल ऑपरेशन है। मामला मालवीय नगर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल का है जहां वरिष्ठ यूरोसर्जन डॉ राकेश शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सको की टीम ने यह कारनामा कर दिखाया। अमूमन इस तरह के मामलो में मरीज की मौत होती आई है। सोमवार को पत्रकारो से बातचीत के दौरान चिकित्सको की टीम ने इस ऑपरेशन की सक्सेस जर्नी को शेयर किया। चिकित्सको की टीम में कार्डियक सर्जन डॉ विमलकांत यादव, गेस्ट्रोसर्जन डॉ विनय मेहला, यूरोलॉजिस्ट डॉ सौरभ जैन, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ शैलेश झंवर, डॉ आषीश शामिल थे। विश्व में तीसरी सफल सर्जरी इस तरह की सफल सर्जरी विश्व में अब तक सिर्फ दो ही हुई है, ये तीसरी है। इसमें ऑपरेशन के उपरांत निकाले गए गुर्दे की बायोप्सी में क्लियर सेल कार्सिनोमा पाया गया। क्लियर सेल कार्सिनोमा प्रकार के कैंसर जो कि 20 सेमी से अधिक हो तथा जिनमें कैंसर हार्ट तक पहुंच चुका हो, अब तक पूरे विश्व में सिर्फ दो ही सफल रूप से ऑपरेट हो सके हैं। ये डाटा इंटरनेट पर उपस्थित वल्र्ड जरनल में उपलब्ध है। पेशाब में आते थे खून के थक्के, 8 घंटे चला ऑपरेशन गंगानगर निवासी 60 वर्षीय मरीज अमरजीत सिंह पेशाब में अचानक खून आने और खून के थक्के आने की समस्या से ग्रस्त थे। बीकानेर के विभिन्न अस्पतालो एवं दिल्ली के अस्पतालो तक दिखाने के बाद भी मरीज की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई थी। इसके बाद यूरोलॉजिस्ट डॉ राकेश शर्मा ने इनका इलाज शुरू किया। प्रारंभिक दौर में इनके सीटी स्केन में गुर्दे का कैंसर होना पाया गया। इसके बाद एमआरआई, 2डी ईको में ये पाया गया कि कैंसर हृद्य के निचले दांये चैम्बर ( दायां वेंट्रीकल) में अपनी जगह बना चुका था। इसके बाद सीटी वीएस सर्जन और कार्डियक एनस्थेटिक्स से चर्चा करने के बाद इस पेशेंट को ऑपरेशन के लिए प्लान किया गया। यही इसका अंतिम विकल्प था अन्यथा मरीज की किसी भी समय मौत हो सकती थी। क्योंकि हार्ट में उपस्थित थ्रोम्बस फेफडे में जा सकता था जो किसी भी समय मरीज के लिए प्राणघात साबित हो सकता था। करीब 8 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेषन के बाद मरीज की जान बच सकी।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *