ऑनलाइन खाना मंगाना पड़ेगा महंगा, सिंगल यूज प्लास्टिक बैन से बढ़ेगी लागत

 

नई दिल्ली। देश में खानपान की चार लाख करोड़ की इंडस्ट्री में फूड डिलिवरी बिजनस की रफ्तार काफी तेज रही है। हालांकि, इस महीने से सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पाबंदी लगने से इस सेगमेंट की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है। देश में 50 से अधिक रेस्ट्रॉन्ट चलाने वाली बीकानेर फूड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर एस एस अग्रवाल ने बताया, अगर 2 अक्टूबर को (सिंगल-यूज प्लास्टिक पर) बैन लगता है, तो हम कुछ समय के लिए डिलिवरी बंद कर सकते हैं। हम हर संभव विकल्प तलाश रहे हैं, लेकिन इन चीजों में समय लगता है। विकल्प मिलने के बाद ही हम डिलिवरी फिर से शुरू करेंगे।अग्रवाल ने कहा कि सस्ते प्लास्टिक को बंद करने से पहले उसका विकल्प देना भी जरूरी है। रेस्ट्रॉन्ट चेन्स का कहना है कि अन्य मटीरियल महंगे हैं। वहीं, फूड ऐग्रिगेटर्स ने बताया कि वे ईको-फ्रेंडली विकल्प ढूंढऩे के लिए स्टार्टअप्स के साथ काम कर रहे हैं। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को सिंगल-यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने का ऐलान कर सकते हैं। पाबंदी लगने से बैग, कप, डब्बे, स्ट्रॉ जैसे पैकेजिंग मटीरियल का इस्तेमाल बंद हो जाएगा। देश के 18 राज्यों में प्लास्टिक कैरी बैग पर बैन लगा हुआ है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में सिंगल-यूज प्लास्टिक प्लेट, चम्मच, कप, स्ट्रॉ के इस्तेमाल पर भी पाबंदी है।रेस्ट्रॉन्ट चेन्स ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि प्लास्टिक जैसा सस्ता मटीरियल नहीं मिलने पर सब्जियों-दूध आदि की डिलिवरी का खर्च तीन-चार गुना बढ़ सकता है।अभी विकल्प के तौर पर मिट्टी के बर्तनों और मोटे कागज या दोबारा इस्तेमाल होने लायक महंगे प्लास्टिक से बने डिब्बों पर विचार किया जा रहा है। रेस्ट्रॉन्ट चेन काइलिन के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ खानिजो ने बताया, ‘डिलिवरी के लिए पैकेजिंग की लागत दोगुनी हो जाएगी। इसका असर हमारे मुनाफे और कुछ हद तक ग्राहकों पर पड़ेगा।’ जापानी व्यंजनों के लिए मशहूर काइलिन खोई (गन्ने का फाइबर) से बने कंटेनर का इस्तेमाल करने की सोच रही है।

पैकेजिंग की जिम्मेदारी रेस्ट्रॉन्ट्स की
मौजूदा हालात में रेस्ट्रॉन्ट पैकेजिंग की अधिक लागत की भरपाई ग्राहकों से नहीं की जा सकती। पिछले वित्त वर्ष में इंडस्ट्री को इनपुट टैक्स क्रेडिट बचाने में मिली असफलता के कारण लगभग 20,000 यूनिट्स बंद हुई थीं। डिलिवरी प्लेटफॉर्म के डिस्काउंट देने से भी उन्हें नुकसान हुआ था।

स्विगी और जमैटो ने बताया कि ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग की जिम्मेदारी रेस्ट्रॉन्ट्स की है, लेकिन ऐग्रिगेटर्स विकल्प ढूंढने में उनकी मदद कर रहे हैं। जमैटो ने बताया कि वह रिसर्च क्षेत्र में काम करने वाली स्टार्टअप्स और कंपनियों की मदद ले रही है। स्विगी के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि उसने अपनी पैकेजिंग असिस्ट वेंचर की मदद से बैग, स्ट्रॉ, चम्मच के कुछ ऑप्शन ढूंढे हैं। उसने अपने पार्टनर रेस्ट्रॉन्ट्स को इसे मुहैया कराया है।

 

 

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