लॉकडाउन में जानवरों-पक्षियों का सहारा बने सुखचैन, भूख-प्यास शांत करने के लिए ऐसे कर रहे हैं मदद

उत्तर प्रदेश के शामली में समाजसेवी सुखचैन वालिया लॉकडाउन की विषम परिस्थितियों में बेजुबान जानवरों और पंक्षियों की सेवा में जुटे हुए हैं। शामली में लॉकडाउन के चलते कई गरीब परिवारों ने अपने ऐसे गौवंशों को छोड दिया है जो किसी कारणवश या तो दूध नहीं दे रहे हैं या फिर इन परिवारों के पास पैसा, घास व रख रखाव के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे आवारा गौवंश सडकों पर खाने की तलाश में भटकते रहते हैं और आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार भी हो रहे हैं। ऐसा ही एक नजारा गुरुवार को उस समय देखने को मिला जब कैराना रोड और मेरठ रोड पर घायल मिलों दो गायों की जानकारी पाकर सुखचैन मौके पर पहुंचे तथा उन्हे अपने यहां बनायी गयी गौशाला में सहारा दिया तथा उनका उपचार कराकर चारे की व्यवस्था कराई। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण को लेकर लागू लॉकडाउन आवारा पशुओं पर भारी पड़ रहा है। ये बेजुबान अपने भूखे प्यासे होने की तकलीफ किसी को नहीं बता सकते तथा खाने की तलाश में यहां वहां भटकते रहते हैं जिससे कई बार वे दुर्घटनाओं का भी शिकार हो जाते हैं, ऐसे में हमारा फर्ज बनता है कि इन बेजुबानों का सहारा बने। सुखचैन ने बताया कि एक गाय अमरीकन जबकि दूसरी सांगवान नस्ल की है और दोनों की उम्र लगभग डेढ साल के आसपास है। बेजुबानों की परेशानी को देखकर एसपी विनीत जायसवाल ने सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से पशु-पक्षियों का सहारा बनकर उन्हें भोजन चारा आदि की व्यवस्था करने की अपील की थी जिसके बाद उन्होंने पशु-पक्षियों की देखभाल करने का बीड़ा उठाया। अब वे प्रतिदिन ऐसे बेजुबानों पशु-पक्षियों के लिए खाने का इंतजाम कर रहे हैं ताकि वे भूखे न रहे। ऐसा करने से उनके मन को सुख,चैन और आनन्द मिलता है।
उत्तर प्रदेश के शामली में समाजसेवी सुखचैन वालिया लॉकडाउन की विषम परिस्थितियों में बेजुबान जानवरों और पंक्षियों की सेवा में जुटे हुए हैं।

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