जेइसीआरसी में हुआ पांच दिवसीय ‘स्ट्रेस एंड एंगर मैनेजमेंट पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम 

जयपुर (कासं.)। राजस्थान टेकनीकल यूनिवर्सिटी, TEQ IP – III और जयपुर इंजीनियरिंग कॉलेज सीतापुरा के संयुक्त तत्वाधान से पांच दिवसीय ‘स्ट्रेस एंड एंगर मैनेजमेंट पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम 15 दिसंबर से 19 दिसंबर को ऑनलाइन आयोजित किया गया। JECRC  यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अमित अग्रवाल ने सभी अतिथियों का  स्वागत किया और कहां बहुत खुशी है मुझे इस कार्यक्रम का हिस्सा बन कर, कोरोना काल में हमारे आस पास नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो गई है, ऐसे में इस तरह के  कार्यक्रम हमे पॉजिटिव एनर्जी देते हैं  साथ ही सही दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते हैं। यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने कहाँ की इस तरह के कार्यक्रम शिक्षकों को तकनीकी लाभ के साथ साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक ज्ञान देते है जो की जरूरी है स्ट्रेस फ्री जिंदगी जीने के लिए। कार्यक्रम में देवी चित्रलेखा, सिस्टर उषा, डॉ. सुरेश गुप्ता, सिस्टर चन्द्रकला, राजयोग बी के सूर्या, डॉ. अवदेश शर्मा, बालकिशोर, डॉ. मोहित गुप्ता, डॉ. इ वी स्वामीनाथन, बीके  इ वी गिरीष ने  भी अपने विचार व्यक्त किए।  देवी चित्रलेखा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहाँ की  स्ट्रेस और एंगर दो ऐसे शब्द है जिन्हें हमने अपनी जिंदगी में जोड़ लिए हैं, की ये हमारी लाइफ में होंगे।   और हमको इसे मैनेज करना पड़ेगा पर जरूरी बात ये हैं की हम समझे की ये उत्पन्न कहाँ से हो रहे हैं  और जड़ से हटाने का इसे प्रयास किया जाए ना की मैनेज करने का साथ ही जरूरी है ये बात समझना की हम सब अलग है हमारी सोच अलग हैं हमें ये कोशिश नहीं करनी चाहिए की हम सबको अपनी तरह बनाए। मशहूर अभिनेता और आध्यात्मिक वक्ता सुरेश ओबेरॉय ने कार्यक्रम की सराहना की और कहां मैं आप सभी को  शुभकामनाएं देता हूँ इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जो की बहुत जरूरी है आज की रोजमर्रा की ज़िंदगी के लिए। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहाँ की एक बच्चा वहीं  सीखता हैं  जो अपने आस पास देखता हैं, उन्हीं विचारों और संस्कारों के साथ बड़ा होता है इसलिए कहते है जैसे संस्कार आज हम अपने बच्चों को देंगे वैसा ही संसार कल हमें दिखेगा। स्ट्रेस के बारे में बताते हुए सुरेश ओबेरॉय जी ने कहाँ की दिन भर में हमारे मन में कई तरह के विचार आते हैं कई अच्छे कई बुरे अगर हम अच्छे विचारों के बारे में सोचेंगे तो हमें अच्छा लगेगा, हम ये सोच ले मुझे मुस्कुराना है तो चाहे कोई भी बात हों मैं मुस्कुराऊंगा और बुरे विचारों को नजऱअंदाज़ करूँगा और इस से अपने आप स्ट्रेस दूर भाग जाएगा।

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