हर 6 महीने में बदल जाते हैं रणवीर, इसलिए बोर नहीं होती दीपिका

पहले दिन ही उन्होंने सीन बदल दिया और दो-तीन पन्ने का भारी डायलॉग वाला सीन मेरे पास तब आया, जब मैं मेकअप कर रही थी। बॉलिवुड की टॉप स्टार दीपिका पादुकोण यूं तो निजी जिंदगी में अपने काम को लेकर चर्चा करना या उस पर विश्लेषण करना ज्यादा पसंद नहीं करतीं, लेकिन रविवार को जियो मामी मूवी मेला विद स्टार में वक्ता के तौर पर पहुंची दीपिका ने अपनी पांच बेहतरीन फिल्मों कॉकटेल, चेन्नै एक्सप्रेस, गोलियों की रासलीला: राम लीला, ये जवानी है दीवानी और पीकू में अपने परफॉर्मेंस पर बात की। वहीं, इन फिल्मों से जुड़े कुछ नए पन्ने भी खोले।

संजय भंसाली को खुश करना आसान नहीं

फिल्में चुनते वक्त नरेशन को सबसे अहम करार देने वाली दीपिका फिल्म ‘कॉकटेल’ की वेरोनिका को वह किरदार मानती है, जिसने ऐक्टर के तौर पर उन्हें बदला। दीपिका कहती हैं, ‘कॉकटेल से पहले तक मुझमें इंसान और कलाकार के तौर पर एक झिझक थी, वेरोनिका ने मुझे अपनी सारी झिझक दूर फेंकने का मौका दिया।’ वहीं, अपने पसंदीदा निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ अपनी फिल्म ‘राम लीला’ के अनुभव को साझा करते हुए दीपिका कहती हैं, ‘संजय सर के सेट पर कभी भी कुछ भी हो सकता है। मेरे साथ पहले दिन ही ये हुआ। पहले दिन ही उन्होंने सीन बदल दिया और दो-तीन पन्ने का भारी डायलॉग वाला सीन मेरे पास तब आया, जब मैं मेकअप कर रही थी। मैंने कहा कि सर, मैं नहीं कर सकती हूं। मुझे लाइंस याद करने के लिए दो-तीन दिन चाहिए, किसी और चीज से शुरू करते हैं, लेकिन वह बोले- नहीं तुम्हारे क्लोज अप से शुरू करते हैं। मुझे रोना आ गया कि मैं कैसे करूंगी, लेकिन मुझे करना पड़ा। संजय लीला भंसाली के साथ काम करते हुए आप कभी तैयारी नहीं कर सकते। अंग लगा दे.. गाना हमने दोबारा शूट किया, क्योंकि उन्हें कॉन्स्ट्यूम पसंद नहीं आया, लेकिन इन्हीं वजहों से उनके साथ काम करना बहुत ज्यादा एक्साइटिंग होता है। उनके साथ काम करने में काफी स्ट्रेस और प्रेशर होता है, लेकिन क्रिएटिव सैटिस्फैक्शन भी होता है। संजय सर जो पेपर पर लिखा है, उतना कर देने से खुश नहीं होते। उन्हें हैरान करना पड़ता है। जबकि, कुछ डायरेक्टर होते हैं, उन्हें वही चाहिए, जो उन्होंने लिखा है, जैसे कबीर खान या इम्तियाज अली। इम्तियाज के डायलॉग के साथ आप जरा भी छेड़छाड़ नहीं कर सकते। आप एक शब्द बदल नहीं सकते।

रोहित से कहा, मीनम्मा पर फिल्म बनाओ

फिल्म चेन्नै एक्सप्रेस के बारे में दीपिका ने बताया, पहले दिन मैं किरदार को पकड़ नहीं पा रही थीं, जिससे शाहरुख और रोहित बहुत नाखुश थे। मुझ पर काफी प्रेशर आ गया था, लेकिन मैं घर गई, रोल के बारे में सोचा और दूसरे दिन सब आ गया। शायद साउथ इंडिया में रहने का मेरा अनुभव काम आया। बाद में मैं जो भी करती थी, सब हंसते थे। मैंने रोहित से कहा भी कि मीनम्मा के किरदार पर कुछ सोचो या उसपर फिल्म बनाओ। वहीं, पीकू को अपनी फेवरिट फिल्म बताने वाली दीपिका उस फिल्म को दोबारा करने को भी तैयार हैं। बकौल दीपिका, पीकू और उसके पूरे एक्सपीरिएंस को मैं बहुत मिस करती हूं। अगर मुझे दोबारा यह फिल्म करने को मिले, तो मैं सिर्फ उस एक्सपीरिएंस को दोबारा जीने के लिए वह करूंगी। फिल्म में इरफान खान के साथ काम करना भी मेरे सबसे अच्छे अनुभवों में से है।

