भारत में अब कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं है सोनाक्षी सिन्हा

 

सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म दबंग 3 जल्द ही रिलीज होने जा रही है। उन्होंने दबंग सीरीज की पहली फिल्म से ही बॉलिवुड में डेब्यू किया था। एक बार फिर वह रज्जो के किरदार में दिखेंगी। सोनाक्षी ने अपनी फिल्मों और समाज के बारे में खुलकर बातचीत की।सोनाक्षी सिन्हा अपनी आगामी फिल्म दबंग 3 को लेकर खासी उत्साहित हैं। इस फिल्म के साथ सोनाक्षी इंडस्ट्री में अपने 10 साल पूरे करने जा रही हैं। कुछ अनोखी बातों को सोनाक्षी ने हमसे शेयर किया। पेश हैं कुछ अंश
दबंग 3 से आप इंडस्ट्री में 10 साल पूरे कर लेंगी। इस जर्नी को कैसे बयां करेंगी?
पहले तो मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा है कि हम वापस ‘दबंग 3’ तक आ पहुंचे हैं। यह मेरी शायद 25वीं फिल्म होगी और अब 10 साल पूरे होने को हैं। अभी भी लगता है कि पहली फिल्म कल ही तो रिलीज हुई थी। इन 10 सालों में मैंने जिस रफ्तार के साथ काम किया है, वक्त कब बीतता गया, अहसास ही नहीं हुआ। मैं खुद को लकी मानती हूं कि मुझे पहली फिल्म के साथ इतना एक्सेप्टेंस और प्यार-सम्मान मिला है। मैंने उसे संभालकर रखा है और कोशिश यही है कि जिंदगीभर इस प्यार को संजोकर रखूं। मुझे लगता है कि आप इतना सारा काम कर लेते हैं और बहुत से एक्स्पीरियंस से गुजर चुके होते हैं, तो आपके अंदर सहजता आ जाती है। मेरे लिए रज्जो के किरदार की बात की जाए, तो मुझे लगता है कि मैं नींद में भी इसका किरदार निभा सकती हूं। मैं उस जोन में आसानी से घुस जाती हूं, बहुत कंफर्ट आ जाता है।
सलमान संग आप किस तरह की बॉन्डिंग शेयर करती हैं। सीनियर, को-ऐक्टर या दोस्त?
मैं सलमान को फिल्मों में आने से पहले से जानती हूं। मेरे पापा और सलीम अंकल बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। उन्होंने अपने दिनों में बहुत सारा काम किया है। मैं सलमान को एक ऐक्टर के तौर पर नहीं जानती हूं, वह मेरे फैमिली फ्रेंड हैं। जब उनके साथ काम किया और इतना काम कर लिया है, तो अब जो बॉन्डिंग है, वह दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही गई है। आज मैं जो कुछ भी हूं और जहां भी हूं, उसका पूरा श्रेय सलमान और उनके परिवार को जाता है। अगर सलमान नहीं होते, तो शायद मैं ऐक्ट्रेस भी नहीं बनती। दरअसल मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ऐक्टिंग करनी है। मैं तो फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही थी। उन्होंने आकर मुझसे कहा कि क्या कर रही हो? मेरे पास एक फिल्म है, उसमें ऐक्टिंग करोगी? उन्होंने प्रेरित नहीं किया होता, तो मैं आज यहां तक नहीं पहुंच पाती।
हैदराबाद में हुए बलात्कार से आज पूरा देश आक्रोशित है। आप क्या कहना चाहेंगी?
मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है, ऐसी भयंकर चीजों को सोचकर ही खून खौल उठता है। यह बहुत दुख की बात है। मैं मानती हूं कि अब कोई भारत की बेटी बनना नहीं चाहता है क्योंकि हमारी कोई भी बेटी सुरक्षित नहीं है। हर दिन इस तरह की घटनाएं घट रही हैं। आप ऐक्शन तो ले रहे हो, लेकिन यह रिपीट क्यों हो रही हैं? 7 साल हो गए हैं निर्भया केस को, अभी हम उससे उबरे ही नहीं थे कि यह घटना घट गई। कोई कुछ नहीं कर रहा है। मुझे ऐसे लोगों की मानसिकता समझ नहीं आती है।
