लॉकडाउन: यूपी और बिहार के गरीबों के घर ऐसे में कैसे पहुंचेगा अनाज?

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते देश में लॉकडाउन है। गरीबों को मदद पहुंचाने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है।

नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोनावायरस की वजह से देश भर में हुए लॉकडाउन का असर गरीबों पर कम से कम पड़े, इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने तो हर परिवार को फ्री गेहूं, चावल और दाल देने की घोषणा कर दी है। लेकिन, उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीबोंं के यहां कम से कम समय में यह राशन पहुंचेगा कैसे? यह सवाल इसलिए उठना लाजिमी है, क्योंकि इन राज्यों में न सिर्फ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर अपर्याप्त हैं, बल्कि इन राज्यों में पीडीएस से जुड़ा भ्रष्टाचार भी सबसे ज्यादा है।बीते 19 नवंबर को केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों में राज्य मंत्री दानवे आर. दादाराव ने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया था कि पीडीएस से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की सर्वाधित शिकायत उत्तर प्रदेश से आई है। इस सूची में दूसरा स्थान बिहार का था जबकि तीसरे स्थान पर दिल्ली था। उन्होंने बताया था कि 31 अक्टूबर 2019 तक जन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार से जुड़ी कुल 807 शिकायतें आईं थीं, जिनमें से सबसे ज्यादा, 328 शिकायतें उत्तर प्रदेश से थीं। बिहार से इस अवधि में 108 शिकायतें आईं जबकि दिल्ली से 78 शिकायत। ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश पीडीएस में भ्रष्टाचार के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ हो। इससे पहले वर्ष 2014 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पीडीएस से जुड़े एक घोटाले के मामले में राज्य के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जमीन की जांच का निर्देश सीबीआई को दिया था।
सभी राशन कार्ड जुड़ नहीं पाए आधार संख्या से- जिनके लिए खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन भेजा जा रहा है, वह उन्हीं तक पहुंचे, इसके लिए केंद्र सरकार अप्रैल 2018 में पॉश मशीन और आधार संख्या के माध्यम से ऑथेंटिकेशन की इंटिग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पीओएस योजना की शुरुआत की थी। इसके लिए 127 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। इसी पर वन नेशन वन राशन कार्ड योजना की सफलता टिकी है। लेकिन यह पूरा अभी तक नहीं हो पाया है। चार फरवरी 2020 को दानवे आर. दादाराव ने ही संसद में बताया था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत देश में कुल 23.4 करोड़ राशन कार्ड हैं और इनमें से करीब 90 फीसदी राशन कार्ड ही आधार संख्या से जुड़ पाए हैं।
वन नेशन वन कार्ड की सफलता इसी पर-सरकार कहीं के राशन कार्ड से कहीं भी राशन लेने की योजना लागू कर रही है और इस समय इसे देश के 12 राज्यों -आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा में लागू किया जा चुका है। अगले चरण में चार राज्यों को इस योजना में जोड़ा जा रहा है, जिनमें यूपी और बिहार भी शामिल हैं। लेकिन ये राज्य तो तभी जुड़ पाएंगे, जबकि कोविड संकट पर काबू पाया जा सकेगा। इन दिनों तो वैसे ही अंगूठा लगा कर ऑथेंटिकेशन पर भी रोक है। हालांकि सरकार ने कहा है कि आगामी जून में यूपी और बिहार में यह योजना लागू हो जाएगी।
आजादी से पहले से चल रहा है पीडीएस
भारत में पीडीएस योजना का कितना महत्व है, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि देश के आजाद होने से पहले ही इस योजना की शुरूआत हो चुकी थी। देश को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को मिली लेकिन पीडीएस योजना की शुरूआत 1944 में ही हो गई थी।

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