बैली फैट को कम करने के लिए आजमाएं ये 5 योगासन, कोर मसल्स होंगी मजबूत

बैली फैट मोटापे के कारण होने वाली सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है। पेट की चर्बी से निजात पाने के लिए आप इन 5 योगासनों का अभ्या़स कर सकती हैं।कभी न कभी हम सभी फ्लैट टमी और वॉशबोर्ड एब्स चाहते हैं। पर बैली फैट इस सपने के बीच में खड़ी सबसे बड़ी बाधा है। अपने कोर मसल्स को मजबूत और टाइट बनाने से पहले हमें यह भी जान लेना चाहिए कि आखिर पेट पर इतनी सारी चर्बी जमने का कारण क्या है।
पेट की चर्बी जमा होने के क्या कारण हो सकते हैं-पेट पर चर्बी यानी बैली फैट कई कारणों से जमा हो जाती है, जिसमें खराब आहार, व्यायाम की कमी और तनाव शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि आपके जीन भी कई बार पेट पर चर्बी जमा होने का कारण बनते हैं।कई बार आनुवांशिक कारणों से भी आप डायबिटीज या मोटापे के प्रति ज्यादा जोखिम रखते हैं। पर एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर आप अपनी फिगर को सही शेप में रख सकती हैं। यदि आप अनहेल्दी डाइट लेती हैं, नींद का पैटर्न ठीक नहीं है और शारीरिक श्रम नहीं करती हैं तो आपके पेट पर चर्बी आसानी से जमा होने लगती है।
योग गुरु ग्रैंड मास्टर अक्षर कहते हैं, पेट पर जमा चर्बी न केवल आपके स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा देती है, बल्कि यह मोटापे का सबसे खराब दिखने वाला हिस्सा है। ज्यादा वजन बढ़ जाने से आप सुस्त हो जाती हैं और थकान महसूस कर सकती हैं। बैली फैट बढऩे का सबसे खतरनाक प्रभाव यह है कि इससे आप मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं।जीवनशैली में जरूरी बदलाव जैसे हेल्दी डायट और शारीरिक गतिविधि से आप बैली फैट से छुटकारा पा सकती हैं, इसमें योग आपकी काफी मदद कर सकता है।बैली फैट घटाने के लिए इन योगासनों का अभ्यास 30 सेकंड के लिए अवश्य करें और इन्हें दोहराते हुए तीन सेट में करें।
1. कपलभाति-संस्कृत में, ‘कपाल का अर्थ है खोपड़ी और ‘भाति का अर्थ है ‘चमकने वाला/प्रकाशमान। इसलिए कपालभाति प्राणायाम को स्कल शाइनिंग ब्रीदिंग टैक्नीक के रूप में भी जाना जाता है।
दिशा-निर्देश-एक आरामदायक मुद्रा में बैठें। अपनी पीठ को सीधा करें और अपनी आंखें बंद करें। अपनी हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें। सामान्य रूप से श्वास लें और एक गहरी, मजबूत और लयबद्ध सांस छोडऩे पर फोकस करें। अपने डायाफ्राम और फेफड़ों में मौजूद सांस को बाहर निकालने के लिए आप अपने पेट का इस्तेमाल करें। जब आप सांस लें तो आपका पेट खुद ब खुद संकुचित होना चाहिए।
कपालभाति के लाभ-यह पाचन तंत्र और पेट की मांसपेशियों को मजबूत और एक्टिव करता है। यह नाक के मार्ग को मजबूत करता है और छाती में रुकावट को दूर करता है। यह रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देता है। यह त्वचा के रंग में सुधार लाता है और चेहरे पर एक चमक लाता है। यह स्मरण शक्ति बढ़ाता है। मानसिक स्पष्टता और तनाव और अवसाद को दूर करने में मददगार है। यह शरीर में मौजूद एक्ट्रा फैट को कम करने में मददगार है।
2. नौकासना
आसन की सही अवस्था-अपनी पीठ के बल लेट जाएं। अपनी सिटिंग बोन्स को संतुलित बनाने के लिए अपने शरीर के ऊपरी और निचले शरीर को उठाएं। आपके पैर की उंगलियां आपकी आंखों के साथ अलाइन करें। अपने घुटनों और पीठ को सीधा रखें। अपने हाथों को जमीन के समानांतर और सामने की ओर फैला हुआ रखें। अपने पेट की मांसपेशियों को कस लें और पीठ को सीधा करें। आराम से सांस लेती रहें।
