संत बाबा रामसिंह ने दी हक के लिए शांत शहादत

श्रीगंगानगर , 17 दिसम्बर (का.सं.)। केंद्र सरकार द्वारा लागू 3 नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग करते हुए नई दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने में शामिल 65 वर्षीय संत बाबा रामसिंह द्वारा आत्महत्या कर लेने के शोक स्वरूप पदमपुर रोड स्थित गुरूद्वारा धन धन बाबा दीप सिंह शहीद में आज श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ की सिख जत्थेबंदियों की बैठक बाबा गुरपालसिंह चक 18 एफ वालों की अध्यक्षता में हुई। जिसमें सभी ने सामूहिक रूप से शोक व्यक्त करते हुए कहा कि संत बाबा रामसिंह ने धर्म की रक्षा और हक की लड़ाई के लिए शांत शहादत दी है। उनकी इस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। गुरूद्वारा के मुख्य सेवादार तेजेन्द्रपाल सिंह टिम्मा ने इस अवसर पर संत बाबा रामसिंह के जीवन पर प्रकाश डाला। टिम्मा ने कहा कि किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ चल रहे धरने में शामिल संत बाबा रामसिंह ने शहादत दी है, जिसे पूरा देश कभी नहीं भूल सकता। इस अवसर पर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए गुरूघर में अरदास की गई। शोक सभा में जीतसिंह लखिया, स्वर्णसिंह फौजी, सुखदेवसिंह, जसकरणसिंह गोलूवाला सिखान, तरसेमसिंह, सुखपालसिंह सरां, चाननसिंह, सर्दूलसिंह, सरपंच गुरमुखसिंह टोबी, सर्दूलसिंह, लखविन्द्रसिंह, कुलविन्द्रसिंह राजू, हरमिन्दरसिंह बुगलेयांवाली, संदीपसिंह मोरजंड आदि उपस्थित रहे।

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