कोई ऐसा पल जब आपको औरत होने का गर्व हुआ हो?
मैंने हमेशा से औरत होने पर गौरवान्वित ही महसूस किया है और यह चीज मेरी परवरिश से आई है। मेरे घर पर कभी भी भेदभाव नहीं किया गया। मुझे कभी यह महसूस नहीं कराया गया कि मैं लड़की हूं, तो यह नहीं कर सकती। मुझे पता है कि मैं उन चंद महिलाओं की कैटिगरी में आती हूं और इसके लिए भगवान की शुक्रगुजार हूं।
समाज में आज भी कई जगहों पर महिलाओं को अपने हक की लड़ाई लडऩी पड़ती है। इस पर आपकी क्या राय है?
अजीब सा ही है क्योंकि हमें जिस चीज के लिए लडऩा नहीं चाहिए हम उसके लिए लड़ रहे हैं। यह जिंदगी की सबसे बड़ी आयरनी है। ऐसा देश जहां हम इतनी देवियों को पूजते हैं, वहीं औरतों को अपने बेसिक हक के लिए लडऩा पड़ता है। मुझे यह बहुत अजीब लगता है, हालांकि इस बात की भी खुशी है कि हमारे देश में अब कई औरतें अपनी आवाज उठाने लग गई हैं। चाहे वो फिल्म इंडस्ट्री की बात हो या पॉलिटिक्स, लड़कियां आगे बढ़ रही हैं।
सई भी आपकी ही तरह डेब्यू करने जा रही हैं। आपने कोई टिप्स दिया?
आजकल जो भी डेब्यू कर रहे हैं, वे बहुत ही तैयारी के साथ आते हैं। सई बहुत ही खूबसूरत और टैलेंटेंड हैं। उनकी ग्रूमिंग भी बहुत अच्छे से हुई है। मुझे नहीं लगता कि मुझे उन्हें कोई टिप्स देने की जरूरत है। मैं उनके लिए कामना करती हूं कि उनका फ्यूचर बहुत अच्छा हो।
जब फिल्में नहीं चल पाती हैं, तो अपनी चॉइसेज को लेकर कोई मलाल होता है?
बिलकुल भी नहीं, जो फिल्में नहीं चलती हैं उससे भी हम सीखते ही हैं कि क्या नहीं करना चाहिए। मैं हमेशा हर फिल्म को एक एक्सपीरियंस की तरह मानती हूं। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही होती है कि मैं शूटिंग के दौरान अच्छा महसूस करूं। मैं अपना काम पूरी ईमानदारी से करूं और उस किरदार में पूरी जान डाल दूं। मैं सबसे सीखने की कोशिश में लगी रहती हूं। अगर इन पॉइंट्स पर मैं संतुष्ट हूं, तो फिल्म नहीं भी चले, तो मुझपर खास फर्क नहीं पड़ता है। हां, बुरा जरूर लगता है क्योंकि इतने सारे लोगों की मेहनत और समय बिताया हुआ होता है। हालांकि इसे लेकर बैठना सही नहीं, मूव ऑन करना पड़ता है। उतार-चढ़ाव तो हर किसी की जिंदगी का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर आप बहुत वोकल रही हैं। हाल ही में आपने बॉडी शेमिंग पर एक विडियो शेयर किया था। सोशल मीडिया पर केवल महिलाओं पर ही इतने प्रेशर क्यों होते हैं। कोई नहीं देखता कि मर्दों की कैसी तोंद निकली हुई है। महिलाओं को हमेशा टिपटॉप रहना है। क्यों इतना दवाब है? यही तो सोसायटी का अन्यायपूर्ण रवैया है। जेंडर इनइक्वालिटी आपको सोशल मीडिया पर भी दिख जाएगी। इसलिए मैंने यह विडियो बनाया ताकि मैं उनकी आवाज बन सकूं और जो फॉलो करते हैं, वो थोड़ा बदलें।

 

 

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