इंदिरा गांधी नहर लाइनिंग कार्य के सैंपल फेल

जल संसाधन विभाग के अनेक अभियंताओं और दो ठेकेदार फर्मों पर एसीबी में प्रकरण दर्ज

श्रीगंगानगर, 1 जनवरी (का.सं.)। हनुमानगढ़ जिले में इंदिरा गांधी नहर मुख्य शाखा की बीते वर्ष लाइनिंग को पक्का करने के करवाए गए कार्य में लगभग डेढ़ करोड़ का घपला उजागर हुआ है। नहर के किनारों और पैंदे (बेड) को पक्का किए जाने के कार्य के दौरान एक शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(एसीबी) के उच्च अधिकारियों ने छापेमारी करवाई थी। इस कार्रवाई के दौरान नहर में दो स्थानों पर लगाई गई निर्माण सामग्री के सैंपल लिए गए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर एसीबी के जयपुर स्थित मुख्यालय में दो प्रकरण दर्ज किए गए हैं। एसीबी के सूत्रों के अनुसार दोनों स्थानों से लिए गए सैंपल एफएसएल जांच में निम्न स्तरीय साबित हुए हैं।दोनों प्रकरणों में आधा दर्जन से अधिक अभियंता नामजद किए गए हैं। यह प्रकरण दर्ज होने से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों में वर्ष के पहले दिन ही खलबली मच गई। एसीबी के सूत्रों के अनुसार 24-25 अप्रैल 19 की रात को हनुमानगढ़ जिले में सूरेवाला गांव के नजदीक इंदिरा गांधी नहर की मुख्य शाखा की आरडी 612-614 के बीच सीसी रिलाइनिंग कार्य और बेड में प्रयुक्त की गई सामग्री के नमूने लिए गए थे।प्रयुक्त किए गए मसाले-सीमेंट,बजरी, कंक्रीट में बजरी व कंक्रीट की मात्रा अनुपात से अधिक और सीमेंट की मात्रा कम मिलाया जाना एफएसएल रिपोर्ट में पाया गया है।इससे कार्य की गुणवत्ता निर्धारित मापदंड अनुसार ठीक नहीं होने के कारण घटिया पाई गई है। यह कार्य जी-शेड्यूल के मुताबिक नहीं करवा कर विभाग के अभियंताओं ने ठेका लेने वाली फर्म के साथ मिलीभगत कर अपने-अपने पदों का दुरुपयोग किया। एसीबी के सूत्रों के अनुसार घटिया निर्माण कार्य करवाकर इस कार्य की एवज में कंस्ट्रक्शन कंपनी को किए गए भुगतान से राज्य सरकार को 94 लाख 35 हजार 825 का नुकसान पहुंचाया गया है। इस जगह लिए गए के फेल हो जाने के लिए एसीबी ने दर्ज किए प्रकरण में केसरीलाल बेरवा अधिशासी अभियंता,सूरतगढ़ ब्रांच, जल संसाधन खंड (द्वितीय)श्रीविजयनगर, कमलेश कुमार मीणा सहायक अभियंता, जल संसाधन उपखंड बाजूवाला, श्रीविजयनगर, संदीप कुमार कनिष्ठ अभियंता कार्यालय सहायक अभियंता, जल संसाधन बिलोचिया उपखंड श्रीविजयनगर, अनिल कुमार कनिष्ठ अभियंता, कार्यालय सहायक अभियंता, जल संसाधन बाजूवाला उपखंड,श्रीविजयनगर और इस कार्य का ठेका लेने वाली फर्म मै. अशोक कुमार ठेकेदार मुक्तसर (पंजाब) के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पद के दुरुपयोग संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी प्रकार ब्यूरो की टीम ने अगले दिन 25 अप्रैल को हनुमानगढ़ जिले में ही खेतांवाली ढाणी के नजदीक इंदिरा गांधी नहर की मुख्य शाखा की आरडी 99 से 100 के मध्य रिलाइनिंग कार्य में लगाई गई सामग्री के सैंपल लिए थे। ब्यूरो के सूत्रों के अनुसार एफएसएल की रिपोर्ट में यह कार्य भी गुणवत्ता में अनुसार नहीं पाया गया। जी-शेडूयल के अनुसार निर्माण कार्य नहीं करने से ठेकेदार फर्म को किए गए भुगतान से राज्य सरकार को 52 लाख 96 हजार 916 की आर्थिक हानि हुई है। इस मामले में ब्यूरो ने सुभाषचंद्र बेदी अधिशासी अभियंता,घग्गर बाढ़ नियंत्रण एवं ड्रेनेज खंड हनुमानगढ़, रमेश कुमार शर्मा सहायक अभियंता और अभिनंदन कुमार कनिष्ठ अभियंता कार्यालय सहायक अभियंता आरडब्ल्यूएसआरएस (खंड द्वितीय) हनुमानगढ़ तथा ठेकेदार फर्म शिवजी सिंगला एंड संस सिरसा (हरियाणा) के विरुद्ध गिरोह के मुख्यालय में अभियोग पंजीबद्ध किया गया है।