शारदा युनिवर्सिटी का महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

नई दिल्ली, 3 फरवरी(एजेन्सी)। शारदा युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने ’21वीं शताब्दी में महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक-विधि चुनौतियां विषय पर 31 जनवरी को एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का प्रारंभ पूर्व प्रधान न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और गणमान्य व्यक्तियों के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उद्घाटन सत्र इस आयोजन का आकर्षण रहा जिसमें कानूनी क्षेत्र से ख्याति प्राप्त वक्ताओं और शारदा युनिवर्सिटी के शीर्ष अधिकारियों, स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रोफेसर प्रदीप कुलश्रेष्ठ ने अपने विचार रखे। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने महिला अधिकारों के बारे में अपने विचार रखे जिससे परिचर्चा समानता के उनके आदर्शों की ओर बढ़ी। न्यायमूर्ति मिश्रा ने ज़ोर दिया कि नागरिकों खासकर महिलाओं के अधिकार स्वाभाविक अधिकार हैं जिन्हें संविधान ने मान्यता दी है और इक्वीसवीं सदी में इसका कहीं अधिक महत्व है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने उच्चतम न्यायालय के कई बड़े फैसलों का हवाला देते हुए स्वाभाविकता और वैश्विकता के सिद्धांतों का भी जिक्र किया। हमेशा की तरह न्यायमूर्ति मिश्रा का भाषण हास्य का पुट लिये हुए था जिसे श्रोताओं ने ध्यान से सुना। तीन तलाक मामले में याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता डॉक्टर चंन्द्रा रंजन ने घर की किलाबंदी के जरिये एक बेहतर समाज के निर्माण के अपने अनुभव साझा किए। वहीं इससे जुड़ी भावनाओं को माननीय चांसलर पीके गुप्ता ने साझा किया। चांसलर ने लड़कियों की शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यदि लड़कियां शिक्षित होंगी जो पूरा समाज अपने आप शिक्षित हो जाएगा। इस संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में 75 से अधिक परिपत्र प्रस्तुत किए गए। इस संगोष्ठी का संयोजन डॉक्टर उर्मिला यादव और डॉक्टर रितु गौतम ने उत्साही विद्यार्थियों और शोध छात्र-छात्राओं के सहयोग से किया। यह आयोजन विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए भागीदारों के लिए एक अवसर साबित हुआ। इसमें आर्थिक नीतियों के संबंध में विचारों और विशेषज्ञता का आदान प्रदान किया गया और जमीनी स्तर पर नयी चुनौतियों का कैसे सामना किया जाए, इस पर भी चर्चा की गई।

 

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