नौकासन के लाभ-यह पीठ, पेट और पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह पाचन तंत्र के कामकाज में सुधार करता है। यह कमर को टोन करता है और वजन कम करने को बढ़ावा देता है। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से होने वाली समस्याओं को कम करता है। जिससे सुस्ती दूर होती है। यह पेट की मांसपेशियों के निर्माण में मददगार होता है। यह तंत्रिकातंत्र और हार्मोनल सिस्टम को सुचारू बनाता है।
सांस लेने की पद्धति-जब आप अपने शरीर को फर्श से उठाती हैं तो सांस लें, पर अगर आप ज्यादा देर तक इसी आसन में रहना चाहती हैं, तो सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें।
जैसे ही आप अपने शरीर को फर्श से उठाते हैं। यदि आप आसन को बहुत लंबे समय तक करते हैं, तो सांस को सामान्य रूप से छोड़ें।
वशिष्ठासन (साइड प्लैंडक पोज)
आसन की सही अवस्था-संतुलनासन यानी बैलेंसिंग पोज से शुरूआत करें। अपनी बाई हथेली को फर्श पर टिका कर दाईं हथेली को उपर उठा लें। अपने पूरे शरीर को दाहिनी ओर के सामने करें और अपने दाहिने पैर को फर्श से उठाकर अपने बाएं पैर के ऊपर रखें।अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठाएं। और अपनी उंगलियों को आकाश की ओर इंगित करती रहें। यह सुनिश्चित करें कि आपके घुटने, एड़ी और पैर दोनों साथ जुड़े हुए हों। सुनिश्चित करें कि दोनों हाथ और कंधे एक सीध में हैं और अपने सिर को देखें और अपने दाहिने हाथ को ऊपर की ओर देखें। कुछ देर इसी पोज में रहें और फिर यही आसन दूसरे हाथ से भी दोहराएं।
वशिष्ठासन के लाभ
धीरे-धीरे आप इस आसन में लंबे समय तक रहना सीख जाती हैं। यह आपकी संतुलन की क्षमता को भी बढ़ाता है। जिससे आपके हाथों और कंधों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। यह आपकी कमर के चारों ओर जमी हुई चर्बी को घटाता है। इससे बैलेंस और फोकस में इजाफा होता है। साथ ही कलाई भी मजबूत बनती है।
सांस लेने की पद्धति-जैसे ही आप अपने शरीर को फर्श से उठाते हैं, गहरी सांस लें। यदि आप आसन को बहुत लंबे समय तक करती हैं, तो सामान्य रूप से सांस लें।
4. संतुलनासन (प्लैंक पोज)
आसन की सही अवस्था
अपने पेट के बल लेटें। अपनी हथेलियों को अपने कंधों के नीचे रखें और अपने ऊपरी शरीर, पेल्विक और घुटनों को ऊपर उठाएं। फर्श को पकडऩे के लिए अपने पैर की उंगलियों का प्रयोग करें और घुटनों को सीधा रखें। सुनिश्चित करें कि आपके घुटने, पेल्विक और रीढ़ एक सीधी रेखा में हों। हाथों के सहारे आपकी कलाई बिल्कुल कंधों के नीचे होनी चाहिए।

थोड़ी देर के लिए इसी मुद्रा में रहें।
संतुलनासन के लाभ-यह जांघ, हाथ और कंधों को मजबूत करता है। यह रीढ़ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह कोर की मांसपेशियों का निर्माण करता है। यह तंत्रिका तंत्र में संतुलन को बेहतर बनाता है।यह मणिपुर चक्र को उत्तेजित करता है। यह पूरे शरीर को सक्रिय करता है और सकारात्मकता की भावना पैदा करता है। इसके नियमित अभ्यास से आंतरिक संतुलन और सद्भाव की भावना विकसित होती है।

सांस लेने की पद्धति
जैसे ही आप अपने शरीर को फर्श से उठाते हैं, गहरी सांस लें। यदि आप आसन को बहुत लंबे समय तक करती हैं, तो सामान्य रूप से सांस लें।इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना एक समझदारी भरा विकल्प है, सुनिश्चित करें कि प्रोसेस्ड शुगर युक्त खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन कम करें। इसकी जगह साबुत फल, सलाद और हरी सब्जियों का सेवन करें, जो आपको सेहतमंद रहने में मदद करेंगे।

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