सेक्स स्कैंडल में फंसाने की धमकी दे वृद्ध को आत्महत्या को मजबूर किया, जयपुर का युगल गिरफ्तार

मोबाइल ऐप से वृद्ध को फांसा, ब्लैकमेलिंग से अढ़ाई लाख ठगे

श्रीगंगानगर, 19 जुलाई (का.सं.)। राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक सेवानिवृत्त वृद्ध को मोबाइल एप से फांसकर सैक्स स्कैंडल में फंसा देने का भय दिखाकर ब्लैकमेल कर अढाई लाख रुपए ऐंठने और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने के आरोप में जयपुर निवासी एक युगल को गिरफ्तार किया गया है। कोतवाली पुलिस ने बताया कि जस्सासिंह मार्ग पर बसंती चौक के समीप के निवासी राधेश्याम चारण (62) ने धमकियों और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर विगत 8-9 जुलाई की रात को घर के बाहर वाले कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। राधेश्याम के पुत्र राजेंद्र द्वारा 12 जुलाई को दर्ज करवाए मुकदमे के तहत जयपुर में छापेमारी कर ललित गुप्ता उर्फ बैरवा (40) पुत्र लक्ष्मीनारायण और ज्योति शर्मा (30) पुत्री कन्हैयालाल को गिरफ्तार किया गया है। दोनों जयपुर में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। ज्योति शर्मा मूल रूप से मध्यप्रदेश में मंदसौर जिले की निवासी है। दोनों को आज कोर्ट में पेश करने पर पुलिस को एक दिन का रिमांड मिला है। पुलिस ने इनके द्वारा ब्लैक मेलिंग में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, ब्लैकमेलिंग से हासिल की गई रकम में से 2 हजार रुपए, ज्योति शर्मा की बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया की स्थानीय सुखाडिय़ा सर्किल के समीप एक निजी शिक्षण संस्थान से लगभग दो वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुआ राधेश्याम चारण सोशल मीडिया में काफी एक्टिव रहता था। विगत फरवरी माह में फीनले नामक ऐप पर उसकी चैटिंग पायल गुप्ता के नाम से बनी आईडी प्रोफाइल पर होने लगी। दरअसल यह फेक नाम की आईडी ललित गुप्ता ने ही बना रखी थी। वह राधेश्याम से पायल बनकर लुभावनी बातें करने लगा। कई दिन की चैटिंग के बाद ललित ने राधेश्याम को मिलने के लिए जयपुर आने को तैयार कर लिया ,लेकिन फिर टालमटोल करने लगा। इस दौरान उसने लिविंग पार्टनर ज्योति से राधेश्याम की मोबाइल फोन पर दो तीन बार बातचीत भी करवाई। ज्योति ने पायल गुप्ता बनकर बातचीत की। राधेश्याम जयपुर जाकर पायल से मिलना चाहता था लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस लॉकडाउन लागू हो गया। कभी होटल मालिक,कभी एसओजी का सीआई लोक डाउन के दौरान ललित गुप्ता ने राधेश्याम को ब्लैकमेल करने के लिए अनेक प्रकार के बहाने ही नहीं बनाए बल्कि उसे तरह-तरह से डराया धमकाया भी। पुलिस के मुताबिक तीन महीनों में ललित गुप्ता ने कभी जयपुर के एक नामी होटल का मालिक करणीसिंह बन कर तो कभी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) का सीआई सुधीर त्यागी बनकर डराता धमकाते रहा। होटल मालिक करणीसिंह बनकर उसने राधेश्याम को फोन किया कि पायल गुप्ता को पुलिस ने होटल पर छापा मारकर पकड़ लिया है। पायल के मोबाइल फोन में उसका नंबर है। इसलिए पुलिस उसे भी सेक्स