अपरेंटिस कानून में बदलाव की तैयारी, कंपनियों को होगा फायदा

नई दिल्ली। नौकरी के दौरान प्रशिक्षण (अपरेंटिसशिप) से बडे पैमाने पर देश के युवाओं का कौशल विकास होगा। इसे देखते हुए अपरेंटिसशिप के लिए सरकार कानून में बडे बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि सरकार संसद के मानसून सत्र में अपरेंटिस कानून में बदलाव से जुड़े बिल को मंजूरी के लिए ला सकती है। सूत्रों का कहना है कि कौशल विकास मंत्रालय इस मुद्दे पर हितधारकों से राय-मशविरा कर रहा है। इस नए कानून में कंपनियों को 15 फीसदी अपरेंटिस स्टाफ लेने की मंजूरी दी जाएगी जो अभी 10 फीसदी ही है। इस बदलाव से कंपनियों को कुशल कामगार तैयार करने में सहूलियत होगी। साथ ही कर्मचारी पर खर्च घटाने में भी मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3000 करोड़ रुपये का आवंटन अपरेंटिस कार्यक्रम के लिए किया था। सूत्रों के मुताबिक उद्योगों को अब अप्रैंटिसशिप में शामिल युवाओं के पंजीकरण और प्रशिक्षण दस्तावेज को संभालकर रखने की जरूरत नहीं प़ड़ेगी। इसके लिए थर्ड पार्टी एग्रीमेंट के तहत अन्य कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी तरह, इस प्रक्रिया से गुजरने वाले युवाओं के लिए राष्ट्रीय अपरेंटिसशिप सर्टिफिकेट परीक्षा में बैठने की अनिवार्यता खत्म कर दी जाएगी। अब यह परीक्षा साल में दो बार जरूर होगी, लेकिन छात्रों को इनमें बैठने या नहीं बैठने की छूट होगी। एक साल में 20 लाख युवाओं को अप्रेंटिसशिप-अपरेंटिसशिप पहले सिर्फ मैन्यूफैक्चरिग तक सीमित था। इसके बाद सेवा क्षेत्र तक इसका विस्तार हुआ। नए कानून में इसका विस्तार व्यापर और वाणिज्य तक करने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए बदलावों सेअपरेंटिसशिप के लिए बेहतर इकोसिस्टम तैयार होगा और युवाओं को रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होंगे। साथ सभी बदलावों के बाद देश में एक समय में 20 लाख से अधिक युवा अपरेंटिसशिप कर रहे होंगे। कंपनियों के लिए आसान होंगे नियम-प्रस्तावित अपरेंटिस कानून में कंपनियों के लिए नियम काफी सरल होंगे। कई तरह की जटिल प्रक्रिया से राहत के साथ दस्तावेजों को उन्हें सहेजने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही एक ही कैंपस में प्रशिक्षण की अनिवार्य शर्त भी नहीं होगी। इसके अलावा विदेश में यदि कंपनी का कारोबार है तो उसे वहां भी अपरेंटिसशिप के लिए युवाओं को भेजने की अनुमति होगी। छोटी कंपनियां साझेदारी में कराएंगी अपरेंटिसशिप। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नए प्रस्तावित कानून में छोटी कंपनियों के लिए खास प्रावधान हो सकते हैं। इसके तहत एक स्थान पर काम करने वाली छोटी कंपनियां जरूरत के मुताबिक मिलकर अपरेंटिसशिप करा संकेगी। इससे उनके खर्च में कमी आएगी। साथ ही अन्य तरह के फायदे भी होंगे।

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