क्यों नही आती है परफेक्ट सेल्फी, साइंस ने दिया इस पहेली का हल

आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी सेल्फी ली जाती है, तो वह उतनी अच्छी नहीं होती है, जितने आप दिख रहे होते हैं। आपके भी मन में यह ख्याल कई बार आता होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है। विज्ञान ने इस पहेली का हल निकाल लिया है। विज्ञान ने कहा कि अगर आपका हाथ पांच फीट यानी 1.5 मीटर का हो, तो परफेक्ट सेल्फी ली जा सकती है।छ्व्ररू्र फेशियल प्लास्टिक सर्जरी जर्नल में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, 5 फीट की दूरी से क्लिक की गई तस्वीरों में चेहरे की विकृति नहीं दिखती है। इसा नहीं होने पर आपकी नाक 30 प्रतिशत तक बड़ी दिख सकती है।प्लास्टिक सर्जन और अध्ययन के को-ऑथर बोरीस पास्कहोवर ने इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कई साल से मैंने मरीजों और परिवार के सदस्यों को सेल्फी दिखाने के दौरान यह कहते हुए सुना है कि मेरी नाक को देखो। ये सेल्फी लेने में काफी बड़ी दिखती है। उन्होंने लाइव साइंस को बताया कि मैं हमेशा अपने मरीजों को बताता था कि आप जैसे वास्तव में दिखते हैं, यह वैसी नहीं है।मुझे पता था कि सेल्फी नाक के आकार को विकृत करती है। मैं इसे साबित करना चाहता था। रुटगर्स न्यूजर्सी मेडिकल स्कूल और कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अपने साथियों के साथ पास्कहोवर और उनके सहयोगियों ने कैमरे के एंगल और दूरी से सेल्फी के खराब होने के कारण की व्याख्या करने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया।शोधकर्ताओं ने फिर कैमरे को 12 इंच (30 सेमी) दूर, 5 फीट (1.5 मीटर) दूर और अनंत दूरी पर रखकर चेहरे की विशेषताओं के सापेक्ष विरूपण को देखा। लेखकों ने लिखा कि अनुमानत: 5 फीट यानी करीब 1.5 मीटर की दूरी से ली गई सेल्फी में नाक के आकार में कोई अंतर नहीं आता है। यानी अगर आप भी अपनी परफेक्ट सेल्फी लेना चाहते हैं, तो कैमरे को इतनी ही दूरी पर रखना होगा।अमेरिकन एकेडमी ऑफ फेशियल प्लास्टिक एंड रिकोनस्ट्रक्टिव सर्जरी इंक की ओर से साल 201 में इस बारे में एक सर्वे किया गया था। इसमें प्लास्टिक सर्जन्स ने बताया था कि उनके पास आने वाले करीब 50 प्रतिशत से अधिक मरीज सेल्फी में खुद को बेहतर दिखाने के लिए उपचार कराने के लिए आते हैं।
परफेक्ट सेल्फी के लिए ऐप
परफेक्ट सेल्फी लेने की कला में जो लोग माहिर नहीं हैं, उनके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू में कम्प्यूटर साइंटिस्ट्स ने एक ऐप तैयार किया है, जो उसी समय आपके इंस्टाग्राम फीड में सेव हो सकता है। यह ऐप एल्गोरिथम के जरिए कैमरे की पोजिशनिंग पर यूजर्स को डायरेक्शन देता है, ताकि फोटो लेने की प्रक्रिया में अच्छा सेल्फी ली जा सके।यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटर साइंस के प्रोफेसर डेन वोजेल ने कहा कि ये उन अन्य ऐप्स के उलट, जो कि फोटो लेने के बाद उसे एन्हेंस करने की सुविधा देता है। यह सिस्टम आपको डायरेक्शंस देता है ताकि लेते समय ही फोटो बेहतर आए।
ब्रिटेन में शुरु हुआ कोर्स
अब ब्रिटेन के एक कॉलेज में इसे पाठ्यक्रम के तौर पर पढ़ाया जाएगा। सिटी लिट कॉलेज पहली बार मार्च से इस कोर्स को शुरू करने जा रहा है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एक महीने तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम की फीस 10 हजार रुपए (160 अमेरिकी डॉलर) रखी गई है। लेक्चर और सेमिनार के जरिये छात्रों को खुद से खुद की फोटोग्राफी करने के कलात्मक पहलुओं की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।

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