स्कैंडल में लिप्त होने के आरोप में पकड़ेगी। मामला ले देकर रफा-दफा कर दो। घबराए राधेश्याम ने करणीसिंह द्वारा बताएं ज्योति शर्मा के एसबीआई अकाउंट में रुपए जमा करवा दिए। फिर करणीसिंह ने लॉकडाउन में होटल बंद हो जाने का हवाला देकर राधेश्याम को रुपयों की मदद करने के लिए कहा ताकि कि वह स्टाफ को वेतन दे सके। इसके बाद करणी सिंह सीआई सुधीर त्यागी बनकर फोन करने लगा। उसे धमकाया कि अगर रुपए नहीं दिए तो वह उसके घर स्थानीय थाने से पुलिस को भेज देगा। करणीसिंह ने एक बार खुद को कोरोना हो जाने और एसएमएस हॉस्पिटल में भर्ती होने का बताकर भी रुपए ले लिए। पुलिस के मुताबिक सुधीर त्यागी नाम का एसओजी में कोई सीआई नहीं है। जयपुर के जिस नामी होटल का ललित गुप्ता ने करणीसिंह बनकर खुद को मालिक बताया, उस होटल से किसी करणीसिंह नामक व्यक्ति का कोई वास्ता नहीं है। अपनी रिटायरमेंट के बाद मिले लगभग सारे रुपए ब्लैकमेलिंग में गंवा देना तथा और रुपए नहीं देने पर सेक्स स्कैंडल में फंसा देने की मिल रही धमकियों से परेशान होकर राधेश्याम ने आत्महत्या कर ली थी। जयपुर का शातिर चोर ललित कोतवाली पुलिस ने बताया कि ललित गुप्ता उर्फ बैरवा जयपुर का शातिर चोर है। उस पर जयपुर एवं आसपास के अनेक स्थानों में चोरी व अन्य अपराधों के लगभग 40 मुकदमे दर्ज हैं। ज्यादातर मुकदमे मोटरसाइकिल चोरी के हैं। वह विभिन्न मामलों में लगभग 10 वर्ष जेल में रहा है। लगभग 6 महीने पहले वह जेल से छूटा और मोबाइल ऐप फीनले के जरिए राधेश्याम के संपर्क में आ गया। मूल रूप से वह सीकर जिले का निवासी है। उसने बैरवा के नाम से गुरुग्राम की सुशांत लेक सिटी के एड्रेस पर फर्जी आधार कार्ड भी बनाया हुआ है। जयपुर पुलिस से उसके तमाम अपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा रही है। मूल रूप से मध्यप्रदेश के मंदसौर की निवासी ज्योति शर्मा का पहले पति से अलगाव हो चुका है, जिससे उसके एक पुत्री है। जयपुर में वह 5-6 वर्षों से बड़ी अविवाहित बहन के पास रह रही है। वह जयपुर में एक मोबाइल फोन कंपनी के स्टोर में काम करती थी, जहां उसकी पहचान ललित गुप्ता से हुई। फिर दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। ज्योति को नहीं थी ब्लैकमेलिंग की भनक कोतवाली पुलिस के अनुसार ललित गुप्ता फीनले एप पर पायल गुप्ता बनकर राधेश्याम चारण से चैटिंग कर उसे ब्लैक मेलिंग का शिकार बना चुका था, लेकिन लिव इन रिलेशन में साथ रहती ज्योति को भनक तक नहीं लगने दी। वह राधेश्याम से रुपए ज्योति के बैंक अकाउंट में डलवता रहा और खुद ही उसके एटीएम कार्ड से निकलवाता रहा। राधेश्याम ने कई बार पायल गुप्ता को सीधे मोबाइल पर बात करने के लिए कहा तो ललित ने ज्योति पर पायल बनकर उससे बात करने के लिए कहा। वह ललित के कहने पर सिर्फ हाय-हेलो, हां-हूं और व्यस्त हूं, बाद में बात करूंगी कहकर फोन काट देती थी। उसे तब इस पूरे कांड का पता चला जब पुलिस ने जयपुर में छापा मारकर ललित के साथ दबोचा। अखबार पर इशारा, दो सुसाइड नोट पुलिस के अनुसार विगत 9 जुलाई को जब राधेश्याम की लाश घर के बाहर वाले कमरे में लटकते तो वही एक अखबार भी मिला। अखबार पर राधेश्याम