न्यूज़ीलैण्ड-इंडिया एकेडमिक कॉन्क्लेव द्विपक्षीय शैक्षणिक संबंधों को करेगा प्रोत्साहित

मुंबई। भारत और न्यूज़़ीलैण्ड से अग्रणी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों और विशषज्ञों ने मुंबई में एक बैठक की, जिसमें दोनों देशों ने शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता जताई।हर साल 20,000 से अधिक भारतीय छात्र न्यूज़ीलैण्ड में पढऩे का फैसला लेते हैं, न्यूज़ीलैण्ड एक ऐसा देश है जिसे 2018 में इकोनोमिस्ट इंटेलीजेन्स युनिट ने छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु सर्वश्रेष्ठ अंगेज़ी-भाषी गंतव्य का दर्जा दिया।जॉन लैक्सोन, एजुकेशन न्यूज़ीलैण्ड के रीजऩल डायरेक्टर, एशिया ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय बाज़ार के लिए न्यूज़ीलैण्ड की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। न्यूज़ीलैण्ड भारत एवं दुनिया भर में कई क्षेत्रों जैसे शुरूआती बचपन की शिक्षा, रोबोटिक्स, डिज़ाइन, फिल्ममेकिंग, गेमिंग और एनीमेशन, कृषि कारोबार, स्वास्थ्य विज्ञान, उद्यमिता, पर्यटन और अतिथ्य में विकसित होने की क्षमता रखता है। यह दुनिया का एकमात्र देश है जिसके सभी विश्वविद्यालय दुनिया के शीर्ष पायदान के 3 फीसदी विश्वविद्यालयों में शुमार हैं (क्यूएस रैंकिंग 2018 के अनुसार)। इस तरह के कार्यक्रम आपसी संबंधों को बढ़ावा देते हैं और सहयोगात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। सम्मेलन का उद्घाटन न्यूज़ीलैण्ड के हाई कमिशनर जोआन्ना केम्पकर्स द्वारा किया गया, इसके बाद मुख्य अतिथि श्वेता शालिनी, भाजपा की आधिकारिक प्रवक्ता और कार्यकारी निदेशक, विलेज सोशल ट्रांसफोर्मेशन से सभा को संबोधित किया। प्लेनेरी सत्र के दौरान न्यूज़ीलैण्ड की मैस्सी युनिवर्सिटी के डिप्टी वाईस चांसलर स्टुअर्ट मोरिस ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कैसे इनोवेशन को बढ़ावा दे सकते हैं। अकादमिक सम्मेलन के साथ ही अकादमिक मोबिलिटी पहलों की एक श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 14 से 26 अगस्त के बीच ‘गेस्ट लेक्चर सीरीज़ शामिल हैं, इसमें मुंबई, दिल्ली, पुणे, चेन्नई, अहमदाबाद, पंजाब, बैंगलुरू, जयपुर, कोलकाता और कोची सहित प्रमुख शैक्षणिक केन्द्रों में 42 व्याख्यान होंगे।

 

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