भरतपुर में पटरियों पर ही मनाया गया कर्नल बैंसला के बेटे विजय का जन्मदिन

समझाइश करने पहुंचे अधिकारी खाली हाथ लौटे

भरतपुर (निसं.)। आरक्षण की मांग को लेकर भरतपुर के पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक जाम कर बैठे गुर्जरों के बीच मंगलवार देर रात कर्नल बैंसला के बेटे विजय बैंसला का जन्मदिन मनाया गया। इस दौरान कर्नल बैंसला और विजय बैंसला दोनों पटरियों पर ही धरने पर बैठे थे। गुर्जर पिछले 4 दिनों से रेलवे ट्रैक जाम करके धरने पर बैठे हैं।इससे पहले मंगलवार देर रात आईएएस नीरज के पवन समझाइश करने के लिए पीलूपुरा पहुंचे थे। वहां उन्होंने कर्नल बैंसला की मौजूदगी में समाज के लोगों से गुर्जरों की विभिन्न मांगों पर सरकार की सहमति बताते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की थी। इस दौरान समाज के लोग सरकारी भर्तियों में बैकलॉग व मृतकों को नौकरी व मुआवजा की मांग पर अड़े रहे। ऐसे में करीब 40 मिनट तक ट्रैक पर रुके रहे नीरज के. पवन वापस जयपुर के लिए रवाना हो गए।
नीरज के पवन ने कहा कि जो भी आपकी मांग है, उन मांगों से सरकार को अवगत कराऊंगा और जो भी कमी रह गई है, उन्हें दूर करवाया जाएगा। नीरज के. पवन ने कहा कि अधिकतर मांग पुरानी ही और सरकार गुर्जरों के पक्ष में खड़ी हुई है। जो भी वाजिब मांग हैं, उन्हें पूरा करने के लिए सरकार कटिबद्ध है। आईएएस अधिकारी से गुर्जर समुदाय से बातचीत के बाद कर्नल बैंसला ने समाज के लोगों की राय जानी, लेकिन आंदोलनकारी ट्रैक से हटने को राजी नहीं हुए।
पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे गुर्जर आंदोलनकारियों को हटाने की मांग को लेकर मंगलवार को नहरा क्षेत्र के 80 गांवों के प्रमुख पंच-पटेल हिंडौन आए। लेकिन बैंसला के घर पर नहीं मिलने की जानकारी होने पर वापस लौटना पड़ा। इस प्रतिनिधिमंडल में वे लोग भी शामिल थे, जो कि सरकार के साथ गुर्जर समझौता कर वापस लौटे थे और आंदोलन नहीं करने की मांग की थी। एक तरह से यह गुर्जरों का दूसरा गुट है।प्रतिनिधिमंडल में शामिल अतर सिंह ने बताया कि 30 अक्टूबर को सरकार के साथ 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर वार्ता के लिए गया था। उस दौरान वार्ता कर गुर्जरों की विभिन्न मांगों पर समझौता हो गया। इसके बावजूद कर्नल बैंसला ने आंदोलन शुरू करते हुए एक नवंबर को रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। इससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर कर्नल बैंसला को समझौता पत्र में कुछ संशय है तो सरकार के साथ बातचीत के द्वार खुले हुए हैं। ऐसे में आंदोलन समाप्त करवाने की मांग को लेकर पहले पंच-पटेलों की बैठक बयाना में हुई थी और उसके बाद कर्नल बैंसला से मिलने का निर्णय लिया। प्रतिनिधिमंडल हिंडौन के आरओबी के पास पहुंचे ही थे कि उन्हें बैंसला गाड़ी से कहीं जाते हुए दिखाई दिए। जिस पर सभी लोग वापस लौट गए।कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला का मंगलवार को 50 वां जन्मदिन था। आंदोलन के कारण ट्रैक पर जमे होने के चलते उन्होंने अन्य आंदोलनकारियों के साथ ही अपना जन्मदिन मनाया। इस दौरान कर्नल बैंसला भी मौजूद रहे। विजय बैंसला ने केक काटकर जन्मदिन मनाया और सभी को केक बांटा।

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