कोरोना काल में सतर्क रहें गर्भवती महिलाएं

कोरोंना वायरस का यह दूसरी लहर बहुत तेजी से फैल रही है एवं घातक है। गर्भवती महिलाओं को कोरोना वायरस का खतरा अधिक रहता है। अपने और गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा के लिए गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता की जरूरत है।
कोरोंना वायरस के लक्षणों में सूखी खांसी, शरीर दर्द, कमजोरी, तेज बुखार, थकान, ?गंध महसूस न होना, आंखों का लाल हो जाना, डायरिया होता है। संक्रमण होने पर संक्रमित मरीजों को सांस लेने की गंभीर बीमारी का अनुभव होता है।
गर्भवती महिला में स्वाभाविक रूप से कम इम्यूनिटी होती है यानी उस समय उनकी रोगों से लडऩे की क्षमता कम होती है। यह वायरल संक्रमण के प्रति उसे अधिक संवेदनशील बनाता है।
गर्भवती महिलाओं को इस समय घर पर ही रहना चाहिए। संभव हो तो सार्वजनिक परिवहन जैसे बस या ट्रेन में न जाएं। यथासंभव घर से की काम करें। तीसरी तिमाही चल रही है तो आपको बिलकुल भी सार्वजनिक जगहों पर नहीं जाना चाहिए।
घर में अगर कोई बाहरी व्यक्ति आता है तो उस व्यक्ति से उचित दूरी बना कर रखें। बाहर से कुछ भी सामान आए तो सबसे पहले उस सामान को अच्छे से धुलने के बाद ही प्रयोग में लाए।
गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच के लिए डॅाक्टर के पास जाना पड़ता है। इस समय उन्हीं अस्पतालों में जाएं जहां कोरोना के मरीजों का इलाज न चल रहा हो। बाहर निकलते समय मास्क अवश्य लगाएं। अपने साथ सैनेटाइजर रखें जिससे हाथों को हमेशा सैनेटाइज करती रहें।
इस दौरान खान-पान की आदतों को सुधारते हुए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर भी संक्रमण से बचा जा सकता है। गर्भवती महिलाएं खान-पान में भरपूर रूप से विटामिन सी, बी 2, क्च6, डी तथा एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा को शामिल करें। प्रोटीन वाली चीजों का सेवन करें। हल्के गुनगुने पानी का प्रयोग उचित मात्रा में करें। चाय, कॉफी और तली भुनी चीजों के सेवन से दूर रहने की आवश्यकता है। दिन में दो से तीन बार नमक के पानी का गार्गल तथा नाक और मुंह खोल कर भाप लें।
जब तक कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक हम सभी सावधानियां बरतें और कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें, जिससे हम भी सुरक्षित रहे और हमारे परिजन भी। दो गज दूरी मास्क है जरूरी।

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