वेतन मद में बदलाव के जरिये बचा सकते हैं ज्यादा टैक्स

 

नई दिल्ली। वेेतनभोगी वर्ग में बहुत सारे लोग जानकारी के अभाव में ज्यादा टैक्स छूट हासिल करने का मौका गंवा देते हैं। जबकिा नौकरीपेशा वर्ग अपने वेतन मद में बदलाव के जरिये आसानी से बड़ी बचत कर सकते हैं। इसके लिए कंपनी के मानव संसाधन (एचआर)के पास एक आवेदन देना होगा। आवेदन के आधार पर वेतन की मद में कई भत्तों को शामिल कर दिया जाएगा। हालांकि, भत्तों के जरिए टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए दस्तावेज प्रमाण के तौर पर जमा करने होंगे।

इन 10 तरीकों से राहत पा सकते हैं करदाता

1. मकान किराया भत्ता : यह मकान के किराये पर मिलने वाला भत्ता होता है। किराया भत्ता मूल वेतन का 40 से 50 फीसदी तक होता है, जो कि स्थानीय निवास पर निर्भर करता है।
2. मोबाइल बिल अदायगी : कंपनी अपने कर्मचारी के लिए मोबाइल बिल भुगतान पर कर छूट की सुविधा देती है। आप मोबाइल, टेलीफोन (ब्रॉडबैंड) के बिल भुगतान पर यह छूट ले सकते हैं।
3. दवा के बिल पर छूट : कंपनी कर्मचारी को स्वास्थ्य खर्च भत्ते के रूप में देती है। यह भुगतान दवा की रसीद देने पर मिलती है। सालाना 15,000 रुपए के बिल पर टैक्स छूट मिलती है।
4. घूमने के खर्च पर राहत : कंपनी घूमने की एवज में भत्ता देता है। चार वित्त वर्षों के दौरान सिर्फ दो यात्राएं कर छूट के दायरे में आती हैं। कर छूट लेने के लिए खर्चों की रसीद जरूरी होता है।
5. पढ़ाई के खर्च पर छूट : अगर आपका नियोक्ता यह भत्ता दे रहा है तो आप दो बच्चों पर प्रति महीना 600 रुपये या सालाना 7200 रुपये की छूट का दावा कर सकते हैं।
6. ट्रांसपोर्ट भत्ता : घर से ऑफिस और ऑफिस से घर तक आने-जाने के लिए कंपनी की तरफ से ट्रांसपोर्ट भत्ता दिया जाता। इस मद में सालाना 19,200 रुपये की राशि पर कर छूट मिलती है।
7. फूड कूपन : नियोक्ता कर्मचारियों को काम करने के दौरान यह कूपन देता है। रोज दो कूपन 100 रुपये के दिए जा सकते हैं। इस तरीके से पूरे साल में 26,400 रुपये की छूट संभव है।
8. कार रखरखाव भत्ता : कार रखरखाव, ईंधन और ड्राइवर की सैलरी की एवज में कर छूट मिलती है। कोई कर्मचारी 2700 रुपये से 3300 रुपये तक की छूट प्रति महीने पा सकता है।
9. गिफ्ट वाउचर : कंपनी कर्मचारी को 5000 रुपये मूल्य तक के उपहार, वाउचर या टोकन भी देती है। कई कंपनियां अपने नियोक्ता को कर छूट पाने के लिए यह भत्ता देती है।
10. मनोरंजन लागत : यह सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है। 5,000 रुपए की राशि, वेतन का पांचवा हिस्सा या फिर असल मनोरंजन खर्च, जो भी कम होता है उस पर छूट मिलती है।

 

 

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