अगले साल करेंगी डार्क रोमांस फिल्म

दीपिका जल्द ही ऐसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी की जिंदगी पर आधारित फिल्म छपाक में नजर आएंगी, जिसे वह अपने करियर की सबसे मुश्किल फिल्म मानती हैं। दीपिका के मुताबिक, छपाक इमोशनली मेरी सबसे मुश्किल फिल्म है। इसका प्रॉसेस तो मुश्किल था ही कि तीन घंटे प्रोस्थेटिक मेकअप लगाना, फिर एक घंटा उतारना, लेकिन इमोशनली भी यह निचोड़ लेने वाली फिल्म थी। हमें हर प्रोस्थेटिक के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन मैंने मेघना से एक प्रोस्थेटिक पीस एक्सट्रा मंगाया था, जिसे पैकअप के बाद मैंने जला दिया, ताकि उस किरदार को मैं अपने अंदर से निकाल सकूं। मैंने उस प्रोस्थेटिक पीस को पूरी तरह जलते हुए देखा, तब कहीं उसका एक हिस्सा मेरे भीतर से निकल पाया। हालांकि, ऐसे किरदार कभी पूरी तरह आपके सिस्टम को नहीं छोड़ते।’ दीपिका ने यहां यह भी बताया कि अगले साल वह एक डार्क रोमांस फिल्म करने वाली हैं।

सेट पर पति-पत्नी जैसे बिहेव नहीं करते रणवीर और मैं

दीपिका पति रणवीर के साथ फिल्म 83 में भी दिखाई देंगी। वह कहती हैं, ‘मैंने एक एथलीट की जिंदगी देखी है और एक एथलीट की जिंदगी में परिवार के महत्व को देखा है, इसलिए मैंने यह फिल्म की। यह फिल्म 83 विश्वकप जीत के बारे में है, लेकिन दर्शकों को यह भी दिखेगा कि इसमें परिवार का सहयोग कितना अहम है।’ वहीं, पति रणवीर के साथ काम करने के अनुभव पर वह बताती हैं, ‘रणवीर और मैं सेट पर बहुत अलग होते हैं। जब हम साथ काम करते हैं, तब पति-पत्नी या बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड की तरह बर्ताव नहीं करते। ’83’ करते वक्त मैं यह नहीं सोचती थी कि वह मेरा पति है, क्योंकि सोचने के लिए सीन, लाइन बहुत कुछ होता है। आपका दिमाग उसमें लगा होता है। आप एक करैक्टर निभा रहे होते हैं, वहां आप खुद नहीं होते हैं।

अलग है रणबीर और रणवीर का ऐक्टिंग प्रॉसेस

दीपिका ने यहां अपने दो को-ऐक्टर्स रणबीर कपूर और रणवीर सिंह के बारे में भी बात की। बकौल दीपिका, दोनों बहुत ही सेंसिटिव और सेल्फलेस हैं, लेकिन ऐक्टर के तौर पर दोनों बहुत ही अलग हैं। रणबीर को मैंने कभी तैयारी करते हुए नहीं देखा, जो लाजवाब है। मुझे नहीं पता कि उसका मेथड या प्रोसेस क्या है? जबकि रणवीर का प्रॉसेस दिखता है। किरदार के साथ उसका वॉर्डरोब, कार, परफ्यूम सब बदल जाता है। अगर वह खिलजी है, तो वह सेट पर खिलजी की तरह चलेगा। वैसे ही बात करेगा। मैं मजाक करती हूं कि शायद यही वजह है कि हमारा रिलेशनशिप इतने साल चला, क्योंकि हर छह महीने में वह अलग इंसान होता है। (हंसती हैं)। मैं कभी बोर नहीं होती। रणवीर बहुत रिहर्स करता है। जबकि, रणबीर और मेरा प्रॉसेस एक जैसा है। हम बहुत ज्यादा रिहर्स नहीं करते हैं।’

 

 

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