जिंदगीभर के लिए अपाहिज बना सकता है आत्महत्या का प्रयास

आत्महत्या प्रयास करने वाले लोग जिंदगीभर के लिए अपाहिज बन सकते हैं। आंकड़ों से पता चला है कि आत्महत्या का प्रयास करने वाले 96 फीसदी लोग सफल नहीं हो पाते हैं और इनमें से अधिकतर जीवन भर के लिए अपंग हो जाते हैं। कुछ लोग चलने-फिरने लायक भी नहीं रहते।
राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आर.पी बेनीवाल का कहना है कि अगर कुछ लक्षणों पर गौर किया जाए तो अवसाद में रह रहे लोगों को आत्महत्या के प्रयास से रोका जा सकता है।एक खुदकुशी 135 लोगों की जिंदगी प्रभावित करती है :एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर नंद कुमार ने लेंसेंट जर्नल की साल 2016 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल 2.3 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यह संख्या सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या से लगभग दोगुनी है।उन्होंने बताया कि जितने लोग भारत में आतंकवाद और नक्सली हिंसा में मारे जाते हैं उससे कई सौ गुना लोगों की मौत आत्महत्या की वजह से होती है। प्रोफेसर नंद के मुताबिक यह देखा गया है कि एक व्यक्ति की आत्महत्या से उसके परिवार और दोस्तों समेत औतसन 135 लोग प्रभावित होते हैं। किशोरों की ओर से दी जा रही आत्महत्या की धमकियों को  खुद को नुकसान पहुंचाने या किसी अंग को काटने वाले व्यक्ति को  पहले आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोग  अपनी जमीन या महत्वपूर्ण चीजों को दूसरों के सुपुर्द करना या इसके बारे में अचानक जानकारी देना
इन भ्रम और हकीकत को जरूर जानिए
मिथक – जो आत्महत्या के बारे में बात करते हैं, उनके इस पर अमल करने की गुंजाइश बहुत कम होती है।
हकीकत : प्रोफेसर बेनीवाल के मुताबिक, जो लोग धमकी देते हैं, वे उनके मुकाबले आत्महत्या करने की आशंका बहुत ज्यादा होती है, जो इस बारे में बात नहीं करते। ऐसे लोगों से बात करें, उन्हें नजरंदाज न करें।
मिथक : जो लोग एक बार आत्महत्या की कोशिश कर चुके हैं, वे इस गलती से सीख लेते हैं और उनके दोबारा ऐसा करने की आशंका कम होती है। हकीकत: जो शख्स आत्महत्या की नाकाम कोशिश कर चुका है, अन्य लोगों के मुकाबले उसके दोबारा ऐसा करने की संभावना ज्यादा होती है। मिथक : मानसिक रूप से बीमार लोग ही खुदकुशी करते हैं।
हकीकत : मानसिक रूप से बीमार लोगों के खुदकुशी करने की आशंका अधिक होती है, लेकिन सामान्य लोग भी कुछ हालात में ऐसा कर सकते हैं।
मिथक : आत्महत्या के बारे में बात करना इसके लिए उकसा सकता है।
हकीकत : आत्महत्या के बारे में सोच रहे लोगों को किसी न किसी से बातचीत की जरूरत होती है। उनसे बात जरूर करनी चाहिए।
आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को तुरंत मदद उपलब्ध कराएं। इलाज और काउंसिलिंग की मदद से वे फिर से सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी सकते हैं। – प्रोफेसर डॉ. आर.पी बेनीवाल, मनोचिकित्सक, राम मनोहर लोहिया अस्पताल
खुदकुशी की कोशिश करने वाले 96 प्रतिशत लोग सफल नहीं हो पाते  कई तो चलने-फिरने के लायक भी नहीं बचते।

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