बिगड़ सकता है एनबीएफसी ईएमआई कलेक्शन का हिसाब

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव के चलते गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का कलेक्शन का हिसाब किताब बिगड़ सकता है। इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक वित्तवर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में क्षेत्रीय लॉकडाउन की वजह से कंपनियों ने जो कर्ज दिया है उसकी वसूली में देरी संभव है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैश आधारित कलेक्शन के लिए एनबीएफसी के कर्मचारियों को आने जाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं खुद एनबीएफसी के कई कर्मचारियों में भी इस लहर में कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। इंडिया रेटिंग के मुताबिक करीब 8-10 फीसदी कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इनमें से ज्यादातर शाखाओं और कलेक्शन के कामकाज से ही जुड़े हैं। आंकलन के मुताबिक दक्षिण भारत से जुड़े राज्यों में बााकी राज्यों के मुकाबले मई 2021 में कलेक्शन गिरा है। वहीं देश के उत्तरी राज्यों में अप्रैल महीने में ज्यादा असर देखने को मिला है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है जिन राज्यों में सख्त लॉकडाउन रहा है और कोरोना से बेहतर तरीके से निपटा गया है वहां अब कलेक्शन को लेकर सुधार दिखना शुरू हो गया है। वहीं राज्यों के जिन जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रही हैं वहां अभी भी समय लग सकता है। कारोबारी गतिविधियों के पूरी तरह से सामान्य न हो पाने की वजह से इस पूरे क्षेत्र में हालात सामान्य होने में कई महीनों का समय लग सकता है। छोटे कारोबार को कर्ज देने वाली माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं का हाल और बुरा हो गया है। इनके कलेक्शन में ग्रामीण इलाकों में ज्यादा प्रभाव देखा गया है। अप्रैल महीने में जहां ये 5 फीसदी के करीब कम हो रहा था, मई 2021 में आंकड़ा बढ़कर 10-15 फीसदी हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि जून महीने से पाबंदियां हटने के बावजूद भी कलेक्शन में मार्च के मुकाबले 15-20 फीसदी की कमी देखी जा रकती है।

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