राज्य में शुरू हुआ टेक्नोलॉजी एण्ड इनोवेशन सेंटर (टिस्क)

 

स्र्टाटअप उद्यमियों के साथ अन्य इनोवेटर को मिली सुविधा

जयपुर, 12 सितम्बर (का.सं.)। राजस्थान देश के उन छह राज्यों में शामिल हो गया है जहां पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं डिजायन के लिए प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन टेक्नोलॉजी एण्ड इनोवेशन सेंटर (टिस्क) की स्थापना की गई है। अब राज्य का कोई भी इनोवेटर (किसान, व्यक्तिगत, वैज्ञानिक, शोधकर्ता या अन्य) इस सेंटर के माध्यम से पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं डिजायन के लिए आवेदन कर सकता है। यह जानकारी विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया की सेंटर के शुरू होने से इनोवेटर को राज्य में इस सुविधा का लाभ मिलने से पेटेंट की प्रक्रिया में तीव्रता आएगी तथा उसको भारत सरकार की स्कीम का भी लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया की विभाग के अधीन पेटेंट सूचना केन्द्र बौद्धिक सम्पदा अधिकार संबंधित विषयों के लिए नोडल एजेंसी पहले से ही घोषित किया जा चुकी है और वर्ष 2018 में राज्य से 186 पेटेंट दाखिल किए गए है। सिन्हा ने बताया की टिस्क पेटेंट फाइलिंग के लिए कार्य करेगा, पेटेंट की प्रमाणिकता को देखेगा साफ्टवेयर की मदद से रिपोर्ट जनरेट करेगा, मार्केट में टेक्नोलॉजी से अन्य विविधताओं की विवेचना कर पेटेंट की प्रक्रिया को आगे बढाएगा। इससे राज्य के इनोवेटर को अब कई समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। जी.आई उत्पादों को दी जाएगी विशेष पहचान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सचिव सिन्हा ने बताया की राज्य में 14 उत्पाद को ज्योग्राफीकल इडीकेंशन में पंजीकृृत हो चुके है। इन उत्पादों को किस तरह आगे बढ़ाया जाए एवं इनसे जुड़े लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण, उत्पाद की गुणवत्ता, ई-कामर्स प्लेटफार्म उपलब्ध करवाना, प्रमुख पर्यटक स्थानों पर इनकी बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था करना इत्यादि विषयों पर एक समिति का भी गठन किया गया है। जिसमें कृषि, उद्योग, आयुर्वेद, वन, खाद्य एवं आपूर्ति, कला एवं संस्कृति तथा उद्यान विभाग के आयुक्त व निदेशक स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के साथ केन्द्र सरकार के दो विभागों के विशेषज्ञ अधिकारी भी शामिल किए गये है। उन्होंने बताया की यह समिति जी.आई. पंजीकरण कराने वाली संस्थानों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न विभागों से समन्वय का कार्य भी करेगी। उन्होंने बताया कि राज्य से जी.आई. पंजीकरण करने के लिए शुल्क का पुनर्भरण भी विभाग द्वारा किया जाएगा इस निर्णय से राज्य के किसानों, कलाकारों, कारीगरों, का सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन होगा।

 

 

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