ब्यूरो ने 24 और 25 अप्रैल को दो जगहों पर किए गए रिलाइनिंग कार्य के सैंपल लिए थे, जिनमें करीब डेढ़ करोड़ का घपला उजागर हुआ है। एसीबी के स्थानीय सूत्रों के अनुसार अब इस मामले की विस्तृत जांच की जाएगी।जांच कार्य ब्यूरो की श्रीगंगानगर में स्थित चौकी के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र ढिढारिया को सौंपा गया है। उल्लेखनीय है कि ब्यूरो के जयपुर से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर 24-25 अप्रैल को राजेंद्र ढिढारिया और उनके साथ पुलिस उप अधीक्षक वेद प्रकाश लखोटिया ने तकनीकी विशेषज्ञों को लेकर इन दोनों स्थानों पर छापे मारे थे। 106 करोड से 36 जगह कार्य प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में भाजपा के पिछले शासनकाल के दौरान तत्कालीन जल संसाधन मंत्री डॉ रामप्रताप ने तत्कालीन केंद्रीय जल मंत्री नितिन गडकरी से प्रयास करके जर्जर हो रही इंदिरा गांधी नहर का जीर्णोद्धार करवाने की योजना मंजूर करवाई। योजना के तहत न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनबीडी) और जापानी वित्तीय संस्थान जायेका के माध्यम से 106 करोड रुपए का बजट मंजूर करवाया। यह राशि लोन के रूप में ली गई, जिसका 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र को और 30 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को बाद में चुकाना है। इस राशि से 36 जगहों पर नहर को पक्का किए जाने की योजना बनाई गई। इससे पहले कि भाजपा सरकार के शासनकाल में इस कार्य के टेंडर जारी हो पाते विधानसभा चुनाव आ गए। चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही इसके टेंडर जारी किए और काम शुरू करवाया।जब यह कार्य करवाया जा रहा था, उसी दौरान हनुमानगढ़ में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सुशील गोदारा ने निर्माण कार्य घटिया होने की शिकायत एसीबी के महानिरीक्षक दिनेश एमएन को विस्तारपूर्वक की। श्री गोदारा ने निर्माण कार्य की तस्वीरें और वीडियो भेजें। दिनेश एमएन ने हनुमानगढ़ की बजाय श्रीगंगानगर में ब्यूरो के अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। छापा पड़ते ही पानी छोड़ा जानकारी के अनुसार 24 अप्रैल की रात्रि लगभग एक बजे ब्यूरो की टीम ने आरडी 612- 614 के बीच जैसे ही सैंपल लेने की कार्रवाई शुरू की ठेकेदारों और अभियंताओं में हड़कंप मच गया। कुल 36 स्थानों पर यह कार्य अलग-अलग अभियंताओं की देखरेख में विभिन्न कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने किया था। इस कार्य के दौरान नहर में ही अलग-अलग स्थानों पर ठेकेदारों ने अपने उपयोग के लिए बंधे लगाकर पानी इक_ा किया था। पंजाब से करीब 25 दिनों की बंदी ली गई थी। पंजाब में नहर के हैड पर गेट बंद रखे गए थे। मगर जैसे ही 24 अप्रैल की रात छापे की कार्रवाई शुरू हुई, ठेकेदारों और अभियंताओं की मिलीभगत के चलते न केवल पंजाब से हैड के गेट ऊपर उठा दिए गए बल्कि नहर में जहां-जहां बंधे लगाकर पानी ठेकेदारों ने अपने उपयोग के लिए तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जलदाय योजनाओं के लिए एकत्रित किया हुआ था, एकाएक छोड़ दिया। इससे भी भारी नुकसान हुआ क्योंकि कई स्थानों पर खुद ठेकेदार नहर के अंदर से जेसीबी मशीनें व ट्रैक्टर आदि सामान नहीं निकाल पाए थे। डूब जाने से इस मशीनरी को नुकसान पहुंचा। सूत्रों के अनुसार पानी एकाएक इसलिए नहर में छोड़ा गया ताकि बाकी बाकी स्थानों पर एसीबी वाले सेंपलिंग नहीं कर सके। अब जब सैंपल की रिपोर्ट आई है, जिससे करीब डेढ़ करोड़ का घपला उजागर हुआ है तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी 34 जगहों पर भी निर्माण कार्य घटिया ही हुआ है। दो जगह पर अगर डेढ़ करोड कि गड़बड़ पकड़ी गई है तो इसी अनुपात में बाकी 34 जगह का आकलन किया जाए तो यह घपला कई करोड़ों का है।

 

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