भारत ने कहा बातचीत करनी हो तो पहले आतंकवाद रोको

न्यूयॉक, 16 अगस्त(एजेन्सी)। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मसले पर भारत को गलत साबित करने की पाकिस्तान और चीन की कोशिश शुक्रवार को नाकाम हो गई। इस बैठक के बाद यूएन में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि अनुच्छेद 370 के मामले में भारत की जो स्थिति पहले थी, वही बरकरार है। यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मसला है और इसका कोई बाहरी संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मसला पूरी तरह आंतरिक है और यह फैसला वहां के लोगों के विकास के मकसद से लिया गया है। अकबरुद्दीन ने साफ किया कि अगर पाकिस्तान को बातचीत करनी हो तो पहले आतंकवाद रोके। यूएन में 54 साल बाद कश्मीर मसले पर चर्च हुई। अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान जिहाद की बात करके हिंसा को भडक़ा रहा है। अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए वह आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, कोई लोकतांत्रिक देश ऐसा नहीं करता है। हम पाकिस्तान से बात तब करेंगे, जब वह आतंकवाद खत्म कर देगा। पहले आतंकवाद बंद करो और फिर बातचीत होगी। अकबरुद्दीन ने कहा कि अनुच्छेद 370 का मसले का कोई बाहरी संबंध नहीं है। हाल में जो फैसला लिया गया है, उसके पीछे भारत सरकार का मकसद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए सुशासन, समाजिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है। हम धीरे-धीरे प्रतिबंधों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत के भीतर बदलाव किए गए हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हमारी बाहरी सोच और मकसद बदल गया है। हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि जम्मू-कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण रहें। चीन और भारत के प्रतनिधियों ने भी बैठक के बाद मीडिया से बातचीत की। यूएन में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि यह पहला कदम है, आखिरी नहीं। बैठक से पहले रूस ने कहा था कि हम भारत के उस नजरिए का समर्थन करते हैं, जिसमें कश्मीर को भारत-पाक का द्विपक्षीय मसला कहा गया है। इससे पहले पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यूएन को पत्र लिखकर भारत के कश्मीर को लेकर लिए गए निर्णय पर तत्काल एक सत्र बुलाने का अनुरोध किया था। चीन ने पाक का साथ देते हुए इस मामले पर गुप्त बैठक की बात कही थी। चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। यूएन रिकॉड्र्स के मुताबिक सुरक्षा परिषद ने पिछली बार जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर 1965 में चर्चा की थी। 16 जनवरी 1965 के एक पत्र में यूएन में पाक के प्रतिनिधि ने कश्मीर पर तत्काल बैठक बुलाने के लिए कहा था। इसमें भी कश्मीर के विशेष दर्जे को लेकर ही शिकायत की गई थी।

भारत के कदम को संवैधानिक बता चुका है रूस

चीन की यात्रा से लौटने के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने यूएनएससी में पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया था। दूसरी तरफ परिषद के एक और स्थायी सदस्य रूस ने भारत के कदम को संवैधानिक बताया था। उसने कहा था कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसी तरह से सुलझाया जाना चाहिए। संयुक्त अरब अमीरात ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला कहा था।

किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन नहीं कियारू भारत

पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की लगातार कोशिश करता रहा है और वह इस मामले में विश्व समुदाय को शामिल करने का प्रयास करता रहा है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के कदम से न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरा उत्पन्न हुआ है। हालांकिए भारत ने स्पष्ट किया था कि यह उसका आंतरिक मामला है और उसने किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया है।

 

 

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