वो दिन दूर नहीं जब दुनिया कहेगी भारत लोकतंत्र की जननी है : पीएम मोदी

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकतंत्र को भारत का एक ”संस्कार बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि भारतीय लोकतांत्रिक परम्पराएं 13वीं शताब्दी में रचित ”मैग्ना कार्टा से भी पहले की हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब दुनिया भी भारत को लोकतंत्र की जननी कहेगी। नये संसद भवन की आधारशीला रखने के बाद मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय लोकतंत्र का इतिहास देश के हर कोने में नजर आता है और इसके पक्ष में उन्होंने शाक्य, मल्लम और वज्जि जैसे गणतंत्र तथा लिच्छवी, मल्लक मरक और कम्बोज जैसे गणराज्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सभी ने लोकतंत्र को ही शासन का आधार बनाया था। हजारों साल पहले रचित हमारे वेदों में से ऋग्वेद में लोकतंत्र के विचार को समज्ञान यानि समूह चेतना के रूप में देखा गया है। मोदी ने कहा कि आमतौर पर अन्य जगहों पर जब लोकतंत्र की चर्चा होती है तो चुनाव प्रक्रियाओं और शासन-प्रशासन की बात होती है तथा इस प्रकार की व्यवस्था पर अधिक बल देने को ही कुछ स्थानों पर लोकतंत्र कहा जाता है। उन्होंने कहा कि लेकिन भारत में लोकतंत्र एक संस्कार है। भारत के लिए लोकतंत्र जीवन मूल्य है, जीवन पद्धति है, राष्ट्र जीवन की आत्मा है। भारत का लोकतंत्र, सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है। भारत के लिए लोकतंत्र में, जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और साथ ही व्यवस्था का तंत्र भी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इसमें व्यवस्थाएं और प्रक्रियाएं बदलती रहीं लेकिन आत्मा लोकतंत्र ही रही। उन्होंने कहा कि और विडंबना देखिए, भारत का लोकतंत्र हमें पश्चिमी देशों से समझाया जाता है। जब हम विश्वास के साथ अपने लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवगान करेंगे, तो वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भी कहेगी- भारत लोकतंत्र की जननी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात का भी उल्लेख किया कि आजादी के समय एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत के अस्तित्व पर संदेह और शंकाएं जताई गई थीं तथा अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक विविधता और अनुभवहीनता जैसे अनेक तर्कों के साथ ये भविष्यवाणी भी कर दी गई थी कि भारत में लोकतंत्र असफल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश ने उन आशंकाओं को ना सिर्फ गलत सिद्ध किया है बल्कि 21वीं सदी की दुनिया भारत को एक अहम लोकतांत्रिक ताकत के रूप में आगे बढ़ते हुए देख भी रही है। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र भारत में क्यों सफल हुआ, क्यों सफल है और क्यों कभी लोकतंत्र पर आंच नहीं आ सकती, इसे हर पीढ़ी को जानने और समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में 13वीं शताब्दी में रचित मैग्ना कार्टा की बहुत चर्चा होती है। कुछ विद्वान इसे लोकतंत्र की बुनियाद भी बताते हैं। लेकिन ये भी बात उतनी ही सही है कि मैग्ना कार्टा से भी पहले 12वीं शताब्दी में ही भारत में भगवान बसवेश्वर का ‘अनुभव मंटपम अस्तित्व में आ चुकी था। उन्होंने कहा कि अनुभव मंटपम के रूप में भगवान बसवेश्वरने लोक संसद का न सिर्फ निर्माण किया था बल्कि उसका संचालन भी सुनिश्चित किया था। उन्होंने कहा, कि अनुभव मंटपम, लोकतंत्र का ही तो एक स्वरूप था। इस कड़ी में प्रधानमंत्री ने चेन्नई से 80-85 किलोमीटर दूर उत्तरामेरुर नाम के गांव में चोल साम्राज्य के दौरान 10वीं शताब्दी में पत्थरों पर तमिल में लिखी गई पंचायत व्यवस्था के वर्णन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसमें बताया गया है कि कैसे हर गांव को कुडुंबु में कैटेगराइज (वर्गीकरण) किया जाता था, जिनको हम आज वार्ड कहते हैं। इन कुडुंबुओं से एक-एक प्रतिनिधि महासभा में भेजा जाता था और जैसा आज भी होता है। इस गांव में हजार वर्ष पूर्व जो महासभा लगती थी, वो आज भी वहां मौजूद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक हजार वर्ष पूर्व बनी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक और बात बहुत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि उस पत्?थर पर लिखा हुआ है कि जनप्रतिनिधि को चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य घोषित करने का भी प्रावधान है। उस जमाने में यह नियम था कि जो जनप्रतिनिधि अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं देगा, वो और उसके करीबी रिश्तेदार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे मोदी ने कहा कि लोकतंत्र का भारत का ये इतिहास देश के कोने-कोने में नजर आता है। उन्होंने कहा कि सभा, समिति, गणपति, गणाधिपति, ये शब्दावलि हमारे मन-मस्तिष्क में सदियों से प्रवाहित है। सदियों पहले शाक्य, मल्लम और वज्जि जैसे गणतंत्र हों, लिच्छवी, मल्लक मरक और कम्बोज जैसे गणराज्य हों या फिर मौर्य काल में कलिंग, सभी ने लोकतंत्र को ही शासन का आधार बनाया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोकतंत्र में समाहित शक्ति ही देश के विकास को नई ऊर्जा और देशवासियों को नया विश्वास दे रही है। उन्होंने कहा, ”दुनिया के अनेक देशों में जहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर अलग स्थिति बन रही है, वहीं भारत में लोकतंत्र नित्य नूतन हो रहा है। हाल के बरसों में हमने देखा है कि कई लोकतांत्रिक देशों में अब मतदाता प्रतिशत लगातार घट रहा है। इसके विपरीत भारत में हम हर चुनाव के साथ मतदाता प्रतिशत को बढ़ते हुए देख रहे हैं। इसमें भी महिलाओं और युवाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ती जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *