कुलपतियों से बोले राष्ट्रपति, परिसर अभिव्यक्ति का पोषण करने वाले स्थान के रूप में उभरें यह आपका दायित्व

 

नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (एजेंसी)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को कहा कि विश्वविद्यालयों को देश के समक्ष उत्पन्न विशिष्ट चुनौतियों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ उच्च शैक्षणिक संस्थानों को मुक्त विचारों, अभिव्यक्ति का पोषण करने वाले स्थान के रूप में उभरना चाहिए। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विवादास्पद संशोधित नागरिकता कानून को लेकर जामिया मिल्लिया इस्लामिया एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला। केंद्रीय विश्वविद्यालयों, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान आईआईएस ईआर तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरू के निदेशकों एवं कुलपतियों की बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं उच्च शैक्षणिक संस्थानों को हमारे देश और समाज के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। कोविंद ने कुलपतियों से कहा, इनमें से अनेक चुनौतियों के लिये रचनात्मक एवं नवोन्मेषी समाधान की जरूरत है। यह आपका सर्वोपरि दायित्व है कि परिसर मुक्त विचारों, अभिव्यक्ति का पोषण करने वाले स्थान के रूप में उभरें, जहां प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाए और विफलता की आलोचना की बजाए सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाए। कोविंद ने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसा प्रयोगशाला बनना चाहिए जहां उन्हें ऐसी समस्याओं से रूबरू होने का मौका मिले जिनका राष्ट्र निर्माण में समाधान निकालने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छात्रों को विशिष्ट सामुदायिक भाव के साथ अकादमिक और पाठ्येतर कार्यों के लिये प्रोत्साहित करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा, मुझे यह पता है कि विश्वविद्यालय इस बारे में सजग हैं और इस दिशा में जरूरी कदम उठा रहे हैं, लेकिन हमें आत्म चिंतन करने की जरूरत है कि क्या हम पर्याप्त एवं सामयिक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आपके संस्थानों में पर्याप्त लैंगिक संतुलन हो, खासकर शिक्षक संवर्ग में। राष्ट्रपति ने कहा कि नामांकन के लिये अकादमिक कैलेंडर का सख्ती से पालन, कक्षा, परीक्षा का आयोजन और परिणाम की घोषणा तथा डिग्री प्रदान करने के लिये दीक्षांत समारोह जैसे छोटे-छोटे कदम उत्कृष्टता की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिये कदम उठा सकते हैं। राष्ट्रपति भवन में ‘5वें विजिटर पुरस्कार प्रदान करने के एक अन्य कार्यक्रम में कोविंद ने कहा कि अकादमिक समुदाय और स्थानीय उद्योग के बीच अर्थपूर्ण संबंध को विश्वविद्यालयों को शीर्ष प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

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