लूणकरणसर : देश की प्रथम जैतून रिफाइनरी में तेल निकालने का काम शुरू, किसानों में खुशी

बीकानेर , 9 सितम्बर (का.सं.)। इजराइल से आई जैतून की फसल तकनीक अब राजस्थान में फल फूल रही है. इनकी बानगी है कि देश की पहली जैतून रिफाइनरी अब अपने पूरे शबाब पर आ गई. जैतून को लेकर किसानों की बढ़ी रुचि ने रिफाइनरी को एक नया जीवनदान दिया । राजस्थान में जैतून का नाम लेने पर ही ऐसा लगता था कि ये कौन सा फल है? उसके बाद उसकी खेती करना जैसे कोई काल्पनिक कहानी हो लेकिन कहते हैं हिम्मते मर्दा तो मदद-ए-खुदा. कुछ ऐसा ही बीकानेर के लूणकरणसर में देखा जा रहा है. जी है जिस फसल की कुछ वर्षों पूर्व कल्पना नहीं की जा रही है, आज उसकी रिफाइनरी सफलता के झंडे गाड़ रही है. देश की पहली रिफाइनरी में राजस्थान भर के किसान अपनी फसल को लेकर इस रिफाइनरी में आयल निकाल रहे हैं। लूणकरणसर में स्थित देश की प्रथम जैतून रिफाइनरी में इस सेशन का एक्सट्रेशन कार्य शुरू हो चुका. इस सीजन के जैतून फल पूरी पककर तैयार हो चुके और किसान राज्य भर से लूणकरणसर स्थित जैतून रिफाइनरी में फसल लेकर पहुंचने लगे हैं। जैतून की खेती किसानों की पहली पसंद बनती जा रही इजरायल से इम्पोर्ट किये गए जैतून की फसल की तरफ राजस्थान के किसान काफी आकर्षित नजर आ रहे हैं. शुरुआती दौर में किसानों ने जैतून की खेती को ज्यादा महत्व नहीं दिया था परंतु मौजूदा समय में जैतून की खेती किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. अब राजस्थान भर के किसान जैतून की खेती करने लगे है. 3 अक्टूबर 2014 को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने लूणकरणसर में देश की पहली जैतून रिफाइनरी का उद्घाटन किया था। जैतून खेती से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह जैतून के पेड़ लगाने के पांच साल के बाद फल देना शुरू कर देते हैं। इन पांच सालों में इनकी दो से तीन बार कटाई की जाती है, जिससे इनकी ग्रोथ रेट बढ़ती है. जैतून का तैल (ऑलिव ऑयल) खाने और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में काम लिए जाते हैं. इसके साथ ही इनकी टहनियों में भी तेल की मात्रा होती है, जो कटाई के बाद जलाने के काम आती है. वहीं जानकारों का कहना है कि इसकी पत्तियों को सुखाकर चाय भी बनाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होती है। राजस्थान में जैतून की बहुत ही शानदार पैदावार रिफाइनरी प्रबंधक सीताराम यादव ने बताया कि सरकार ने इजरायल से जैतून की सात किस्में इम्पोर्ट की है, जिनमें से पांच की राजस्थान में बहुत ही शानदार पैदावार हो रही है. वहीं सरकार के 182 हेक्टेयर में जैतून के फार्म लगे हुए हैं. तो वहीं राजस्थान में किसानों द्वारा एक हजार हेक्टेयर में जैतून की खेती की जा रही है. झुंझुनूं से अपनी फसल का आयल निकालने आए किसान कहते है कि पहले इस खेती को लेकर किसानों में ज्यादा उत्साह नही था लेकिन अब इससे होने वाले आर्थिक लाभ से किसान प्रेरित हो रहे। जैतून को लेकर किसानों की बढ़ी रुचि से कहा जा सकता कि वो दिन दूर नही जब राजस्थान इजरायल की बराबरी कर लेगा. जिस तरह से जैतून के पेड़ का हर पार्ट उपयोगी है, किसान के लिए जैतून की खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

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