डीटीओ ऑफिस शिफ्ट रोक लगाने का विवाद थमा नहीं

शहरी बनाम ग्रामीण बन गया है मुद्दा

श्रीगंगानगर, 18 अगस्त (का.सं.)। हनुमानगढ़ मार्ग से जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) का कार्यालय पदमपुर मार्ग पर शहर से करीब 16 किमी दूर चूनावढ़ कोठी में सिंचाई विभाग के पुराने विश्राम गृह में स्थानांतरित करने और फिर रोक लगा पुराने किराए के भवन में ही रखे जाने का विवाद अभी थमा नहीं है। यह विवाद अब शहरी बनाम ग्रामीण का मुद्दा बन गया है। चूनावढ़ कोठी तथा इसके आसपास की आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के सरपंचों सहित ग्रामीण क्षेत्र के जागरूक लोगों के शिष्टमंडल ने आज जिला कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा को ज्ञापन देकर चेतावनी दे डाली कि अगर 7 दिन में डीटीओ कार्यालय को वापिस चूनावढ़ कोठी सिंचाई विश्राम गृह में स्थानांतरित कर शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आंदोलन शुरू कर देंगे। ग्रामीण मजदूर किसान संघर्ष समिति (जीकेएस) के चूनावढ ब्लॉक अध्यक्ष रामकुमार सहारण की अगुवाई में जिला कलेक्टर से मिले शिष्टमंडल में दलीप सहारण, राजेश, अवतार सिंह सरपंच चक 3-जी, सुरेंद्र, बलराज सरपंच 5-जी, गुरसेवक सिंह, प्रभजोत सिंह सरपंच साहिबसिंहवाला आदि ग्रामीण जनप्रतिनिधि और जागरूक लोग शामिल रहे। इन ग्रामीणों ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में विरोध जताया है कि जब डीटीओ ऑफिस को सिंचाई विश्राम गृह में स्थानांतरित किए जाने के आदेश परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों और खुद जिला कलेक्टर द्वारा दिए जा चुके हैं, तो अब उसे वापस हनुमानगढ़ मार्ग पर किराए के भवन में किसलिए रखा जा रहा है। चूनावढ़ कोठी सिंचाई विश्राम गृह में यह ऑफिस शिफ्ट होने से पदमपुर, रायसिंहनगर, केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर, घमूडवाली, जैतसर, रावला घड़साना तक के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी कि उन्हें अब श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर इस कार्यालय में काम के लिए नहीं जाना पड़ेगा। ज्ञापन में आक्रोश जताया गया है कि श्रीगंगानगर के कुछ राजनीतिज्ञों ने इस कार्यालय के स्थानांतरण का विरोध किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ इस कार्यालय के कर्मचारियों में भी निराशा है। कार्यालय का तमाम रिकॉर्ड नए भवन में शिफ्ट कर देने के बाद उस पर रोक लगा देना कतई उचित नहीं है। इसलिए 7 दिन में नए भवन में कार्यालय को शुरू किया जाए। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलेगी बल्कि इस नए स्थल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उल्लेखनीय है कि विगत 15-16 अगस्त को अवकाश के दिनों में डीटीओ ऑफिस को नई स्थल पर स्थानांतरित करने का काम शुरू कर दिया गया था, लेकिन 16 अगस्त को जब विधायक राजकुमार गौड़ सहित कई जनप्रतिनिधियों को इसका पता चला तो उन्होंने परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई। लिहाजा उसी दिन शाम को स्थानांतरण पर स्थानीय जिला प्रशासन ने रोक लगा दी। जिला कलेक्टर ने 20 जुलाई को यह कार्यालय स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी थी। कार्यालय अब वही पुरानी जगह पर चल रहा है। कल सोमवार को पूर्व पार्षद संदीप शर्मा की अगुवाई में जिला प्रशासन को एक ज्ञापन दिया गया था,जिसमें मांग की गई थी कि इस ऑफिस को आखिर गुपचुप कि साजिश के तहत शिफ्ट किया जा रहा था। इसकी जांच करवाई जाए। अब ग्रामीण भी इस कार्यालय को नई स्थल पर स्थानांतरित करवाने के पक्ष में उतर आए हैं। उनका कहना है कि नया स्थल सरकारी है और उसमें बना भवन भी सरकारी है,जिसका परिवहन विभाग को किराया भी नहीं देना पड़ेगा। मौजूदा भवन के लिए विभाग को सालाना करीब दो लाख 50 हजार का किराया देना पड़ रहा है। तर्क वितर्क,आरोप-प्रत्यारोप डीटीओ ऑफिस को स्थानांतरित करने और फिर इस पर रोक लगाने के इस मामले को लेकर जहां सियासत तेज हो रही है, वही तर्क वितर्क तथा आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं। जहां शहर के लोग इस ऑफिस को शहर में रखने के पक्ष में हैं, वहीं शहर में ऐसे लोग भी हैं जो नई स्थल पर कार्यालय स्थानांतरित करने के पक्षधर हैं। इन लोगों का कहना है कि नए स्थल पर ड्राइविंग टेस्ट ट्रेक भी बन सकेगा जो कि अभी किराए के भवन में जगह नहीं होने के कारण नहीं बन पाया। शहर से चूनालढ़ कोठी करीब 16 किलोमीटर दूर है। पक्ष में आए लोगों का कहना है कि जब शहर के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ठोस कचरा संयंत्र प्लांट बाहर ग्रामीण क्षेत्र में बन सकते हैं तो फिर डीटीओ ऑफिस शिफ्ट करने में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। श्रीगंगानगर से हवाई पट्टी भी 18 किमी दूर लालगढ़ जाटान में है। विरोध कर रहे शहरवासियों का कहना है कि इतनी दूर ऑफिस ले जाने के बजाय शहर के जनप्रतिनिधियों को डीटीओ ऑफिस के लिए पुरानी शुगर मिल वाली, जगह जहां मिनी सचिवालय प्रस्तावित है, उसी परिसर में 10 बीघा भूमि आवंटित करवानी चाहिए। इस पर कार्यालय बनवाने के लिए जनप्रतिनिधि सरकार से बजट भी पास करवाएं। परिवहन सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व कमा कर देने वाले विभागों में शामिल है। इसलिए बजट मंजूर करवाने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। उल्लेखनीय है कि नए मिनी सचिवालय परिसर वाली जगह पर वाणिज्य कर विभाग का भवन लगभग बनकर तैयार हो गया है।यह विभाग भी कमाऊ विभागों में सबसे ऊपर रहता है। एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि अगर सरकार बजट नहीं देती तो परिवहन विभाग मिनी सचिवालय परिसर में जगह मिलने पर किसी वित्तीय संस्थान से ऋण लेकर अपना कार्यालय तथा ड्राइविंग टेस्ट ट्रेक बना सकता है। आखिर परिवहन विभाग वर्ष 2008 से प्रतिवर्ष 2 लाख 50 हजार किराया अदा कर रहा है तो वह वित्तीय संस्थान के ऋण की किस्त भी आसानी से अदा कर सकता।

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