नए सिरे से तैयार हो रही है PCPIR नीति, केंद्र की होगी बड़ी भूमिका

नई दिल्ली। अमरावती पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोरसायन निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) नीति को पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। नए सिरे से तैयार नीति के तहत 2035 तक 20 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर भारत को पेट्रोलियम, रसायन, पेट्रोरसायन प्रसंस्करण और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने में केंद्र की बड़ी भूमिका होगी। पीसीपीआईआर नीति-2007 पूरी तरह विफल हो गई थी। इसमें खर्च का ज्यादातर बोझ राज्यों को वहन करना था। नयी नीति 2020-35 में पीसीपीआईआर की पूरी अवधारणा को नए सिरे से तैयार किया गया है। पुरानी नीति में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। इसके तहत प्रत्येक निवेश क्षेत्र के आकार को 250 वर्ग किलोमीटर से घटाकर विशेष क्लस्टर एकीकरण रणनीति के साथ 50 वर्ग किलोमीटर किया जा रहा है।पीसीपीआईआर को राष्ट्रीय संरचना पाइपलाइन से जोडऩे से इसे काफी प्रोत्साहन मिल सकता है। 2007 में तैयार नीति में भारी शुरुआती पूंजीगत लागत की वजह से प्रस्तावित परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। समझा जाता है कि नयी नीति के तहत सरकार पीसीपीआईआर की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कोष में करीब 20 प्रतिशत तक की कमी के लिए वित्तपोषण यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) उपलब्ध कराएगी।इसके अलावा सरकार स्मार्ट और सतत प्रणालियां मसलन एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन, तत्काल आधार पर पर्यावरणीय निगरानी प्रणाली तथा आपात प्रतिक्रिया प्रणाली आदि के लिए 20 प्रतिशत का अतिरिक्त बजटीय आवंटन भी उपलब्ध करा सकती है। वीजीएफ के जरिये प्रत्येक परियोजना करीब दो लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटा सकती है। आंध्र प्रदेश सरकार में विशेष मुख्य सचिव रजत भार्गव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने हाल में नयी पीसीपीआईआर नीति 2020-35 का मसौदा तैयार किया है और इसे केंद्रीय रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग को सौंपा है।पीसीपीआईआर नीति-2007 में पेट्रोलियम निवेश क्षेत्रों को विकसित करने का बोझ संबंधित राज्यों को वहन करना था। वहीं नयी नीति में इसका ज्यादातर बोझ केंद्र को उठाना होगा।केंद्र का अगले पांच साल में 100 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन का लक्ष्य है। समिति ने राष्ट्रीय संरचना पाइपलाइन के तहत पीसीपीआईआर परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर वित्तपोषण सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है।

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