में घर वालों के लिए संदेश लिख छोडा की अलमारी में 5 हजार रुपए पड़े हैं और एक बैग रखा हुआ है। बैग में राधेश्याम द्वारा 7 और 9 जुलाई की तारीखों में लिखे दो सुसाइड नोट मिले। सुसाइड नोट्स से ही खुलासा हुआ की जयपुर के तीन व्यक्ति करणीसिंह, सुधीर त्यागी और पायल उसे ब्लैकमेल कर रहे थे। करणीसिंह और सुधीर त्यागी नाम के कोई व्यक्ति नहीं हैं। ललित ही इन नामों का इस्तेमाल कर राधेश्याम को ब्लैकमेल कर रहा था। राधेश्याम आवाज नहीं पहचान ही नहीं पाया कि करणीसिंह और सुधीर त्यागी एक ही व्यक्ति है। आत्महत्या का पता नहीं चला ललित गुप्ता को जयपुर में जरा भी पता नहीं चला कि उसके शिकार बने राधेश्याम ने ब्लैकमेलिंग से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। दरअसल 9 जुलाई की सुबह मौके पर पहुंची पुलिस को राधेश्याम का मोबाइल फोन परिवार वालों ने सौंप दिया था। पुलिस ने मोबाइल फोन को खंगाला तो व्हाट्सएप में ललित द्वारा धमकी भरे भेजे मैसेज दिखाई दिए। पुलिस ने मोबाइल फोन को दो-तीन दिन बंद रखा। फिर मोबाइल ऑन करते ही ललित गुप्ता के फिर से धमकी भरे मैसेज आने लगे। पुलिस के अनुसार कल शनिवार को जयपुर में ज्योति के साथ ललित को काबू किया गया, तब तक इन्हें पता नहीं था कि राधेश्याम अब इस दुनिया में नहीं है। पुलिस ने ललित को उसके मोबाइल फोन की लोकेशन से ही पकड़ा। राधेश्याम से खुदकुशी कर लेने का पता चल गया होता तो वह मोबाइल फोन बंद कर ज्योति के साथ गायब हो चुका होता। इलाज में मंत्री से मदद मांगी ब्लैकमेलिंग और आत्महत्या के इस मामले में राज्य सरकार के एक मंत्री का भी जिक्र उभरा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार होटल मालिक बनकर करणीसिंह ने राधेश्याम से बार-बार रुपए मांगे, इसी दौरान उसने खुद को कोरोना हो जाना भी बताया। करणीसिंह ने राधेश्याम से कहा कि वह एसएमएस में भर्ती है। उसका सही इलाज नहीं हो रहा। उसे रुपयों की जरूरत है। इस पर राधेश्याम ने प्रदेश सरकार के एक मंत्री से फोन पर बात की और करणी सिंह नामक मरीज का उचित तरीके से इलाज करवाने का आग्रह किया। पुलिस के अनुसार राधेश्याम के मोबाइल फोन में मंत्री से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग मिली है। यह मंत्री सीकर जिले से संबंध रखते हैं। राधेश्याम भी मूल रूप से सीकर जिले के निवासी था। इस रिकॉर्डिंग में मंत्री कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे उचित कार्रवाई करेंगे। प्रेम रोग के साथ कई रोग गिरफ्तार किया गया जयपुर निवासी यह प्रेमी युगल प्रेम रोग की गिरफ्त में तो है ही साथ में स्वास्थ्य संबंधी रोगों की चपेट में भी है। पुलिस ने बताया कि ललित गुप्ता को रक्त संबंधी रोग है, जिस कारण उसका बार-बार डायलिसिस होता है। शातिर चोर होने के कारण उसे घर वालों ने बेदखल किया हुआ है। ज्योति शर्मा की आयु 30 वर्ष है लेकिन उसे डायबिटीज है। लिहाजा गिरफ्तार करने के बाद और आज रिमांड मिलने पर इन दोनों के स्वास्थ्य का पूरा पुलिस को ध्यान रखना पड़ रहा है दोनों का दोनों का कोरोना वायरस टेस्ट सैंपल करवाया गया है।

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