जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव ने की बजट घोषणाओं की प्रगति समीक्षा

जयपुर, 6 नवम्बर (कासं.)। जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने बुधवार को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2019-2020 के बजट में प्रदेश में पेयजल योजनाओं के सम्बंध में की गई घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की। जलदाय विभाग की 16 बजट घोषणाओं में से 9 घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्त विभाग की स्वीकृति आवश्यक थी, जबकि 7 घोषणाओं की क्रियान्वित के लिए विभागीय स्तर पर पालना की जानी थी। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश के 1250 फ्लोराईड प्रभावित गांवों में डी-फलोरिडेशन यूनिट लगाने, 2000 स्थानों पर सौर ऊर्जा नलकूप बनाने एवं 390 बड़े गांव, जिनकी आबादी 4000 से अधिक है, इनमें पाईप योजना लागू करने की बजट घोषणाओं के लिए अतिरिक्त बजट की सैद्धान्तिक सहमति वित्त विभाग द्वारा गत 17 अक्टूबर को जारी की गई है। इसके अतिरिक्त नागौर जिले की तीन शहरी योजनाओं मेड़ता, डेगाना व लाडनू के लिए भी अतिरिक्त बजट की सहमति वित्त विभाग द्वारा गत 04 नवम्बर को जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इन सभी घोषणाओं की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियाँ जलदाय विभाग द्वारा जारी कर निविदाएं आमंत्रित करने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है। बैठक में जानकारी दी गई कि विभाग द्वारा आठ योजनाओं यथा चम्बल से अलवर पानी लाने, ईसरदा बांध से दौसा, सवाईमाधोपुर को पेयजल आपूर्ति, नागौर की शेष रही 244 ढ़ाणियों की पेयजल योजना, बीकानेर शहर व 32 गांवों की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, चम्बल-भीलवाड़ा योजना से हिण्डौली के शेष रहे 284 गांवों को पेयजल, जोधपुर-दांतीवाड़ा से सोजत के 10 गांवों को पेयजल, 114 गांवों को कुम्भाराम लिफ्ट से पेयजल की डीपीआर बनाने की स्वीकृतियाँ जारी कर डीपीआर बनाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। इसके अलावा जोधपुर शहर व जोधपुर तथा बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्रों को राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना के तृतीय चरण से पेयजल आपूर्ति के लिए 1454 करोड़ रूपये का बजट एडीबी से वित्त पोषण करवाकर, क्रियान्वित करने की बजट घोषणा की गई थी। इस सम्बंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गत अगस्त माह में आयोजित बैठक में दिए गए निर्देशों की पालना में प्रस्ताव वित्त विभाग को ऑनलाईन भारत सरकार को अग्रेषित करने के लिए प्रस्तुत कर दिए गए। वित्त विभाग द्वारा गत 30 अक्टूबर को एडीबी के स्थान पर द्विपक्षीय बाह्य सहायता यथा जायका, एएफडी. इत्यादि से ऋण प्राप्त करने का सुझाव दिया गया। बैठक में प्रमुख शासन सचिव वर्मा ने इस सम्बंध में मुख्य अभियन्ता को वित्त विभाग की राय अनुसार कार्यवाही करने करने के निर्देश दिये।

 

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