मेरा लाइफ पार्टनर वही, जो मुझे ढेर सारा प्यार करे कृति खरबंदा

 

My life partner is the one who loves me a lot Kriti Kharbanda
My life partner is the one who loves me a lot Kriti Kharbanda

वीरे की वेडिंग और शादी में जरूर आना जैसी फिल्मों के बाद अब कृति ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्म 14 फेरे में नजर आ रही हैं। पर्सनल लाइफ में शादी को लेकर कृति का कहना है कि ये पक्का होना चाहिए कि जिसके साथ आप अपनी जिंदगी बिताने जा रहे हैं, वह आपकी दोस्ती, आपके प्यार के लायक हैं।शादी वाली फिल्मों के साथ ऐक्ट्रेस कृति खरबंदा का एक अलग ही कनेक्शन है। वीरे की वेडिंग और शादी में जरूर आना जैसी फिल्मों के बाद अब कृति ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्म 14 फेरे में नजर आ रही हैं। इसी सिलसिले में हमने की उनसे ये खास बातचीत
आपने मुझसे कहा था कि आप फिल्मों में इतनी बार दुल्हन बन चुकी हैं कि रियल लाइफ में अब शायद पजामा पहनकर शादी करें। ऐसे में, एक और शादी वाली फिल्म करने को कैसे तैयार हो गईं?
हां यार, मैं बहुत थक गई हूं, दुल्हन की तरह तैयार हो-होकर। सात-सात दिन कॉस्ट्यूम पहनकर, हेयर-मेकअप करके काम करना पड़ता है। इसमें काफी मेहनत लगती है, लेकिन काम है, तो करते रहेंगे। वैसे, इस फिल्म में मेरा दुल्हन का लुक बहुत अलग है। वहीं, जिस तरह से कहानी लिखी गई है, वह स्टोरी-टेलिंग भी बहुत अलग है। जैसे, ऋषिकेश मुखर्जी या सूरज बडज़ात्या की फिल्मों में एक मासूमियत और शरारत दोनों होती है, मुझे वही बात इस स्क्रिप्ट में लगी। हल्की-फुल्की, फील गुड फिल्म है। बहुत वक्त से ऐसी साफ सुथरी, हंसी-खुशी, फैमिली ड्रामा, नाच-गाने वाली प्यारी सी लव स्टोरी नहीं आई है। इस फिल्म में प्यार है, तकरार है, फैमिली है, नाच गाना है और बहुत सारा कंफ्यूजन है। ये फिल्म जब मुझे मिली, तब मैंने भी तैश शूट की थी, जिसमें काफी इंटेंस रोल था, तो मैं कुछ हल्का-फुल्का करना चाहती थी। ये और बात है कि इसमें भी दुल्हन बनना था, पर इसका फील अलग है।
फिल्म में जाति का अंतर आपकी शादी के बीच रोड़ा बनता है। ये कहीं न कहीं हमारे समाज का सच है कि आज भी जाति-धर्म प्यार के दुश्मन बन जाते हैं। 21वीं सदी में भी समाज की इस सोच पर आपकी क्या राय है?
मुझे लगता है कि अब हम काफी बदल चुके हैं। हमारा नजरिया बहुत बदल चुका है। जो लोग नहीं बदले हैं, उन्हें हम कंट्रोल नहीं कर सकते। मेरा मानना है कि दूसरों को बदलने के बजाय हम सभी को अपने अंदर झांकना चाहिए। अगर हम खुद को, अपने परिवार को, अपने बच्चों को देखे, तो ही ये बदलाव आएगा। वैसे, मुझे लगता है कि हमारे पैरंट्स की पीढ़ी खुद को बदलने की कोशिश कर रही है और उन्हें इसका श्रेय मिलना चाहिए। बहुत सी जगहों पर अंतरजातीय शादियां हो रही हैं। लव मैरिजेज हो रही हैं। मूवी में भी हमने जो पैरंट्स दिखाए हैं, वे भले परंपराओं को मानते हैं, पर दिल में वे चाहते हैं कि उनके बच्चे हमेशा खुश रहें। हम वे बच्चे दिखा रहे हैं, जो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वरना तो बहुत आसान है, आप भाग जाओ, हो गई शादी, कोई क्या ही कर लेगा, लेकिन फिल्म में हम दिखा रहे हैं कि ना भागना ऑप्शन है, न अलग होना, तो आप घरवालों को कैसे मनाएं। हम ये कह रहे हैं कि परंपराएं और आधुनिकता दोनों साथ-साथ चल सकती हैं।
आपने एक इंटरव्यू में कहा था कि आप शादी में नहीं, कंपैनियनशिप में यकीन रखती हैं। चूंकि आपको अब एक पार्टनर मिल गया है, तो क्या आपकी ये सोच कुछ बदली है?
लेकिन शादी का आधार कंपैनियनशिप (साथ) ही तो होता है। शादी बहुत ही पवित्र संस्था है और वह तभी सफल होती है, जब आपकी दोस्ती रहती है, अपने पार्टनर के साथ। वह सिर्फ एक पति-पत्नी का रिश्ता नहीं होता, वो एक दोस्ती का रिश्ता होता है। अगर ये दोस्ती का रिश्ता आपने कायम कर लिया, तो आप शादी करो या ना करो, वह बहुत मायने नहीं रखता है। अगर आपमें कंपैनियनशिप है, तो आप शादीशुदा हैं या नहीं, उससे आपको फर्क नहीं पड़ेगा। मेरा ये मतलब नहीं है कि शादी पवित्र संस्था नहीं है, मेरा मतलब ये है कि अगर आप शादी कर रहे हो, तो बहुत सोच-समझकर करो। कई बार गलत वजहों से शादी होती है, आपको ये पक्का होना चाहिए कि जिसके साथ आप अपनी जिंदगी बिताने जा रहे हैं, वह आपकी दोस्ती, आपके प्यार के लायक हैं।
फिल्म में आप 14 फेरे ले रही हैं। असल जिंदगी में 7 फेरे लेने का कब प्लान है?
यह बहुत निजी फैसला है, तो जब होगा, सबको पता ही चल जाएगा। मैं इस मामले में बहुत साफ हूं कि वह जब होगा, आप सबके सामने होगा।

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