इतना भी मुश्किल नहीं डर को हराना

जीत शब्द जितना सच्चा है, डर की भावना भी उतनी ही सच है। जिंदगी में हर कोई जीतना चाहता है। मगर हारने का डर कहीं न कहीं हमारा पीछा कर रहा होता है। बेशक दुनिया के सामने हम इसका इजहार नहीं करते, मगर सच्चाई ये है कि हम सभी किसी न किसी स्तर पर तमाम तरह के डर से घिरे हुए हैं। इन्हें हराना मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन नामुमकिन बिल्कुल नहीं है।जिंदगी में आप कितने भी बहादुर हों, आपका नजरिया कितना भी सकारात्मक हो कुछ चीजों को लेकर डर हमेशा हमें घेरे रहता है। किसी को अपने प्रियजनों को खोने का डर, किसी को नौकरी खोने का डर, किसी को बीमारी का डर तो किसी को परीक्षा में फेल हो जाने का डर। ये डर जाने-अनजाने ही हमारी जिंदगी को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। जिंदगी में तरक्की करने के लिए इन डर को हराना बेहद जरूरी है। खतरा बहुत वास्तविक चीज है, पर डर एक चुनाव है-एक ऐसा चुनाव, जो हम सब अपने जीवन में कभी न कभी करते हैं। डर सभी जीवित लोगों की बुनियादी प्रतिक्रिया है, इसका कोई अपवाद नहीं है। हम सबसे बुरी संभावनाओं के बारे में भरोसा करते हैं इसलिए हम भविष्य के बारे में भयभीत रहते हैं। हम बदलाव से भी डरते हैं और अपने कंफर्ट जोन में रहना चाहते हैं। सबसे अच्छी बात-डर स्थायी नहीं होता और आप कुछ छोटे-छोटे कदम उठाकर इससे लड़ सकते हैं।
महसूस करना सीखें
जब भी डर लगे तो महसूस करें, क्योंकि हम इसे भगा सकते हैं। हमारा दिमाग स्थितियों को उससे भी खराब तरीके से व्याख्या करता है, जितनी कि वे हैं। इससे उबरने के लिए सबसे बुरी संभावनाओं का अपने पक्ष में इस्तेमाल करें और इससे उबरने के बारे में सोचें। हम अनजानी चीजों से डरते हैं, क्योंकि हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा नहीं होता। डर का भरोसे के साथ सामना करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके प्रति कुछ क़दम उठाना और भी महत्वपूर्ण है।
लक्ष्य दोबारा निर्धारित करें
ऑफिस में सालभर के लक्ष्य एक साथ निर्धारित कर, फिर उन्हें प्राप्त न कर पाने से बेहतर है कि आप शॉर्ट टर्म लक्ष्य निर्धारित करें और अपने उद्देश्यों को दोबारा तय करें। अपने लक्ष्य को थोड़ा बड़ा बनाएं और कुछ नया सीखने को भी इसमें शामिल कर लें और इससे आप तकनीकी रूप से कभी असफल नहीं होंगी, क्योंकि कुछ न कुछ नया सीखने को होगा ही। हम अक्सर बड़े लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह सही भी है। मगर किसी भी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति का रास्ता छोटे-छोटे प्रयासों से होकर जाता है। एक साथ कुछ भी नहीं प्राप्त हो सकता। जो भी लक्ष्य आपने तय किया है, उसके कुछ छोटे-छोटे कदमों का खाका तैयार करें, फिर उन्हें हासिल करने के लिए योजना बनाएं। सही रणनीति आपके लिए कारगर साबित होगी। योजनाबद्ध तरीके से की गई कोई भी तैयारी निश्चित ही सफलता दिलाती है।
मदद मांगें
हममें से अधिकतर लोग सोचते हैं कि यदि हमने मदद मांगी तो हम कम योग्य नजर आएंगे, पर हम भूल जाते हैं कि जब हम किसी से मदद मांगते हैं तो हम उसे उनकी कुशलता के लिए सम्मान देते हैं। भरोसे के योग्य किसी व्यक्ति से अपने डर पर चर्चा करें। विशेषज्ञ आपको बताते हैं कि आप इस डर से कैसे उबरें। इससे आपको कम नहीं आंका जाएगा। कुछ लोग दूसरों के सामने मदद इसलिए मांगने से भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह छोटे हो जाएंगे। उनका अहम भाव जरूरत के वक्त मदद मांगने से उन्हें रोक देता है। अगर आप भी कभी इस असमंजस की स्थिति से गुजरें तो जरा सोचिएगा कि जब हम दूसरों की मदद करने के लिए आगे रहते हैं तो मदद अपनी जरूरत के वक्त मदद मांगने में संकोच कैसा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *